महिंद्रा समूह ने नागपुर में वाहनों और ट्रैक्टरों के लिए अपनी सबसे बड़ी संयुक्त विनिर्माण इकाई लगाने की योजना का आज ऐलान किया। इसके तहत 10 साल के दौरान 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस इकाई में सालाना 5,00,000 वाहन और 1,00,000 ट्रैक्टर बनाने की क्षमता होगी। नागपुर की इस इकाई में उत्पादन साल 2028 में शुरू होने वाला है। यह ऐलान औद्योगिक सम्मेलन एडवांटेज विदर्भ में किया गया। यह सम्मेलन विदर्भ को भारत के विनिर्माण नक्शे पर उभरते औद्योगिक केंद्र के तौर पर पेश करता है। यह इकाई नागपुर में 1,500 एकड़ से ज्यादा जमीन पर बनेगी। साथ ही नागपुर से लगभग 400 किलोमीटर दूर संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) में 150 एकड़ का सप्लायर पार्क भी होगा।
इसके अलावा समूह अपनी मौजूदा उत्पादन और इंजन क्षमताओं का विस्तार करने के साथ-साथ अपने ‘एडवांस्ड टेक्नॉलजी’ कारोबार को बढ़ाने के लिए इगतपुरी-नाशिक क्षेत्र (संभाजीनगर और विदर्भ के करीब) में लगभग 300 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करेगा। महिंद्रा अपनी विनिर्माण पैठ और मजबूत करने के लिए तीन स्थानों पर कुल मिलाकर 2,000 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण कर रहा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस निवेश से खासी संख्या में रोजगार सृजित होंगे तथा विदर्भ और आसपास के इलाकों के विकास में तेजी आएगी। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) के कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी (वाहन और कृषि क्षेत्र) राजेश जेजुरिकर ने कहा, ‘इसे हमारे अगली पीढ़ी के वाहनों और ट्रैक्टरों की मदद के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एकीकृत संयंत्र के भीतर स्तर, लचीलापन और आधुनिक तकनीक एक साथ होगी।’
अगस्त में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने कहा था कि वह मांग पूरी करने और अपने आगामी मॉडलों के समर्थन के लिए वित्त वर्ष 27 तक अपने चाकण संयंत्र में प्रति वर्ष 2,40,000 वाहनों की क्षमता जोड़ रही है। वह विस्तार के लिए नए स्थलों पर भी विचार कर रही है। उसने नाशिक के पास इगतपुरी में 350 एकड़ जमीन हासिल करने के लिए महाराष्ट्र सरकार को पहले ही आशय पत्र सौंप दिया है।
कंपनी पहले ही वित्त वर्ष 25 और वित्त वर्ष 27 के बीच अपने वाहन कारोबार में 27,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने की योजना का संकेत दे चुकी है। महिंद्रा ने कहा कि विदर्भ क्षेत्र से मजबूत रणनीतिक लाभ मिलता है। इसमें समृद्धि एक्सप्रेसवे के जरिये सड़कों की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी, दमदार रेल लिंक, प्रमुख घरेलू और निर्यात बाजारों तक आसान पहुंच तथा तेजी से विकसित हो रहा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र शामिल है।