चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 54.5 प्रतिशत तक सीमित रहा है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 56.7 प्रतिशत के स्तर पर रहा था। दिसंबर 2025 में कंपनी कर, सीमा शुल्क में बढ़ोतरी और पूंजीगत व्यय में सालाना गिरावट के बीच यह आंकड़ा (54.5 प्रतिशत) सामने आया है।
वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-दिसंबर में पूंजीगत व्यय बजट अनुमान का 70 प्रतिशत था जो पिछले साल दर्ज 61.7 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि, दिसंबर 2025 में पूंजीगत व्यय में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 24.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। पहले नौ महीनों में पूंजीगत व्यय में पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में 15 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में 9.1 लाख करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल-दिसंबर के दौरान 8.55 लाख करोड़ रुपये हो गया जो सालाना 6.4 प्रतिशत की कमी है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा,‘इक्रा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा जीडीपी (जीडीपी) का 4.3 प्रतिशत रहेगा। यह अंतर भरने के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की आवश्यकता होगी जो वित्त वर्ष 2026 के स्तर से कुछ अधिक है। इसके साथ ही रिडेम्पशन में भारी बढ़ोतरी के कारण सकल बाजार उधारी का आंकड़ा तेजी से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में 16.9 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में 14.6 लाख करोड़ रुपये था।’
वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में शुद्ध कर राजस्व पिछले वर्ष की तुलना में 5.2 प्रतिशत बढ़ा जबकि गैर-कर राजस्व 20.6 प्रतिशत बढ़ा।
सरकार राजस्व व्यय नियंत्रण में रखने में कामयाब रही जो पिछले वर्ष के 68.7 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमान का 65.6 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में राजस्व व्यय पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 1.8 प्रतिशत बढ़ा। दिसंबर 2025 में आयकर संग्रह में पिछले साल दिसंबर की तुलना में 9.2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों ने बजट अनुमानों की तुलना में वित्त वर्ष 2026 में सरकार के सकल कर राजस्व में काफी कमी आने की आशंका जताई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा,‘जैसा पहले के महीनों में भी देखा गया है, आरबीआई से हस्तांतरण के कारण गैर-कर राजस्व अनुपात लगभग 93 प्रतिशत पर अधिक रहा है। इससे काफी मदद मिली है। कुल मिलाकर यह उम्मीद की जा सकती है कि सरकार वित्त वर्ष 2026 के लिए राजकोषीय लक्ष्य बरकरार रखेगी।’