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Budget 2026: मजबूत आर्थिक बुनियाद पर विकास का रोडमैप, सुधारों के बावजूद बाजार को झटका

बजट का ताना-बाना तीन कर्तव्यों- आर्थिक वृद्धि को गति देने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के इर्द-गिर्द बुना गया है

Last Updated- February 01, 2026 | 11:19 PM IST
Economy

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज केंद्रीय बजट 2026-27 ऐसे समय में पेश किया जब देश में वृहद आ​र्थिक माहौल बेहतरीन है। ​पहले अग्रिम अनुमानों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.4 फीसदी की वृद्धि हो सकती है जबकि 2024-25 में बढ़त 6.5 फीसदी थी। जीडीपी में इस ऊंची बढ़त के साथ ही मुद्रास्फीति काफी नरम है और राजकोषीय मजबूती भी बनी हुई है। इसके अलावा जैसा कि आ​र्थिक समीक्षा में कहा ही गया है, अब भारत की औसत वृद्धि क्षमता बढ़कर 7 फीसदी हो गई है जबकि तीन साल पहले यह 6.5 फीसदी थी।

बहरहाल, बाहरी मोर्चे पर चुनाैतियां बनी हुई हैं जिसका उल्लेख वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण की शुरुआत में ही किया। उन्होंने कहा, ‘आज हम एक ऐसे बाह्य परिवेश का सामना कर रहे हैं जिसमें व्यापार और बहुपक्षवाद खतरे में हैं और संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचने में अड़चन आ रही है।’ उन्होंने कहा कि इसलिए हमारा ध्यान क्षमता निर्माण पर होना चाहिए ताकि मध्यम से दीर्घकालिक स्तर पर वृद्धि टिकाऊ हो सके।

सेवा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के लिए कई अन्य चीजों के अलावा वित्त मंत्री ने एक उच्चा​धिकार प्राप्त ‘​शिक्षा से रोजगार और उद्यम स्थायी समिति’ के गठन की बात की है जो सेवा क्षेत्र पर जोर देते हुए उपायों के बारे में ऐसी सिफारिशें देगी जिससे साल 2047 तक वै​श्विक स्तर पर 10 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करते हुए भारत सेवा क्षेत्र में अगुआ बन सके।।

वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए, वित्त मंत्री ने छह मुख्य क्षेत्रों में उपायों की घोषणा की: सात रणनीतिक और अग्रिम क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ाना; विरासत वाले औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना; चैंपियन सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम बनाना; अवसंरचना निर्माण को लगातार बढ़ावा देना; दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करना; और शहरी आ​र्थिक क्षेत्र विकसित करना।

बजट भाषण में उन 350 से ज्यादा सुधारों को रेखांकित किया गया जिनका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2025 के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भी किया गया था, इसके बावजूद वायदा एवं विकल्प कारोबार में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने से शेयर बाजार कांप गया। वायदा कारोबार पर एसटीटी को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया। इसी तरह विकल्प कारोबार के ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शंस इस्तेमाल पर एसटीटी को क्रमश: 0.1 फीसदी और 0.125 फीसदी से बढ़ाकर 0.15  फीसदी कर दिया गया।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने 16वें वित्त आयोग की इस सिफारिश को मान लिया है कि राज्यों के लिए अंतरण को 41 फीसदी पर बनाए रखा जाए। केंद्र सरकार ने 2026-27 में राज्यों को वित्त आयोग अनुदान के तौर पर 1.4 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। राजकोषीय मोर्चे पर, सरकार का अनुमान है कि वह चालू वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 फीसदी रखने के लक्ष्य को हासिल कर लेगी। हालांकि, 2026-27 से सरकार ऋण-जीडीपी अनुपात को ल​क्षित करना शुरू कर देगी। इसके अनुसार, 2026-27 में ऋण-जीडीपी अनुपात 55.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 के संशो​धित अनुमान के अनुसार यह 56.1 फीसदी था।

वर्ष2025-26 के बजट भाषण में, निर्मला सीतारमण ने कहा था, ‘हमारा प्रयास हर साल राजकोषीय घाटे को इस तरह से रखने का होगा कि केंद्र सरकार का ऋण जीडीपी के फीसदी के रूप में कम होता रहे।’ यह संकेत दिया गया था कि केंद्र सरकार 2030-31 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को 50±1 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखेगी। इसकी वजह से 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य थोड़ा कम कर इसे जीडीपी के 4.3 फीसदी कर दिया गया है।

अगले वित्त वर्षके लिए नॉमिनल जीडीपी वृदि्ध का अनुमान 10 फीसदी रखा गया है, जबकि मौजूदा साल के लिए यह अनुमान 8 फीसदी है। धीमी नॉमिनल वृद्धि से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना स्वाभाविक रूप से और मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा, विविध तरह की पूंजीगत प्रा​प्तियों, यानी विनिवेश और परिसंप​त्ति मुद्रीकरण से होने वाली आय, मौजूदा साल के संशोधित अनुमानों के 33,837 करोड़ रुपये की तुलना में 80,000 करोड़ रुपये रहने की बात की गई है।

इस महीने के आखिर में राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय द्वारा नई जीडीपी श्रृंखला जारी करने के बाद इनमें से कुछ अनुमानों पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, जैसा कि अर्थशास्त्रियों ने बताया है, इससे जमीनी स्तर पर असल आर्थिक गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कवरेज में विस्तार और बेहतर मेथडोलॉजी के कारण अर्थव्यवस्था का आकार बदलने की संभावना है।

पिछले कुछ साल में राजकोषीय प्रबंधन की एक खासियत खर्च की गुणवत्ता में सुधार रहा है। वर्ष 2025-2026 के 10.96 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में 2026-27 में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर लगभग 12.22 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इसमें अन्य बातों के अलावा, सरकार सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने पर ध्यान देगी।

सार्वजनिक अवसंरचना निर्माण पर जोर बनाए रखने के अलावा, वित्त मंत्री ने रियल और फाइनैंशियल दोनों सेक्टर में गतिवि​​​धियों को बेहतर बनाने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनमें इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू करने का प्रस्ताव भी शामिल है। अप्रैल 2025 में शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना के लिए आवंटन 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

बजट में दुर्लभ खनिज मैग्नेट के लिए एक योजना शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इसमें पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में क्षमताओं को बेहतर बनाने के उपायों का भी प्रस्ताव दिया गया है। बजट में कपड़ा क्षेत्र पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है, जो देश के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि भारत मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए निर्यात बढ़ाना चाहता है।

सेवा क्षेत्र में, खास तौर पर वित्त मंत्री ने ऑरेंज इकॉनमी के बारे में बात की। एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स में लोगों को प्र​शिक्षण देने के लिए एक इंस्टीट्यूट बनाया जाएगा। बजट में स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। निवेश आकर्षित करने के लिए, बजट में ऐसी किसी भी कंपनी के लिए वर्ष2047 तक कर राहत का प्रस्ताव है जो भारत में डेटा सेंटर की सेवाओं का इस्तेमाल कर देश के बाहर सेवाएं देती है। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बड़ी वै​श्विक कंपनियां पहले से ही भारत में डेटा सेंटर बनाने की सोच रही हैं।

वित्तीय सेवा क्षेत्र में गतिवि​धियों को बढ़ाने के लिए, बजट में बैंकिंग पर एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव है ताकि इस क्षेत्र की पूरी तरह से समीक्षा की जा सके। सार्वजनिक कंपनियों, पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव किया गया है। नगर निगमों को बॉन्ड मार्केट में आने को प्रोत्साहित करने के लिए भी योजना आएगी।

प्रत्यक्ष कर की बात करें तो, कई तरह के विदेशी खर्चों पर स्रोत पर कर संग्रह को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने कुछ खास तरह के करदाताओं के लिए टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने और विदेशी परिसंप​त्तियों के खुलासे में मदद करने के उपायों की भी घोषणा की। पुनर्खरीद यानी बायबैक मार्ग के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए, अब इस पर पूंजीगत लाभ के तौर पर कर लगाने का प्रस्ताव है। इस रूट का इस्तेमाल करने वाले प्रमोटर्स को अतिरिक्त कर देना होगा।

अप्रत्यक्ष कर के मामले में, वित्त मंत्री ने सरलीकरण की दिशा में और कदम बढ़ाए हैं। उदाहरण के लिए, निर्यात के लिए सी-फूड प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले खास इनपुट पर शुल्क मुक्त सीमा बढ़ा दी गई है। कई तरह के उत्पादों पर शुल्क में कमी और छूट के अलावा, प्रक्रियाओं के मामले में, नीति अब भरोसे पर आधारित व्यवस्था बनाने पर जोर देने की है। इससे कारोबारी सुगमता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसके साथ ही, 2025-2026 के संशोधित अनुमान की तुलना में 2026-2027 में सीमा शुल्क से राजस्व में लगभग 5 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

First Published - February 1, 2026 | 11:11 PM IST

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