यूनियन बजट 2026-27 के साथ ही सरकार ने ऐसा ऐलान किया है, जिसने बॉन्ड बाजार की धड़कनें तेज कर दी हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह अगले वित्त वर्ष में 17.2 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कर्ज लेगी। यह रकम न सिर्फ अब तक की सबसे बड़ी है, बल्कि बाजार के अनुमान से भी ज्यादा निकली है।
बजट के आंकड़ों के मुताबिक, सरकार का कुल उधार मौजूदा वित्त वर्ष के 14.61 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 17.2 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। यानी सरकार अगले साल करीब 17 फीसदी ज्यादा कर्ज लेने जा रही है। वहीं शुद्ध उधार भी बढ़कर 11.73 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।
बजट से पहले बाजार मान रहा था कि सरकार 16 से 17.5 लाख करोड़ रुपये तक कर्ज ले सकती है। अर्थशास्त्रियों के सर्वे में औसत अनुमान 16.3 लाख करोड़ रुपये का था। लेकिन सरकार का ऐलान इन सभी अनुमानों से ऊपर निकल गया।
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पिछले कुछ महीनों से ही केंद्र और राज्य सरकारों के भारी उधार के चलते सरकारी बॉन्ड पर दबाव बना हुआ है। बॉन्ड यील्ड पहले ही ऊपर जा चुकी है और अब डर है कि सोमवार को बाजार खुलते ही 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड और चढ़ सकती है।
ट्रेडर्स और निवेशकों की चिंता है कि बॉन्ड की भारी सप्लाई यील्ड को लंबे समय तक ऊंचा रख सकती है। यह चिंता तब भी बनी हुई है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने रिकॉर्ड बॉन्ड खरीद और फॉरेक्स स्वैप जैसे कदम उठाकर बाजार को सहारा देने की कोशिश की है।
एसबीआई म्यूचुअल फंड के फिक्स्ड इनकम सीआईओ राजीव राधाकृष्णन ने कहा कि सरकार के उधार के बड़े आंकड़े और बॉन्ड की मांग बढ़ाने के लिए किसी ठोस कदम की कमी से बाजार पर दबाव साफ दिख रहा है। उनका कहना है कि आने वाले समय में बॉन्ड बाजार काफी हद तक आरबीआई के कदमों पर निर्भर रहेगा और यह चुनौती यील्ड को ऊंचा बनाए रख सकती है।
यूटीआई एएमसी के सीनियर एग्जीक्यूटिव और फिक्स्ड इनकम के चीफ अनुराग मित्तल ने कहा कि बजट का फोकस देश की तरक्की पर है। उन्होंने बताया कि सरकार घरेलू कारखानों को बढ़ावा देने और निर्यात मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले साल 17.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का ऐलान किया है, जो बाजार की उम्मीद से ज्यादा है। इसलिए बॉन्ड की सप्लाई थोड़ी ज्यादा रहेगी और इसका असर बाजार पर पड़ सकता है।
अनुराग मित्तल के मुताबिक, सरकार घाटा कम करने के रास्ते पर तो है, लेकिन बहुत सख्ती नहीं कर रही है। आने वाले कुछ समय में बॉन्ड की ब्याज दरों पर दबाव रह सकता है, लेकिन खरीदारी की मांग बनी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कुल मिलाकर बॉन्ड बाजार स्थिर रह सकता है। निवेश के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड फंड और इनकम प्लस आर्बिट्राज फंड अभी भी अच्छे विकल्प बने रह सकते हैं।
सरकार ने साफ किया है कि वह कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को अगले वित्त वर्ष में 55.6 फीसदी तक लाना चाहती है। इसके लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)