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Budget 2026: बाजार के शोर में न खोएं आपा, एक्सपर्ट से समझें निवेश को मुनाफे में बदलने का मंत्र

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जहां एक ओर इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़े भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाजार का उतार-चढ़ाव निवेशकों को भ्रम में डाल रहा है

Last Updated- February 01, 2026 | 8:22 AM IST
Union Budget 2026
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण | फाइल फोटो

बजट आते ही शेयर बाजार में हलचल तेज हो जाती है और निवेशकों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं। क्या अब पोर्टफोलियो बदलने का समय है या फिर इंतजार करना बेहतर रहेगा? केंद्रीय बजट 2026 और इकोनॉमिक सर्वे के बीच यही उलझन इस बार भी देखने को मिल रही है। जहां एक ओर आंकड़े भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाजार का उतार-चढ़ाव निवेशकों को भ्रम में डाल रहा है। ऐसे माहौल में सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) और रिचनेस एकेडमी के फाउंडर तारेश भाटिया की सलाह साफ है कि बजट के शोर में फैसले लेने के बजाय देश की आर्थिक बुनियाद और लंबी अवधि की दिशा पर भरोसा रखें। यही सोच निवेश को सही रास्ते पर बनाए रखती है।

1. 7% की रफ्तार: कहानी अभी बाकी है

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक भारत की ग्रोथ 6.8 से 7.2 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सुधारों, मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे बड़े खर्च का नतीजा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब देश की ग्रोथ करीब 7 फीसदी तक पहुंच गई है, जो निवेशकों के लिए लंबे समय में पैसा बढ़ाने का मजबूत मौका है।

2. बजट एक दिशा है, नियति नहीं

अक्सर देखा जाता है कि बजट के दिन शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव होता है। लेकिन भाटिया स्पष्ट करते हैं, “बजट रातों-रात किस्मत नहीं बदलते। इनका वास्तविक प्रभाव आने में सालों लग सकता है। बजट के तुरंत बाद बाजार की प्रतिक्रिया अक्सर केवल ‘शोर’ होती है, वास्तविक संकेत नहीं।”

Also Read: Budget 2026: वरिष्ठ नागरिकों को वित्त मंत्री से बड़ी आस; क्या ब्याज, आय और हेल्थ प्रीमियम पर मिलेगी टैक्स छूट?

3. राजकोषीय अनुशासन बनाम विकास (Growth vs Debt)

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऊंचे कर्ज और ब्याज लागत को संतुलित करना है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार ‘राजकोषीय समेकन’ (Fiscal Consolidation) की राह पर है। रेवड़ियों के बजाय ‘कैपिटल एक्सपेंडिचर’ (CapEx) पर ध्यान देना यह दर्शाता है कि विकास की नींव टिकाऊ है।

4. निवेशकों के लिए ‘गोल्डन रूल्स’

मौजूदा हालात में निवेशकों के लिए तीन अहम बातें साफ तौर पर सामने आती हैं:

  • जल्दबाजी में फैसले न लें: बजट या किसी बड़ी खबर के चलते तुरंत पोर्टफोलियो बदलने से बचें।
  • लंबी अवधि पर नजर रखें: भारत की ग्रोथ की कहानी कई सालों की है, इसका असर शेयर बाजार में भी समय के साथ दिखता है।
  • सरल तरीका अपनाएं: इंडेक्स या डायवर्सिफाइड फंड्स में निवेश बनाए रखें, बार-बार बदलाव करना फायदे की बजाय नुकसान कर सकता है।

प्रक्रिया पर रखें भरोसा, घटनाओं पर नहीं

भाटिया के मुताबिक, बाजार सिर्फ बजट के दम पर नहीं चलता, बल्कि दुनिया के हालात, ब्याज दरों और कंपनियों की कमाई भी इसे प्रभावित करती है। सही निवेश किसी एक दिन का फैसला नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। अगर आप अपने निवेश को लक्ष्यों से जोड़कर रखते हैं और SIP व एसेट एलोकेशन में अनुशासन बनाए रखते हैं, तो भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का फायदा समय के साथ जरूर मिलेगा।

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First Published - January 31, 2026 | 6:19 PM IST

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