यूनियन बजट 2026-27 में सरकार ने विदेश पैसे भेजने वालों को बड़ी राहत दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर लगने वाला टीसीएस घटाया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर अब टीसीएस 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।
सरकार ने विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाला टीसीएस भी घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह 5 प्रतिशत या 20 प्रतिशत तक था। इसके साथ ही सरकार ने न्यूनतम रकम की शर्त भी हटा दी है, यानी अब किसी भी रकम पर यही दर लागू होगी।
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इस फैसले का फायदा उन लोगों को मिलेगा जो बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए, मेडिकल इलाज के लिए, विदेश में रहने वाले परिवार के खर्च के लिए, विदेश यात्रा या निवेश के लिए पैसा भेजते हैं। इससे पैसा भेजते समय तुरंत कटने वाला टैक्स कम हो जाएगा।
टीसीएस वह टैक्स है जिसे बैंक या अधिकृत संस्थाएं विदेश पैसा भेजते समय काट लेती हैं। यह कोई अलग टैक्स नहीं होता। जब व्यक्ति साल के अंत में इनकम टैक्स रिटर्न भरता है, तो यह रकम उसके कुल टैक्स से जोड़ दी जाती है और ज्यादा कटा पैसा रिफंड के रूप में वापस मिल जाता है।
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विदेशी लेनदेन से जुड़ी कंपनियों और विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे परिवारों पर शुरुआती टैक्स का बोझ कम होगा और विदेश पढ़ाई या इलाज की योजना बनाना आसान होगा।
पृथ्वी एक्सचेंज के MD पवन कवाड़ ने कहा कि यह फैसला विदेश में पढ़ाई और इलाज की योजना बनाने वाले परिवारों के लिए राहत भरा है। उन्होंने कहा कि टीसीएस कम होने से शुरुआती खर्च का दबाव घटेगा और पैसे की योजना बनाना आसान होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर एजुकेशन लोन से भेजे गए पैसों पर टीसीएस पूरी तरह हटा दिया जाता, तो छात्रों को और ज्यादा फायदा मिलता, क्योंकि पहले से ही पढ़ाई और रहने का खर्च बहुत ज्यादा होता है।
विभवांगल अनुकूलकरा प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्य ने कहा कि कम टीसीएस से तुरंत कैश फ्लो में राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि भले ही टीसीएस बाद में एडजस्ट हो जाता है, लेकिन अभी कम कटौती होने से परिवारों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल और मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि इस फैसले का पूरा असर नियमों की साफ जानकारी आने के बाद ही समझ में आएगा। फिलहाल इसे सरकार का सकारात्मक संकेत माना जाना चाहिए।