भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NoC) दे दिया है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने यह जानकारी दी। इससे एनएसई के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की राह साफ हो गई है। अनलिस्टेड मार्केट में NSE का मौजूदा वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये है।
सूत्रों के मुताबिक, सेबी की मंजूरी उन कानूनी मामलों के समाधान के बाद मिली है, जो पिछले एक दशक से एक्सचेंज पर दबाव बनाए हुए थे। इनमें को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामले शामिल हैं। सेबी ने सैद्धांतिक रूप से समझौते पर सहमति जताई है और अंतिम शर्तों को उसकी हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी की मंजूरी के बाद तय किया जाएगा।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी भी रेगुलेटेड यूनिट को आईपीओ के लिए आवेदन करने से पहले अपने संबंधित नियामक से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना जरूरी होता है। NSE के मामले में NoC के साथ-साथ ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) की अंतिम मंजूरी भी सेबी से लेनी होगी।
सूत्रों ने बताया कि NSE इस साल अप्रैल–मई के दौरान अपने ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल कर सकता है और प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल हो सकता है। हालांकि, इस मामले में सेबी और एनएसई को भेजे गए ई-मेल सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला।
एक्सचेंज ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों से जुड़े निपटारे के लिए ब्याज समेत 1,297 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। NSE ने बताया कि यह राशि को-लोकेशन मामले में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) द्वारा लगाए गए 100 करोड़ रुपये के जुर्माने के अतिरिक्त है, जिसे वित्त वर्ष 2023 में सेबी के पास जमा की गई रकम से पहले ही एडजस्ट किया जा चुका है।
NSE ने वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही (Q2FY26) में 2,098 करोड़ रुपये का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 3,137 करोड़ रुपये था। मुनाफे में यह तेज गिरावट मुख्य रूप से सेबी के साथ निपटारे से जुड़ी याचिकाओं के लिए किए गए एकमुश्त प्रावधान के कारण आई है।
वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही में ऑपरेशन से कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 18 फीसदी घटकर 3,676.8 करोड़ रुपये रह गया। लेनदेन शुल्क से होने वाली आय 22 फीसदी गिरकर 2,785 करोड़ रुपये हो गई, जो कैश और डेरिवेटिव्स दोनों सेगमेंट में वॉल्यूम घटने को दर्शाता है।
को-लोकेशन मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यह मामला 2015–16 के दौरान कुछ ब्रोकरों को NSE के ट्रेडिंग सर्वरों तक कथित तौर पर तरजीही पहुंच मिलने के आरोपों से जुड़ा है। सेबी की ओर से निपटारे को औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद, उसे अपनी अपील वापस लेने के लिए शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दाखिल करना होगा।
जनवरी 2023 में SAT ने NSE के खिलाफ गैर-आर्थिक दंड को बरकरार रखा था, लेकिन डिस्गॉर्जमेंट आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बजाय, ड्यू डिलिजेंस में चूक के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद उसी साल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े करीब 300 करोड़ रुपये NSE को वापस करने का निर्देश सेबी को दिया था।
अनलिस्टेड होने के बावजूद, NSE के पास पहले से ही बड़ी संख्या में खुदरा शेयरधारक हैं। दिसंबर 2025 तक एक्सचेंज के खुदरा शेयरधारकों की संख्या 1,71,563 थी, जिनके पास मिलकर एक्सचेंज की लगभग 12.3 फीसदी हिस्सेदारी है।