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Gold–Silver Price Crash: क्या 1980 जैसा होगा चांदी का हाल? 1 दिन में भाव ₹88,000 लुढ़के; निवेशक आगे खरीदें या बेचें

गुरुवार को 4,20,048 रुपये का सर्वोच्च स्तर से छूने वाले चांदी के वायदा भाव आज करीब 21 फीसदी गिरावट के साथ 3,32,002 रुपये तक लुढ़क गए

Last Updated- January 30, 2026 | 5:17 PM IST
Gold Silver Price Crash

Gold–Silver Price Crash: बीते कुछ दिनों में जिस तेजी से चांदी के भाव बढ़े थे, अब उससे भी अधिक तेजी से इसके भाव गिरने लगे हैं। गुरुवार को अपने उच्च स्तर से महज एक दिन में चांदी करीब 21 फीसदी गिर गई। चांदी के भाव जितने 10 दिन में बढ़े, उतने से थोड़ा कम महज एक दिन में गिर गए। ऐसे में क्या चांदी का हाल 1980 के दशक जैसा होने वाला है? उस समय भी चांदी के भाव असामान्य रूप से तेजी से बढ़ गए थे और बाद में औंधे मुंह लुढ़क भी गए थे। चांदी में गिरावट सोने की तुलना में ज्यादा आई है। ऐसे में निवेशकों को सोने और चांदी में से किस पर दांव लगाना चाहिए, यह सवाल भी अहम है।  

चांदी करीब 88 हजार रुपये लुढ़की

गुरुवार को चांदी के वायदा भाव को 3 से 4 लाख रुपये पहुंचने में 10 दिन लगे थे। लेकिन महज एक दिन में इसके भाव 88 हजार रुपये लुढक गए यानी एक लाख रुपये बढ़ने में 10 दिन लगे, लेकिन इतने के करीब गिरने में महज एक दिन लगा। गुरुवार को चांदी के बेंचमार्क अनुबंध मार्च ने 4,20,048 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ था। इस स्तर को छूने के बाद महज एक दिन में आज चांदी का यह अनुबंध 88,046 रुपये या करीब 21 फीसदी लुढ़ककर 3,32,002 रुपये प्रति किलो के निचले भाव तक चला गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर भी चांदी कल 121.79 डॉलर का सर्वोच्च स्तर छूने के बाद आज 95.12 डॉलर प्रति औंस तक लुढक गई।

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अर्श से फर्श पर आया सोना

चांदी के साथ ही सोने की कीमत में भी आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। यह अपने सर्वोच्च शिखर से 21,500 रुपये से ज्यादा लुढ़क गया। MCX पर सोने के बेंचमार्क फरवरी अनुबंध ने गुरुवार को 1,80,779 रुपये के भाव पर ऑल टाइम हाई बनाया था। आज इस अनुबंध ने 1,54,157 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर दिन का निचला स्तर छू लिया। इस तरह महज एक दिन में सोने के भाव 26,622 रुपये या 14.72 फीसदी गिर चुके हैं। कॉमेक्स में इसके भाव उच्चतम स्तर 5,586.20 डॉलर से 636 डॉलर यानी 11.38 फीसदी घटकर 4,950 डॉलर के निचले स्तर तक आ चुके हैं।

अब कहां तक गिर सकते हैं सोना चांदी?

इस गिरावट के बाद निवेशकों में घबराहट पैदा हो गई। अब सवाल उठने लगे हैं क्या सोने-चांदी की कीमतों में पीक खत्म हो चुका है या अभी और तेजी आने की संभावना है। विशेषज्ञ निवेशकों सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में सोना–चांदी के बाजार में अजीब और तेज हलचल दिखी है। जिससे दाम अचानक तेजी से उछल गए और आज मुनाफावसूली के कारण बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि बाजार को सपोर्ट करने वाले कारण अभी भी मौजूद हैं, लेकिन दाम काफी ज्यादा चढ़ चुके हैं।

सोना और चांदी दोनों में जरूरत से ज्यादा तेजी नजर आ रही है। इस समय नई खरीदारी में सावधानी और पहले से बने मुनाफे को सुरक्षित करना ज्यादा समझदारी है। तेज चढ़े बाजार में जोखिम संभालना सबसे जरूरी होता है। चांदी के भाव 78 डॉलर तक गिर सकते हैं। सोना 4,860 डॉलर तक गिर सकता है। हालांकि 4,240 डॉलर पर सहारा मिल सकता है।

एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज में रिसर्च हेड (कमोडिटी) वंदना भारती ने कहा कि घरेलू बाजार में चांदी अगले एक सप्ताह में 3.20 लाख रुपये और सोना 1.42 लाख रुपये तक नीचे जा सकता है। 1,980 जैसी चांदी में गिरावट के बारे में भारती का कहना है कि चांदी में अभी बड़ी गिरावट तो आई है, लेकिन उतनी नहीं आई जितनी 1980 में आई थी। इसलिए फिलहाल यह कहना ठीक नहीं होगा कि चांदी का हाल 1980 जैसा हो सकता है।  

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सोने पर लगाएं दांव या चांदी ही खरीदें?

सोने-चांदी की कीमतों में आज आई बड़ी गिरावट के बाद अब इन धातुओं के बाजार का मिजाज तेजी से बदलता नजर आ रहा है। बीते दिनों के दौरान चांदी सोने की तुलना में तेजी से बढ़ रही थी। सोना और चांदी दोनों ही अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों से तेज गिरावट के दौर में हैं। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल उठता है कि अब सोने में पैसा लगाया जाए या चांदी में। इतिहास और मौजूदा संकेत बताते हैं कि आगे के चरण में सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 अपने आप में असाधारण रही। सोने में करीब 28 फीसदी की मासिक तेजी दर्ज की गई, पिछली बार ऐसा जनवरी 1980 में देखा गया था। वहीं, चांदी ने लगभग 70 फीसदी की छलांग लगाई, जो अब तक की सबसे तेज मासिक बढ़त मानी जा रही है। हालांकि, इतनी तेज रैली के बाद करेक्शन लगभग तय माना जाता है। हालिया ऊंचाई से सोना करीब 12 फीसदी गिरकर 4,950 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है, जबकि चांदी में गिरावट ज्यादा रही और यह करीब 22 फीसदी की गिरावट के साथ 95.12 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गई। यह अंतर खुद चांदी की अधिक अस्थिर प्रकृति को दर्शाता है।

इतिहास भी यही सिखाता है और 1977–1980 और 2008–2011 के दौर में भी यही पैटर्न दिखा। 1980 के बाद सोने में करीब 66 फीसदी और चांदी में लगभग 90 फीसदी की गिरावट आई थी। 2011 के चक्र में सोना करीब 38 फीसदी टूटा, जबकि चांदी में 60 फीसदी से अधिक गिरावट देखने को मिली थी। जाहिर है गिरावट के दौर में चांदी सोने की तुलना में ज्यादा टूटती है।

गोल्ड- सिल्वर रेशियो दे रहा अहम संकेत

गोल्ड- सिल्वर रेशियो भी दे रहा अहम संकेत दे रहा है। गोल्ड–सिल्वर रेशियो हाल ही में 45 के आसपास तक सिमट गया है, जबकि पिछले साल भू-राजनीतिक तनाव के दौरान यह 107 तक पहुंच गया था। ऐतिहासिक रूप से इतना कम रेशियो टिकाऊ नहीं माना जाता। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्लेषकों के मुताबिक रेशियो का 70–72 की ओर लौटना संभव है। जिसका मतलब है आने वाले समय में सोने का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से अच्छा रह सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह करेक्शन सोने के दीर्घकालिक बुलिश ट्रेंड पर सवाल नहीं उठाता। केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, करेंसी जोखिम और सीमित सप्लाई जैसे फैक्टर अब भी सोने के पक्ष में हैं। ऐसे में कीमती धातुओं से बाहर निकलने के बजाय चांदी से सोने की ओर रुख करना चाहिए। चांदी में मुनाफावसूली या आंशिक शिफ्ट निवेशकों को करेक्शन के दौर में बेहतर सुरक्षा दे सकती है।

हालिया गिरावट दिखाती है कि चांदी में सोने की तुलना में जोखिम ज्यादा है। मौजूदा समय में अनुशासन और गोल्ड–सिल्वर रेशियो पर नजर रखना निवेशकों के लिए अहम रहेगा। विशेषज्ञ निवेशकों को सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं। केडिया ने कहा कि अमेरिका–ईरान तनाव बढ़ना, टैरिफ वॉर की आशंका, भारतीय बजट को लेकर अनिश्चितता, ETF से पैसा निकलना, डॉलर मजबूत होने के आसान, मार्जिन बढ़ने से उतार-चढ़ाव तेज होने की संभावना के बीच निवेशकों को सावधान रहकर मुनाफा बचाने पर ध्यान देना चाहिए। 

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क्या है 1980 के दशक की हंट ब्रदर्स घटना?

1970 के दशक में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बड़े बदलाव से गुजर रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 1971 में गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म कर दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर सोने से जुड़ा नहीं रहा। इस बीच महंगाई ने आम लोगों की जेब ढीली कर दी और आर्थिक अस्थिरता गहराने लगी। इन हालात में अमेरिका के दो अमीर कारोबारी भाइयों नेल्सन बंकर हंट और विलियम हर्बर्ट हंट ने चांदी पर दांव लगाया।

शुरुआत में यह सुरक्षित निवेश की तरह था, लेकिन लालच ने इसे सट्टेबाजी में बदल दिया। साल 1973 से लेकर 1979 तक हंट ब्रदर्स ने चांदी की रिकॉर्ड मात्रा में खरीदारी शुरू की और 1979 तक उनके पास लगभग 20 करोड़ औंस चांदी थी, जो ग्लोबल नॉन- गवर्नमेंट सिल्वर स्टॉक का लगभग एक तिहाई था। दोनों भाइयों ने न केवल फिजिकल सिल्वर खरीदी, बल्कि फ्यूचर्स में भी बड़े लेवल पर सौदे किए थे। इन भाईयों की भारी खरीद से 1973 में चांदी की कीमत 1.95 डॉलर प्रति औंस थी, वो जनवरी 1980 तक बढ़कर 50 डॉलर के करीब पहुंच गई। इस तरह इस अवधि में चांदी के भाव 25 गुना चढ़ गए।

हंट ब्रदर्स के खेल पर अमेरिकी नियामक नजर पड़ी और मार्जिन की कड़ी शर्ते लागू कर दी गईं। जिससे चांदी के दाम औंधे मुंह गिर गए। 27 मार्च 1980 को चांदी की कीमत एक दिन में 50 फीसदी घटकर 21 डॉलर से सीधे 11 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई। इस दिन को ‘सिल्वर थर्सडे’ नाम से याद किया जाता है। बीते 10 साल में चांदी के भाव 10 गुना और सोने 5 गुना बढ़ चुके हैं।

First Published - January 30, 2026 | 5:10 PM IST

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