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IMD Weather Alert: फरवरी में सताएगी समय से पहले गर्मी, रबी फसलों और अन्य पैदावार पर मंडराया खतरा

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IMD ने फरवरी में उत्तर-पश्चिम भारत समेत ज्यादातर हिस्सों में तापमान बढ़ने और बारिश कम होने की संभावना पर रबी फसलों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं

Last Updated- January 31, 2026 | 7:39 PM IST
India Meteorological Department (IMD)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज कहा कि इस साल फरवरी में देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश औसत से कम रह सकती है। इससे रबी की खड़ी फसलों पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। IMD ने बताया कि उत्तर-पश्चिम और उसके आसपास के मध्य भारत में ठंडी लहर के दिन सामान्य से कम रह सकते हैं।

हालांकि, राहत की बात यह है कि आजकल उत्तर भारत में बोया गया 80% से ज्यादा गेहूं ऐसा है जो मौसम की मार सह सकता है। साथ ही, इस इलाके में सिंचाई की अच्छी सुविधा है। पूरे देश में वित्त वर्ष 21 तक लगभग 55% खेतों में सिंचाई हो पाती थी, जबकि वित्त वर्ष 16 में यह करीब 49.3% थी।

उत्तर भारत में तापमान बढ़ने से फसलों का असर

IMD ने फरवरी के लिए पूरे देश का मासिक पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में, जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान, तापमान सामान्य से ज्यादा रहने से फसल जल्दी बढ़ सकती है और रबी फसलों का समय थोड़ा कम हो सकता है।

गेहूं और जौ जैसी फसलों में जबरदस्ती पकाव हो सकता है, जिससे बालियां बंजर हो सकती हैं और दाने हल्के पड़ सकते हैं, जिससे पैदावार घट सकती है। सरसों, चना, मसूर और मटर जैसी तिलहन और दालों में सामान्य से अधिक तापमान जल्दी फूल आने और समय से पहले पकने का कारण बन सकता है, जिससे फलियां पूरी तरह विकसित नहीं होंगी, बीज छोटे रहेंगे और कुल पैदावार कम हो सकती है। गर्मी की स्थिति में एफिड्स और अन्य चूसने वाले कीटों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

सब्जियों और फलों पर क्या पड़े प्रभाव

आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी और मटर जैसी सब्जियों में गर्मी महत्वपूर्ण चरणों जैसे कंद/बल्ब विकास, फूल और फल लगने के समय पर असर डाल सकती है। अधिक तापमान से प्याज और लहसुन में बोल्टिंग हो सकती है, आलू में कंद छोटा रह सकता है और टमाटर के फूल झड़ सकते हैं, जिससे पैदावार और बाजार में कीमत कम हो सकती है।

फलों में, जैसे आम, सिट्रस, केला और अंगूर, में सामान्य से अधिक तापमान जल्दी फूल आने, असमान फल लगने और फल झड़ने की संभावना बढ़ा सकता है। IMD ने बताया कि ये फसल सलाह कृषि विभाग के सहयोग से तैयार की गई है और किसानों को इन पर तैयार रहने की जरूरत है।

Also Read: मॉनसून पर मंडराया अल नीनो का साया: स्काईमेट ने जताई 2026 में सूखे और कम बारिश की गंभीर आशंका

पूरे देश में बारिश कम, तापमान रहेगा अधिक

IMD ने फरवरी में न केवल उत्तर-पश्चिम, बल्कि देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश औसत से कम रहने का अनुमान लगाया है। पूरे देश में फरवरी 2026 में मासिक बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का केवल 81 प्रतिशत रहने की संभावना है।

रात का तापमान ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है, सिवाय दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों के। अधिकतम तापमान भी ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, लेकिन मध्य भारत के कुछ अलग-थलग क्षेत्रों और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य रह सकता है।

एल नीनो और मॉनसून पर संभावित असर

IMD के चीफ मृत्युंजय मोहपात्रा ने कहा कि ENSO या एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन जुलाई 2026 तक सामान्य रहने की संभावना है और उसके बाद एल नीनो आ सकता है। हालांकि, छह महीने पहले इसकी पूरी तरह पुष्टि नहीं की जा सकती; अप्रैल 2026 तक सही तस्वीर सामने आएगी।

बता दें कि ENSO (El Niño–Southern Oscillation) एक प्राकृतिक समुद्री और वायुमंडलीय पैटर्न है जो प्रशांत महासागर के पानी और हवा के बदलाव से दुनिया के मौसम और मॉनसून को प्रभावित करता है।

अभी प्रशांत महासागर में La Niña की स्थिति है। मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र सतह का तापमान सामान्य से कम है और वायुमंडलीय हालात भी La Niña को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्लोबल मौसम केंद्रों और मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुसार फरवरी, मार्च और अप्रैल 2026 में La Niña की स्थिति ENSO-neutral में बदल सकती है।

इंडियन ओशन डायपोल (IOD) की स्थिति भी मॉनसून पर असर डाल सकती है। जून-जुलाई 2026 में IOD neutral रहने की उम्मीद है।

स्काईमेट ने शुक्रवार को कहा कि ज्यादातर मौसम मॉडल 2026 के दूसरे हिस्से में एल नीनो लौटने की भविष्यवाणी कर रहे हैं। इससे मॉनसून के बीच में यह मजबूत हो सकता है और उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में चरम पर पहुंच सकता है। इससे दक्षिण एशिया में मौसम असामान्य हो सकता है और भारत में मॉनसून की बारिश कम हो सकती है।

जनवरी में मौसम से हुए नुकसान

जनवरी 2026 में मौसम के कारण छह लोगों की मौत, एक घायल और दो पशु हानि की रिपोर्ट मिली।

  • ठंड की लहर से दो मौतें हुईं: टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश) और ऊना (हिमाचल प्रदेश)
  • राजस्थान में लाइटनिंग से दो मौतें, एक घायल और एक पशु हानि हुई (दौसा, कोटा और सीकर जिलों में)
  • उत्तर प्रदेश में लाइटनिंग से दो मौतें और एक पशु हानि हुई (अलीगढ़, बागपत और गौतम बुद्ध नगर जिलों में)

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First Published - January 31, 2026 | 7:39 PM IST

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