धातु शेयरों में भारी बिकवाली का निवेशकों के सेंटिमेंट पर दबाव पड़ने से शुक्रवार को बेंचमार्क सूचकांकों में गिरावट आई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भारी बिकवाली, कंपनियों के लाभ पर चिंता और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रगति की कमी से निवेशकों का मनोबल पहले से ही कमजोर था। रविवार को पेश होने वाले आम बजट से पहले निवेशक भी सतर्क रहे क्योंकि पूंजी बाजार के कर ढांचे में किसी भी तरह के बदलाव पर निवेशकों की तीखी प्रतिक्रिया हो सकती है।
सेंसेक्स 297 अंक यानी 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ 82,270 पर बंद हुआ। निफ्टी 98 अंक यानी 0.4 फीसदी टूटकर 25,321 पर टिका। इस महीने सेंसेक्स में 3.5 फीसदी और निफ्टी में 3.1 फीसदी की गिरावट आई है, जो फरवरी 2025 के बाद से इनमें सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
कुल बाजार पूंजीकरण 460 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें सप्ताह के दौरान 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। धातु शेयरों में भारी गिरावट आई। निफ्टी मेटल इंडेक्स 5.2 फीसदी टूट गया, जो 7 अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट है। वैश्विक धातु बाजारों में रात में हुई व्यापक बिकवाली के कारण ऐसा हुआ।
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अमेरिकी डॉलर में तेजी के बीच यह बिकवाली हुई। मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन नया फेडरल रिजर्व प्रमुख नामित करने वाला है।
एसबीआई कैप्स सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख सनी अग्रवाल ने कहा, सोने, चांदी और तांबे की कीमतों में रातोरात भारी गिरावट आई। इसका असर शेयरों की कीमतों पर भी दिखा। धातुओं की कीमतों में तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक थी।
औद्योगिक उत्पादन के लिए इन वस्तुओं, विशेषकर चांदी, को ऊंची कीमतों पर इस्तेमाल करने की व्यवहारिकता कम हो गई है। आगे और गिरावट आ सकती है, इसके बाद स्थिरता हो सकती है। धातुओं की कीमतों का डॉलर सूचकांक के साथ विपरीत संबंध भी है, जिसका असर ब्याज दरों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए प्रमुख के संभावित रुख पर पड़ेगा।
शुक्रवार को एफपीआई ने 2,251 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 601 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। एफपीआई ने इस महीने अब तक 31,000 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की है जो अगस्त 2025 के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा है।
एफपीआई की लगातार बिकवाली से डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 91.99 पर बंद हुआ। वहीं, जनवरी में डॉलर सूचकांक में 2.4 फीसदी की गिरावट आई है। निवेशक नए संकेतों के लिए अब केंद्रीय बजट पर बारीकी से नजर रखेंगे। बजट के लिए रविवार को बाजार खुले रहेंगे।
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रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अजित मिश्र ने कहा, निफ्टी पर हमारा नजरिया नहीं बदला है। निफ्टी अगर 25,350 के स्तर से ऊपर बना रहा तो उसमें 25,600 के स्तर की ओर और उछाल आ सकती है जबकि लंबी अवधि के मूविंग एवरेज-25,150 के आसपास यानी 200 डीईएमए- से नीचे निर्णायक गिरावट होने पर रिकवरी पटरी से उतर सकती है और सूचकांक को 24,750-24,900 के स्तर की ओर खींच सकती है। केंद्रीय बजट पर सबकी नजर होने के कारण रविवार के विशेष ट्रेडिंग सत्र के दौरान हमें काफी अस्थिरता की आशंका है और इसलिए हम हेजिंग दृष्टिकोण का सुझाव देते हैं।
बाजार में चढ़ने और गिरने वाले शेयरों का अनुपात सकारात्मक रहा, जहां 2,380 शेयर चढ़े जबकि 1,831 में गिरावट आई।