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AIF Market: पश्चिम एशिया संकट थमने से वैकल्पिक निवेश फंडों में लौटी रौनक, HNIs का बढ़ा भरोसा

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वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया संकट कम होने के बाद, वैकल्पिक निवेश फंडों (AIF) में अति धनाढ्य (HNI) निवेशकों का रुझान और पूंजी प्रवाह फिर से बढ़ने लगा है

Last Updated- June 27, 2026 | 12:27 PM IST
Alternative Investment Fund (AIF)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के कारण पिछले कुछ महीनों से वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) में निवेश जुटाने की रफ्तार धीमी थी। लेकिन अब एआईएफ प्रबंधकों को निवेशकों के मनोबल में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जिन निवेशकों ने पहले अपना निवेश रोक दिया था, वे अब धीरे-धीरे फिर से निवेश करने लगे हैं।

इसकी मुख्य वजह यह है कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता पहले से बेहतर हो रही है और दुनिया भर के जोखिमों को लेकर स्थिति ज्यादा साफ हुई है जिससे निवेशक, खासकर अति धनाढ्य लोग (एचएनआई), फिर से निजी बाजार में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

एआईएफ ऐसे फंड होते हैं जो गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर, रियल एस्टेट और जटिल निवेश रणनीतियों जैसे विशेष क्षेत्रों में निवेश करते हैं। इनमें निवेश करने के लिए आमतौर पर कम से कम 1 करोड़ रुपये का निवेश आवश्यक होता है। हालांकि, मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए प्रतिबंधों में ढील है।

विवृति एसेट मैनेजमेंट के चीफ बिजनेस और प्रोडक्ट अधिकारी दिपेन रुपारेलिया ने कहा, ‘कई निवेशकों ने पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर तस्वीर साफ होने तक अपना निवेश रोक रखा था। अब जब स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई है तब वे फिर से निजी बाजार में लौटने लगे हैं।’

इस वर्ष मार्च महीने तक एआईएफ में कुल निवेश प्रतिबद्धता लगभग 17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई जबकि पहली बार कुल फंड जुटाने का आंकड़ा 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। उद्योग के अनुसार हाल के महीनों में इसकी वृद्धि की रफ्तार पर कुछ असर पड़ा है।

कोटक ऑल्टरनेट एसेट मैनेजर्स में प्रबंध निदेशक श्रीनि श्रीनिवासन का कहना है कि यह मानना गलत होगा कि पूरे एआईएफ उद्योग में निवेश धीमा पड़ गया है और निवेशक अब भरोसेमंद फंडों में ही निवेश करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘निवेशक अब समझदार हो गए हैं जिससे स्वाभाविक रूप से निवेश फैसलों में देर हो रही है। पूंजी की कमी नहीं है, लेकिन निवेश में अधिक समय लिया जा रहा है। ऐसे में आखिरकार निवेश उन्हीं प्लेटफॉर्म की ओर जाएगा जिनका प्रदर्शन लंबे समय से अच्छा रहा है।’ उद्योग के अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि पहले एआईएफ कंपनियां खुद ही निवेशकों से धन जुटा लेती थीं लेकिन अब उन्हें वितरकों पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है।

उद्योग के एक फंड कारोबारी ने बताया, ‘फंड जुटाना थोड़ा कठिन होने के कारण वितरक अब ज्यादा सख्त शर्तें रख रहे हैं। दूसरी ओर, कई फैमिली ऑफिसों ने अब वेंचर कैपिटल के लिए अपने ही विशेषज्ञ नियुक्त कर लिए हैं और वे अपने निवेश का खुद प्रबंधन कर रहे हैं। इससे उनकी लागत कम होती है, लेकिन एआईएफ कंपनियों का मुनाफा घट रहा है।’

विशेषज्ञों का कहना है कि अमीर और अति अमीर निवेशक अब निजी ऋण रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं। इनमें रिटर्न का उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम है और बेहतर पोर्टफोलियो निर्माण, मजबूत सौदे और जोखिम प्रबंधन के जरिये लाभ कमाया जाता है।

अर्थ ग्रुप के फैमिली ऑफिस रिलेशनशिप प्रमुख जशांक पोहानी ने कहा, ‘जो फंड विदेशी निवेश पर अधिक निर्भर हैं, उन पर मंदी का असर ज्यादा पड़ा है। वहीं घरेलू निवेशकों से समर्थित फंडों ने अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूती दिखाई है। अगर वैश्विक तनाव कम होता है और बाजार का माहौल बेहतर होता है तो इनमें विदेशी पूंजी फिर से लौट सकती है।’

उन्होंने यह भी कहा कि निवेश की धीमी रफ्तार का एक असर यह हुआ है कि शुरुआती चरण के स्टार्टअप का मूल्यांकन अब अधिक वास्तविक हो गया है और उद्यमी अब किसी भी कीमत पर तेजी से बढ़ने के बजाय टिकाऊ कारोबार पर ध्यान दे रहे हैं।

इसके उलट उद्योग का कहना है कि गिफ्ट सिटी के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) के माध्यम से निवेश का प्रवाह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बना हुआ है। अब अधिक भारतीय निवेशक वैश्विक बाजारों में निवेश करना चाहते हैं।

डवटेल ग्रुप के सह-संस्थापक महेश शेखर ने कहा, ‘रुपये में कमजोरी के बावजूद भारत अब एक बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसके पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। अब समय आ गया है कि भारतीय निवेशकों को भी वैश्विक बाजारों में निवेश करना चाहिए। इससे निवेश का जोखिम कम होगा और जब विदेशी निवेश से लाभ मिलेगा तो वह धन आखिरकार भारत वापस आएगा।’

वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में गिफ्ट-आईएफएससी में पंजीकृत फंड योजनाओं की संख्या 327 से बढ़कर 360 हो गई।

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First Published - June 27, 2026 | 12:27 PM IST

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