आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, दुनिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के चलते सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। सर्वे ने कहा कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थायी शांति स्थापित नहीं होती और व्यापार से जुड़े विवाद सुलझते नहीं हैं, तब तक कीमती धातुओं की कीमतों में मजबूती बनी रहने की संभावना है।
सर्वे में बताया गया कि वर्ष 2025 में सोना और चांदी दोनों ने अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छुआ। यह तेजी वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को दर्शाती है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, वास्तविक ब्याज दरों के लंबे समय तक नकारात्मक रहने की उम्मीद और भू-राजनीतिक व वित्तीय जोखिमों को लेकर चिंता ने कीमतों को और समर्थन दिया।
गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी के वायदा भाव 6.3 फीसदी की तेजी के साथ 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गए। वहीं, सोना 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, सर्वे में यह भी कहा गया कि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में सोने और चांदी में आई इतनी तेज बढ़त आगे लंबे समय तक बनी रहेगी या नहीं, इस पर अभी सवाल हैं।
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31 दिसंबर 2025 को एमसीएक्स पर सोना 1,39,201 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,35,701 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। खुदरा बाजारों में इसी समय सोना 1,37,700 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,39,000 रुपये प्रति किलो रही थी।
आर्थिक सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के आयात में कच्चा तेल, सोना और पेट्रोलियम उत्पादों का दबदबा रहा और इनका कुल आयात में हिस्सा एक तिहाई से अधिक रहा। इस दौरान सोने का आयात सालाना आधार पर 27.4 फीसदी बढ़ा। सर्वे ने कहा कि सोने के आयात में बढ़ोतरी की वजह घरेलू मांग में मजबूती और सोने की कीमतों में 38.2 फीसदी की सालाना तेजी रही।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां मार्च 2025 के अंत में 567.6 अरब डॉलर से घटकर 16 जनवरी 2026 तक 560.5 अरब डॉलर रह गईं। इसके विपरीत, भारत के भंडार में सोने का मूल्य तेजी से बढ़ा है। जनवरी 2026 के मध्य तक भारत का सोने का भंडार बढ़कर 117.5 अरब डॉलर हो गया, जो मार्च 2025 में 78.2 अरब डॉलर था। इसमें बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में उछाल और केंद्रीय बैंकों की डॉलर के अलावा अन्य संपत्तियों में निवेश की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाती है।
सर्वे के मुताबिक, यह रुझान केवल भारत तक सीमित नहीं है। कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव के बीच अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं।
सर्वे में बताया गया कि 2025 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 2,607 डॉलर से बढ़कर 4,315 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जो हाल के वर्षों की सबसे तेज बढ़त में से एक है।
वहीं, आयरन, कॉपर और एल्युमिनियम जैसी बेस मेटल्स की कीमतों में सीमित बढ़त की संभावना जताई गई है। खास तौर पर कॉपर की कीमतें ग्रीन टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर से मजबूत मांग और सप्लाई में रुकावट के कारण ऊंची बनी रह सकती हैं।
हालांकि, वर्ल्ड बैंक की कमोडिटी प्राइस आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में वैश्विक कमोडिटी कीमतों में करीब 7 फीसदी की गिरावट आ सकती है। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में अधिक सप्लाई के चलते कमजोरी बताई गई है, हालांकि भू-राजनीतिक घटनाएं इस अनुमान को प्रभावित कर सकती हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण ने कहा कि आने वाले वित्त वर्ष में महंगाई बड़ी चिंता नहीं होगी। अच्छी कृषि पैदावार, सप्लाई साइड की बेहतर स्थिति और जीएसटी दरों में बदलाव का असर धीरे-धीरे दिखने से महंगाई नियंत्रण में रहने की उम्मीद है। सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन इसके लक्ष्य दायरे में बने रहने की संभावना है। आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई 2.8 फीसदी और 2026-27 के लिए 4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। वहीं, आरबीआई ने 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही में महंगाई क्रमशः 3.9 फीसदी और 4 फीसदी रहने का अनुमान दिया है।