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विनिवेश की नई रणनीति: वित्त वर्ष 2027 में 80,000 करोड़ जुटाएगी सरकार, जानें क्या है पूरा रोडमैप

हालांकि सरकार वित्त वर्ष 2026 में अपने बजट लक्ष्य 47,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने से चूक गई और इसलिए उसने संशोधित अनुमानों में इसे तेजी से घटाकर 33,837 करोड़ रुपये कर दिया था

Last Updated- February 01, 2026 | 10:57 PM IST
Disinvestment
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में विविध पूंजी प्राप्तियों के तहत 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य तय किया है। इसमें सार्वजनिक उपक्रमों में शेयरों की बिक्री और परिसंपत्तियों का बेचना शामिल है। हालांकि सरकार वित्त वर्ष 2026 में अपने बजट लक्ष्य 47,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने से चूक गई और इसलिए उसने संशोधित अनुमानों में इसे तेजी से घटाकर 33,837 करोड़ रुपये कर दिया था।

आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने बजट के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘हम चाहते हैं कि हमारे पास बेहद दमदार परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना हो। पिछले साल बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा की थी कि एक सूची तैयार की जाएगी। उम्मीद है कि हमें उसका फायदा मिलेगा।’

सरकार वित्त वर्ष 2024 से विनिवेश के लिए अलग से किसी आंकड़े की घोषणा करने से परहेज करती रही है। विनिवेश लक्ष्य के लिए कोई आंकड़ा जारी करने के बजाय सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री और परिसंपत्तियां बेचने से प्राप्त आय को विविध पूंजी प्राप्तियों के तहत रखा गया है। इसमें निवेश ट्रस्टों एवं अन्य ढांचों के जरिये सड़क, रेलवे और बिजली बुनियादी ढांचा जैसी परिसंपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राजस्व शामिल है।

निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला (आईएएस) ने बजट के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘ हम एक समग्र रणनीति का पालन करते हैं और विनिवेश को इसके एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए जो निजी क्षेत्र की भागीदारी एवं दक्षता को बेहतर करता है। उसी रणनीति के तहत वित्त मंत्री ने कहा कि विनिवेश के लिए हमें जो भी सैद्धांतिक मंजूरी मिली है, उनमें लगभग 50 में से आधे पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। इसका मतलब साफ है लगभग 12 की बिक्री (क्लोजर) और 13 रणनीतिक विनिवेश लेनदेन हुए हैं जबकि अन्य सही राह पर है। इसलिए हम एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य के साथ सही राह पर बढ़ रहे हैं। हम किसी तार्किक नतीजे तक पहुंचने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’

पूर्व वित्तीय सेवा सचिव दिनेश कुमार मित्तल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि सरकार की योजनाएं उसकी घोषित नीतिगत दिशा के अनुरूप थीं। उन्होंने कहा, ‘सरकार के पास विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, विशेष रूप से गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी को कम करने की स्पष्ट योजना है। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार नियंत्रण छोड़ देगी क्योंकि सरकार 51 फीसदी तक स्वामित्व बरकरार रख सकती है।’

First Published - February 1, 2026 | 10:57 PM IST

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