विश्वास-आधारित कराधान और छोटी-मोटी व तकनीकी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की दिशा में बजट 2026 ने व्यक्तिगत करदाताओं के लिए जुर्माने और अभियोजन की व्यवस्था को काफी नरम कर दिया है। इन बदलावों का मकसद मुकदमेबाजी कम करना, अनुपालन की चिंता घटाना और ईमानदारी के साथ किए गए खुलासों को बढ़ावा देना है।
बजट में छोटे करदाताओं जैसे छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स, विदेश से लौटे एनआरआई वगैरह को एक बार छह महीने का समय देने का प्रस्ताव है ताकि वे तय सीमा के अंदर विदेशी आय और परिसंपत्तियों का खुलासा कर सकें और छूट पा सकें। यह योजना करदाताओं की दो श्रेणियों पर लागू होगी : पहला, जिन्होंने अपनी विदेश की आय या परिसंपत्तियों का खुलासा नहीं किया है और दूसरा, जिन्होंने अपनी विदेश की आय का खुलासा किया है और/या बकाया कर का भुगतान किया है, लेकिन हासिल की गई परिसंपत्तियों का खुलासा नहीं किया। पहली श्रेणी के लिए बिना बताई गई आय या परिसंपत्तियां लगभग 1 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
करदाताओं को बिना बताई गई आय या परिसंपत्तियों की उचित बाजार कीमत पर 30 फीसदी कर देना होगा, साथ ही जुर्माने की जगह अतिरिक्त कर के तौर पर 30 फीसदी और देना होगा। दूसरी श्रेणी के लिए बिना बताई गई परिसंपत्तियों की कीमत 5 करोड़ रुपये तक हो सकती है। करदाता 1 लाख रुपये का शुल्क देकर जुर्माने और अभियोजन दोनों से छूट पा सकता है। पहले विदेशी परिसंपत्तियों की जानकारी देने में चूक को बहुत सख्ती से निपटा जाता था।
एसवीएएस बिजनेस एडवाइजर्स के फाउंडर विश्वास पंजियार ने कहा, बजट 2026 सीमित समय के लिए रेगुलराइजेशन की सुविधा दे रहा है, जिसमें साफ लिमिट, तय पेमेंट और पेनल्टी या प्रॉसिक्यूशन से छूट मिलेगी।
समय पर जानकारी देना बहुत जरूरी है। किंग स्टब ऐंड कसीवा, एडवोकेट्स ऐंड अटॉर्नीज में मैनेजिंग पार्टनर जिदेश कुमार ने कहा, छह महीने की सीमित समय सीमा बताती है कि यह राहत खास है और समय सीमा खत्म होने के बाद लागू करने के नियम काफी सख्त होने की संभावना है।
20 लाख रुपये से कम की गैर-अचल विदेशी संपत्तियों के लिए सरकार 1 अक्टूबर, 2024 की पिछली तारीख से अभियोजन से छूट देगी। जुर्माने में राहत पहले से ही थी। पहले, छोटी कीमत की विदेशी संपत्तियों से भी अभियोजन का डर रहता था। पंजियार ने कहा, इससे घबराहट और बचाव के लिए होने वाले मुकदमों में कमी आएगी, खासकर छात्रों और दुनिया भर में घूमने वाले प्रोफेशनल्स के बीच।
बजट में करदाताओं को यह सुविधा देने का प्रस्ताव है कि वे दोबारा कर निर्धारण शुरू होने के बाद भी लागू दर पर 10 फीसदी अतिरिक्त कर देकर अपडेटेड रिटर्न फाइल कर सकें। पहले, दोबारा कर निर्धारण शुरू होने के बाद स्वैच्छिक सुधार का रास्ता बंद हो जाता था।
पंजियार ने कहा, यह बदलाव दोबारा कर निर्धारण के दौरान स्पष्ट निकासी का रास्ता बनाता है, जिसमें कर निर्धारण अधिकारी सिर्फ अपडेटेड रिटर्न पर ही आगे बढ़ेगा। इससे विवाद और जुर्माने के मुकदमों में कमी आएगी और जानबूझकर न किए गए मामलों का तेजी से निपटारा होगा। अगर सही में कोई गलती हुई है तो करदाता को इस विकल्प का इस्तेमाल जल्दी करना चाहिए।