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फार्मिंग सेक्टर के लिए बड़ी खुशखबरी: फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के उत्पादन में भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड

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अप्रैल-दिसंबर अवधि में यूरिया की बिक्री सालाना आधार पर 3.8 फीसदी बढ़कर 3.116 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन 3.2 फीसदी घटकर 2.244 करोड़ टन रह गया

Last Updated- February 07, 2026 | 1:06 PM IST
indian farmer
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत में फॉस्फेटिक और पोटाश (पीऐंडके) उर्वरकों का उत्पादन जनवरी में 15.7 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इन उर्वरकों में  डीएपी और कॉम्प्लेक्स एनपीके शामिल हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार यह देश में अब तक का सबसे अधिक मासिक उत्पादन है। बयान के अनुसार यह उपलब्धि भारत को उर्वरकों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है और खासकर उस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने का संकेत देती है, जहां अब तक विदेशों पर ज्यादा निर्भरता रही है।

इस बीच, कुछ दिन पहले फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के आंकड़ों से पता चला है कि वित्त वर्ष 26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर 2025 ) में भारत ने एक साल पहले की तुलना में 85 फीसदी ज्यादा यूरिया, 46 फीसदी ज्यादा डीएपी और 122 फीसदी अधिक एनपीके उर्वरकों का आयात किया है। अप्रैल-दिसंबर अवधि में यूरिया की बिक्री सालाना आधार पर 3.8 फीसदी बढ़कर 3.116 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू उत्पादन 3.2 फीसदी घटकर 2.244 करोड़ टन रह गया। अधिक आयात ने किसानों की उस समय मदद की, जब फसल के सबसे जरूरी वक्त पर उर्वरक की मांग बढ़ गई थी।

इस बीच, डीएपी की बिक्री घटकर 80 लाख टन रह गई, जो एक साल पहले 83.3 लाख टन थी। यह मांग में थोड़ी कमजोरी को दिखाता है। फिर भी इसका आयात 45.7 फीसदी बढ़कर 59.5 लाख टन हो गया, जिससे घरेलू उत्पादन में 3.9 फीसदी की कमी के बावजूद फॉस्फेट उर्वरकों की उपलब्धता बनी रही।

वहीं कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का रुख अलग रहा। डीएपी को छोड़कर एनपी और एनपीके उर्वरकों का उत्पादन 13.1 फीसदी बढ़कर 92.7 लाख टन हो गया, जबकि आयात दोगुने से ज्यादा बढ़कर 32.9 लाख टन पहुंच गया। बिक्री लगभग स्थिर रहकर 1.174 करोड़ टन रही, जिससे संकेत मिलता है कि फोकस सिर्फ मांग के पीछे भागने के बजाय उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने और संतुलित पोषक उपयोग को बढ़ावा देने पर था।

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First Published - February 7, 2026 | 1:06 PM IST

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