शेयर बाजारों ने कैलेंडर वर्ष 2026 की खराब शुरुआत की। एक दशक में उन्होंने जनवरी महीने में सबसे कमजोर प्रदर्शन किया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 3 फीसदी से अधिक की गिरावट आई, जो 2016 के बाद से जनवरी में दोनों का सबसे खराब प्रदर्शन है। तब इन सूचकांकों में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई थी।
सेंसेक्स के मामले में यह फरवरी 2025 के बाद किसी भी कैलेंडर माह में सबसे कमजोर रिटर्न था जबकि निफ्टी के लिए यह जुलाई 2025 के बाद सबसे खराब था। व्यापक बाजारों पर भी दबाव देखने को मिला और निफ्टी मिडकैप 100 व निफ्टी स्मॉलकैप 100 क्रमशः 3.4 फीसदी और 4.7 फीसदी नीचे आए।
इस महीने के दौरान बाजार पूंजीकरण में करीब 16 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई। यह फरवरी 2025 के बाद सबसे ज्यादा है। इसके परिणामस्वरूप भारत ने अपना 5 लाख करोड़ डॉलर का बाजार पूंजीकरण वाला तमगा खो दिया।
रुपये में लगातार गिरावट और कंपनियों की आय में निराशाजनक वृद्धि के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भारी निकासी के कारण शेयरों में बड़ी बिकवाली हुई। एफपीआई ने इस महीने 31,000 करोड़ रुपये (3.5 अरब डॉलर) से अधिक के शेयर बेचे जो अगस्त 2025 के बाद का सर्वोच्च आंकड़ा है।
इसके विपरीत, उभरते बाजारों में भारत के समकक्षों ने शानदार प्रदर्शन किया। जनवरी में ब्राजील के बाजारों में 14 फीसदी, दक्षिण कोरिया में 24 फीसदी और ताइवान में 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण कमोडिटी और प्रौद्योगिकी से जुड़े शेयरों में तेजी थी।
देसी बाजार में निफ्टी मेटल इंडेक्स लाभ कमाने वाला अग्रणी सूचकांक बनकर उभरा और शुक्रवार को 5.2 फीसदी की भारी गिरावट के बावजूद इसमें 5.6 फीसदी की तेजी आई। बीएसई रियल्टी इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा, जिसमें 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।