भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज इस बात का आश्वासन दिया कि केंद्रीय बैंक देश की मांग को पूरा करने के लिए करेंसी नोटों की आपूर्ति जारी रखेगा। मार्च 2025 के आखिर तक देश में करेंसी नोटों का कुल मूल्य 36.87 लाख करोड़ रुपये था, जबकि एक साल पहले यह 34.78 लाख करोड़ रुपये था। संख्या के लिहाज से इस अवधि में 15,500 करोड़ नोट रहे, जबकि पिछले साल यह संख्या 14,600 करोड़ थी।
साल 2024-25 के दौरान प्रचलन में बैंक नोटों के मूल्य में 6.0 प्रतिशत और संख्या में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कम मूल्य वाले करेंसी नोटों से जुड़े एक सवाल के जवाब में मल्होत्रा ने कहा, ‘हम मुद्रा की जरूरतों के प्रति बहुत सचेत हैं। हम सभी तरह के नोट मुहैया कराते हैं, चाहे वह छोटे मूल्यवर्ग के हों या बड़े मूल्यवर्ग के।’
उन्होंने कहा, ‘हम नियमित रूप से समीक्षा करते हैं और उसके आधार पर छपाई, प्रबंधन और प्रसार सुनिश्चित किया जाता है। लिहाजा, हम देश की मुद्रा संबंधी जरूरतों को पूरा करना जारी रखेंगे, जिसमें छोटे नोट भी शामिल हैं।’ कम मूल्य के नोटों में रिजर्व बैंक अब 2 रुपये और 5 रुपये के नोट नहीं छाप रहा है।
संख्या के लिहाज से 500 रुपये के नोटों का 40.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रचलन में शामिल कुल नोटों में सबसे अधिक हिस्सा रहा। इसके बाद 100 रुपये के नोटों की 16.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। कम मूल्यवर्ग वाले नोटों (10 रुपये, 20 रुपये और 50 रुपये) की प्रचलन में शामिल कुल नोटों में संख्या के लिहाज से संयुक्त रूप से 31.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।