facebookmetapixel
Advertisement
Mutual Fund: अप्रैल में इक्विटी AUM रिकॉर्ड स्तर पर, फंड हाउसेस ने किन सेक्टर और स्टॉक्स में की खरीदारी?तेल संकट और कमजोर पर्यटन ने मॉरीशस की अर्थव्यवस्था को झकझोरा, भारत भी रहे सतर्कप्लेटिनम हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड: 20 मई से खुलेगा NFO, किसे करना चाहिए इस SIF में निवेश?Airtel को लेकर सुनील मित्तल का 10 साल का मास्टरप्लान सामने आयाबॉन्ड पर टैक्स घटाने की खबर से PNB Gilts में बंपर खरीदारी, 20% उछला शेयरसोना-चांदी में मुनाफावसूली का समय? जानिए अब निवेशकों को क्या करना चाहिएVD Satheesan को मिली केरल CM की कुर्सी, कांग्रेस ने किया आधिकारिक ऐलानQ4 के बाद Tata Motors पर क्यों बंट गई ब्रोकरेज की राय? किसी ने दिया BUY तो किसी ने कहा ‘न्यूट्रल’गाड़ियों की बंपर बिक्री! अप्रैल में पैसेंजर व्हीकल्स की डिमांड 25% से ज्यादा बढ़ी, टू-व्हीलर ने भी लगाया जोरदार छलांगFMCG सेक्टर में किन शेयरों पर बुलिश है एंटीक? GCPL, Marico और Bajaj Consumer बने पसंद

Economic Survey 2026: कमजोर रुपये से व्यापार को सहारा, हिचकिचाहट कायम

Advertisement

1 अप्रैल, 2025 और 15 जनवरी, 2026 के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 5.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे यह जापानी येन के साथ सबसे ज्यादा गिरावट वाली मुद्राओं में शामिल हो गया

Last Updated- January 29, 2026 | 10:28 PM IST
Rupee vs Dollar

देश की मजबूत आ​र्थिक बुनियाद की तुलना में रुपया कमजोर लग रहा है और अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है। आ​र्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार हालांकि कमजोर मुद्रा भारतीय निर्यात पर अमेरिका के अ​धिक टैरिफ के मुकाबले कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करती है और कच्चे तेल के नरम दामों के बीच महंगाई का सीमित जोखिम पैदा करती है, लेकिन यह निवेशकों के मनोबल को भी कम कर सकती है।

समीक्षा में कहा गया है कि इसके प​रिणामस्वरूप भारत में पूंजी लगाने के लिए निवेशकों में जो हिचकिचाहट है, उस पर करीब से ध्यान देने की जरूरत है।
रुपये ने साल 2025 में अपनी प्रतिस्प​र्धी विदेशी मुद्राओं के बीच कमजोर प्रदर्शन किया। 1 अप्रैल, 2025 और 15 जनवरी, 2026 के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 5.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे यह जापानी येन के साथ सबसे ज्यादा गिरावट वाली मुद्राओं में शामिल हो गया, जिसमें 5.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

समीक्षा में यह भी कहा गया है कि हालांकि मुद्रा में गिरावट से आयात की महंगाई का जोखिम पैदा होता है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण कमजोर वै​श्विक कमोडिटी की कीमतों से इसका असर कम रहने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 27 के लिए भारत का महंगाई का दृष्टिकोण कम नरम रहने के आसार हैं जिससे कीमती धातुओं को छोड़कर समग्र महंगाई और मुख्य महंगाई दोनों ही वित्त वर्ष 26 की तुलना में अधिक रहने के आसार हैं। अगर अगले वित्त वर्ष में महंगाई बढ़ती है, तो यह आगे मौद्रिक राहत की गुंजाइश को सीमित कर देगी।

भारतीय केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी से अब तक नरम मुद्रास्फीति की वजह से नीतिगत रीपो दर में 125 आधार अंक (बीपीएस) की कटौती की है। भारत ने प्रमुख ईएमडीई के बीच समग्र महंगाई में सबसे तेज गिरावट देखी है और महंगाई लगभग 1.8 प्रतिशत कम हुई है। दूसरी ओर औसत मुख्य महंगाई वित्त वर्ष 25 के 3.5 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में लगभग 4.3 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल 2024 के 3.19 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 में 4.62 प्रतिशत हो गई।

अलबत्ता इसकी मौजूदगी मुख्य रूप से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की बदौलत है। जब इन घटकों को हटा दिया जाता है, तो मुख्य महंगाई रफ्तार घटती हुई दिखाती है, जो मोटे तौर पर समग्र महंगाई में नरमी को दर्शाती है।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के नतीजे के संबंध में बाजार की अनिश्चितता के साथ-साथ भुगतान संतुलन घाटे के बढ़ने से रुपये पर दबाव पड़ा, जिससे इसका मूल्यह्रास हुआ।

इस बीच रुपये की एशियाई प्रतिस्पर्धी मुद्राओं में अपेक्षाकृत कम गिरावट देखी गई, जिसमें फिलिपींस की पेसो भी शामिल है, जिसमें 3.8 प्रतिशत तक की गिरावट आई तथा इंडोनेशिया के रुपया में उसी अवधि के दौरान 1.9 प्रतिशत तक की गिरावट आई।

दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसी अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं में इस अवधि के दौरान मजबूती आई, जिन्हें व्यापार की अनुकूल गतिवि​धियों से मदद मिली। 1 अप्रैल, 2025 और 22 जनवरी, 2026 के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 6.5 प्रतिशत तक की गिरावट आई।

Advertisement
First Published - January 29, 2026 | 10:06 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement