आम बजट 2026-27 भारत की स्वास्थ्य सेवा प्राथमिकताओं में एक सोचा-समझा लेकिन रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है। इसमें असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) के बढ़ते बोझ से निपटने पर साफ-साफ ध्यान दिया गया है। साथ ही शोघ, नवोन्मेष और कुशल श्रम बल के लिए लंबी अवधि का तंत्र बनाने पर जोर दिया गया है। पहली बार, स्वास्थ्य सेवा पर बजट 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। हालांकि, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा खर्च अभी भी वैश्विक बेंचमार्क से पीछे है।
स्वास्थ्य सेवा के लिए आवंटन पिछले साल के बजट अनुमानों से 6.57 फीसदी बढ़ाकर 1.06 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। यह संशोधित अनुमानों से करीब 10 फीसदी ज्यादा है। बजट की स्वास्थ्य सेवा रणनीति के केंद्र में बायोफार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग, खासकर बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर पर नए सिरे से जोर देना रहा क्योंकि भारत डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून जैसी असंक्रामक बीमारियों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी का सामना कर रहा है।
इसे समर्थन देने के लिए मिशन बायोफार्मा शक्ति नाम का एक 10,000 करोड़ रुपये का कार्यक्रम घोषित किया गया है, जो पांच साल तक चलेगा (वित्त वर्ष 27 के लिए 500 करोड़ रुपये)। इसका मकसद शोध, प्रतिभा के विकास, क्लिनिकल ट्रायल और मैन्युफैक्चरिंग को मिलाकर एक एंड-टू-एंड बायोफार्मा इकोसिस्टम बनाना है। इस पहल का लक्ष्य भारत को सिर्फ ज्यादा मात्रा में सप्लाई करने वाले देश से बदलकर नवोन्मेष पर आधारित बायोफार्मा केंद्र बनाना है।
तीन नए नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च (एनआईपीईआर) भी स्थापित किए जाएंगे, जबकि सात मौजूदा संस्थानों को एडवांस्ड रिसर्च, इंडस्ट्री कोलैबरेशन और हाई-एंड स्किलिंग को मजबूत करने के लिए अपग्रेड किया जाएगा।
शोध पर फोकस को देखते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के लिए फंडिंग में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 4,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गई,जबकि बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में सिर्फ मामूली बढ़ोतरी हुई। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और नैशनल एड्स ऐंड एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम के लिए आवंटन में 1 फीसदी से भी कम की बढ़ोतरी हुई। इस बीच, नई घोषित अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (एएचपी) स्किलिंग योजना को वित्त वर्ष 27 के लिए 1,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स (डीओपी) के लिए आवंटन 12.56 फीसदी बढ़ाकर 5,931.22 करोड़ रुपये कर दिया गया, वहीं फार्मा और मेडटेक में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई यानी 245 करोड़ रुपये से बढ़कर 750 करोड़ रुपये कर दी गई। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम में मामूली बढ़ोतरी हुई। डीओपी और आयुष मंत्रालय के लिए आवंटन को मिलाकर वित्त वर्ष 27 के लिए हेल्थकेयर से संबंधित कुल आवंटन 1.16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया।
हेल्थकेयर इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म एशिया हेल्थकेयर होल्डिंग्स के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन विशाल बाली ने कहा कि यह बढ़ोतरी अभी तक कोई ढांचागत बदलाव का संकेत नहीं देती है। उन्होंने कहा, कुल मिलाकर मांग-आपूर्ति का अंतर और मेडिकल टेक्नॉलजी के बढ़ते आयात बिल को देखते हुए यह आवंटन कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखाता है। उद्योग के विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि जहां ज्यादा आय वाले देश अपने जीडीपी का 10-12 फीसदी हेल्थकेयर पर खर्च करते हैं, वहीं भारत का आवंटन 2 फीसदी से भी कम है।
इस बीच, बायोफार्मा सेक्टर में उम्मीद की किरण दिखी। वैक्सीन बनाने वाली कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स के प्रबंध निदेशक आनंद कुमार ने कहा कि भारत पहले से ही दुनिया की करीब 60 फीसदी वैक्सीन की आपूर्ति करता है। इस पहल में भारत को वॉल्यूम से आगे बढ़ने वाले आपूर्तिकर्ता से नवोन्मेष आधारित बायोफार्मा लीडर बनने की दिशा में तेजी लाने की क्षमता है।
बायोकॉन बायोलॉजिक्स के सीईओ और प्रबंध निदेशक श्रीहास तांबे ने कहा कि यह मिशन सही समय पर शुरू किया गया है, खासकर नवंबर 2025 में घोषित 1 लाख करोड़ रुपये के आरऐंडडी और नवोन्मेष प्रतिबद्धता को देखते हुए।