डेरिवेटिव पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में भारी इजाफे के साथ-साथ आम बजट में बाजार को सहारा देने वाले उपायों के अभाव ने रविवार को निवेशकों को हिला कर रख दिया और इसकी वजह से घरेलू इक्विटी में छह साल में बजट के दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स दिन के कारोबार में 2,370 अंक तक गिर गया और बाद में 1,547 अंक या 1.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,723 पर बंद हुआ। सत्र के दौरान निफ्टी करीब 3 फीसदी गिरकर 495 अंक नीचे 24,825 पर बंद हुआ। फरवरी 2020 के बाद दोनों सूचकांकों में बजट के दिन यह सबसे बड़ी गिरावट रही। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 9.4 लाख करोड़ रुपये घटकर 451 लाख करोड़ रुपये रहा।
सरकार ने वायदा पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत, विकल्प प्रीमियम पर 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत और विकल्प के प्रयोग पर 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा। लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कोई राहत नहीं मिलने या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को आकर्षित करने के उपायों के अभाव के साथ-साथ इस वृद्धि ने बाजार को चौंका दिया।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘उम्मीद थी कि एसटीटी को हटा दिया जाएगा या कम से कम लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कुछ राहत दी जाएगी।’ मारसेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी सौरभ मुखर्जी ने जरूरी सुधार बताते हुए कहा कि जोखिम उठाकर डेरिवेटिव कारोबार किए जाने ने परिवारों की पूंजी को नष्ट कर दिया है और इस कदम से बचत को खपत और उत्पादक निवेश की ओर मोड़ा जा सकता है। भारतीय इक्विटी इस साल अधिकांश उभरते बाजारों से पिछड़ गई है। सेंसेक्स में 5.3 प्रतिशत और निफ्टी में 2026 में अब तक 5 प्रतिशत की गिरावट आई है।
एफपीआई शुद्ध विक्रेता रहे हैं, जिन्होंने साल 2025 में 1.7 लाख करोड़ रुपये व इस साल 35,962 करोड़ रुपये निकाले हैं, जिसमें रविवार को निकाले गए 588 करोड़ रुपये भी हैं। घरेलू संस्थानों ने 683 करोड़ रुपये निकाले।