facebookmetapixel
SBI Q3 Result: दिसंबर तिमाही में जोरदार बढ़त, मुनाफा 13% उछलकर ₹21,317 करोड़भारत-अमेरिका ट्रेड डील से टेक्सटाइल सेक्टर में आएगा उछाल, FY27 में दिखेगी डबल डिजिट ग्रोथभारत-अमेरिका के बीच $500 अरब का महा-समझौता, अगले 5 साल में ऊर्जा और तकनीक से बदलेगी तस्वीरबैंकिंग सेवाओं में आएगा बड़ा सुधार! बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स के लिए RBI ने बनाई हाई-लेवल कमेटीUPI पेमेंट होगा और भी सुरक्षित: धोखाधड़ी रोकने के लिए RBI ला रहा है कड़े सुरक्षा नियमRBI गवर्नर का भरोसा: देश में कभी नहीं होगी कैश की कमी, छोटे नोटों की सप्लाई पर विशेष जोरबैंकों में ₹85,000 करोड़ बिना किसी दावे के: दिसंबर में ₹1,043 करोड़ बांटे, ऐसे पाएं अपना फंसा हुआ पैसाफार्मिंग सेक्टर के लिए बड़ी खुशखबरी: फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के उत्पादन में भारत ने बनाया नया रिकॉर्डकर्मचारियों के लिए गुड न्यूज: EPFO वेतन सीमा और न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर जल्द फैसला लेगी सरकारIIT मद्रास का बड़ा कदम: ₹600 करोड़ के डीप टेक फंड से स्टार्टअप्स को मिलेगी नई उड़ान

फार्मिंग सेक्टर के लिए बड़ी खुशखबरी: फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के उत्पादन में भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड

अप्रैल-दिसंबर अवधि में यूरिया की बिक्री सालाना आधार पर 3.8 फीसदी बढ़कर 3.116 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन 3.2 फीसदी घटकर 2.244 करोड़ टन रह गया

Last Updated- February 07, 2026 | 1:06 PM IST
indian farmer
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में फॉस्फेटिक और पोटाश (पीऐंडके) उर्वरकों का उत्पादन जनवरी में 15.7 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इन उर्वरकों में  डीएपी और कॉम्प्लेक्स एनपीके शामिल हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार यह देश में अब तक का सबसे अधिक मासिक उत्पादन है। बयान के अनुसार यह उपलब्धि भारत को उर्वरकों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है और खासकर उस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने का संकेत देती है, जहां अब तक विदेशों पर ज्यादा निर्भरता रही है।

इस बीच, कुछ दिन पहले फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के आंकड़ों से पता चला है कि वित्त वर्ष 26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर 2025 ) में भारत ने एक साल पहले की तुलना में 85 फीसदी ज्यादा यूरिया, 46 फीसदी ज्यादा डीएपी और 122 फीसदी अधिक एनपीके उर्वरकों का आयात किया है। अप्रैल-दिसंबर अवधि में यूरिया की बिक्री सालाना आधार पर 3.8 फीसदी बढ़कर 3.116 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन 3.2 फीसदी घटकर 2.244 करोड़ टन रह गया। अधिक आयात ने किसानों की उस समय मदद की, जब फसल के सबसे जरूरी वक्त पर उर्वरक की मांग बढ़ गई थी।

इस बीच, डीएपी की बिक्री घटकर 80 लाख टन रह गई, जो एक साल पहले 83.3 लाख टन थी। यह मांग में थोड़ी कमजोरी को दिखाता है। फिर भी इसका आयात 45.7 फीसदी बढ़कर 59.5 लाख टन हो गया, जिससे घरेलू उत्पादन में 3.9 फीसदी की कमी के बावजूद फॉस्फेट उर्वरकों की उपलब्धता बनी रही।

वहीं कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का रुख अलग रहा। डीएपी को छोड़कर एनपी और एनपीके उर्वरकों का उत्पादन 13.1 फीसदी बढ़कर 92.7 लाख टन हो गया, जबकि आयात दोगुने से ज्यादा बढ़कर 32.9 लाख टन पहुंच गया। बिक्री लगभग स्थिर रहकर 1.174 करोड़ टन रही, जिससे संकेत मिलता है कि फोकस सिर्फ मांग के पीछे भागने के बजाय उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने और संतुलित पोषक उपयोग को बढ़ावा देने पर था।

First Published - February 7, 2026 | 1:06 PM IST

संबंधित पोस्ट