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Budget 2026: मुश्किल दौर से गुजर रहे SEZ को बड़ी राहत, अब घरेलू बाजार में सामान बेच सकेंगी इकाइयां

वित्त मंत्री ने रणनीतिक विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और निर्यात वाली इकाइयों (ईओयू) की लागत कम करने के मकसद से कई तरह की सीमा शुल्क छूट का प्रस्ताव रखा

Last Updated- February 01, 2026 | 11:01 PM IST
EXport
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) के प्रभाव से निर्यातकों को बचाने के लिए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को उन विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में इकाइयों की निष्क्रिय क्षमता का उपयोग करने, उन क्षेत्रों की निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार में मदद के लिए एकमुश्त उपायों की घोषणा की जिन पर टैरिफ की सबसे अधिक मार पड़ी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रणनीतिक विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और निर्यात वाली इकाइयों (ईओयू) की लागत कम करने के मकसद से कई तरह की सीमा शुल्क छूट का प्रस्ताव रखा।

सीतारमण ने बजट भाषण में कहा, ‘निजी इस्तेमाल के लिए आयात की जाने वाली वस्तुओं के सीमा शुल्क ढांचे को तर्कसंगत बनाने के लिए मैं निजी इस्तेमाल की आयातित सभी शुल्क योग्य वस्तुओं पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।’

सितंबर 2035 तक सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ पंजीकृत सभी परमाणु संयंत्रों के लिए परमाणु-ऊर्जा उत्पादन उपकरण, ऑब्जर्बर रॉड और परियोजना आयातों पर शुल्क खत्म कर दिए गए हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा आयात किए जाने पर विमान के रखरखाव, मरम्मत या बड़े बदलाव करने के लिए विमान के पुर्जों के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल पर भी शुल्क हटा दिए गए हैं। इनमें इंजन भी शामिल हैं।

सोलर ग्लास में इस्तेमाल होने वाले सोडियम एंटीमोनेट, लीथियम-आयन सेल बनाने के लिए जरूरी पूंजीगत वस्तुओं और मोनाजाइट पर भी शुल्क खत्म किए गए हैं।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव के मुताबिक टैरिफ छूट एयरोस्पेस, परमाणु प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरणों में अमेरिकी ताकत के अनुरूप है और यह धीरे-धीरे भारत में अमेरिकी कंपनियों के लिए बाजार सुगमता में सुधार कर रही है।

बजट में निर्यातकों को भी लक्षित राहत दी गई है। सीफूड निर्यात के प्रसंस्करण में इस्तेमाल विशेष इनपुट के लिए शुल्क-मुक्त आयात सीमा पिछले वर्ष के फ्री ऑन बोर्ड निर्यात कारोबार के 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दी जाएगी। विशेष इनपुट का शुल्क-मुक्त आयात अभी चमड़े या सिंथेटिक फुटवियर के निर्यात के लिए उपलब्ध है, अब इसे जूते के ऊपरी भाग तक बढ़ाया जाएगा। चमड़े या परिधान, चमड़े या सिंथेटिक फुटवियर और अन्य चमड़ा उत्पादों के निर्यात की समय अवधि दोगुनी की गई है और इसे एक वर्ष किया गया है।

छोटे कारोबारों और स्टार्टअप द्वारा ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, सरकार कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की सीमा हटा देगी। सीतारमण ने एकमुश्त उपायों की भी घोषणा की। इससे सेज में पात्र विनिर्माण इकाइयों को रियायती शुल्क पर घरेलू बाजार में सामान बेचने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, इस तरह की बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक विशिष्ट अनुपात तक सीमित होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में काम करने वाली इकाइयों को नुकसान न हो।

निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘इन उपायों को लागू करने के लिए आवश्यक नियामकीय बदलाव किए जाएंगे, जबकि डीटीए में काम करने वाली इकाइयों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किया जाएगा।’ सेज इकाइयों से भारत के कुल निर्यात का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा अमेरिका को जाता है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल-दिसंबर के दौरान, सेज से अमेरिका को वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात लगभग 10.5 अरब डॉलर पर स्थिर रहा।

ईओयू और सेज की निर्यात संवर्धन परिषद के महानिदेशक आलोक चतुर्वेदी ने कहा, ‘इससे सेज में क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। उन्हें भारतीय बाजार में विश्व स्तरीय उत्पादों की आपूर्ति की अनुमति मिलेगी। यह उपाय आयात की जगह देश में ही विनिर्माण में मददगार साबित होगा, रोजगार पैदा करेगा और सेज में नए निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है।’

First Published - February 1, 2026 | 11:01 PM IST

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