अर्थव्यवस्था में ऋण वितरण को आगे और बेहतर बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बैंकों को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) को धन मुहैया कराने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। पहले इसकी अनुमति नहीं थी। साथ ही रिजर्व बैंक ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बगैर गारंटी वाले ऋण की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया है।
भारत में रीट और बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) की अवधारणा संस्थागत और खुदरा निवेशकों के फंड के साथ लाई गई थी, जिससे रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं को धन मुहैया कराया जा सके। रिजर्व बैंक ने इनविट को बैंक ऋण देने की अनुमति दे दी थी, लेकिन रीट को ऋण देने अनुमति नहीं थी।
केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘समीक्षा करने और सूचीबद्ध रीट के लिए एक मजबूत नियामक और प्रशासनिक ढांचे की उपस्थिति पर विचार करने के बाद उचित और विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के साथ वाणिज्यिक बैंकों को रीट को धन मुहैया कराने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इनविट को ऋण देने के संबंध में मौजूदा दिशानिर्देशों को रीट को ऋण देने के लिए प्रस्तावित सुरक्षा उपायों के साथ समानता के लिए सामंजस्य स्थापित किया जा रहा है।’
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि एमएसएमई अर्थव्यवस्था के विकास के प्रमुख इंजन हैं। खासकर रोजगार सृजन में इनकी प्रमुख भूमिका है। इन्हें बिना गारंटी 10 लाख रुपये तक ऋण देने की सीमा 2010 से लागू है। इसे 20 लाख किया जाना महंगाई दर से तालमेल बिठाने जैसा है। उन्होंने कहा कि इनविट को ऋण देने की पहले से ही अनुमति थी और हम अब इसे रीट तक भी बढ़ा रहे हैं। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र को मदद मिलेगी।
नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में बैंकों और गैर बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र में धन की कुल आवक अब तक 29.6 लाख करोड़ रुपये तक रही है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में 23.3 लाख करोड़ रुपये आए थे। गैर खाद्य बैंक ऋण की आवक (5.04 लाख करोड़ रुपये) में बढ़ोतरी और गैर वित्तीय इकाइयों द्वारा कॉरपोरेट बॉन्ड (1.4 लाख करोड़ रुपये) जारी किया जाना इस वृद्धि की प्रमुख वजह थी।
इसके अलावा 15 जनवरी, 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक बैंक ऋण में सालाना आधार पर 13.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि एक साल पहले 11.5 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। इसी अवधि के दौरान जमा में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो एक साल पहले के 10.8 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में कम है। इसकी वजह से ऋण जमा (सीडी) अनुपात 98.4 हो गया है।
बैंकिंग व्यवस्था में ऋण जमा अनुपात अधिक होने को लेकर मल्होत्रा ने साफ किया कि जब बैंकों की ऋण वृद्धि उनकी जमा वृद्धि की तुलना में अधिक है तो ऐसे में सीडी अनुपात बढ़ना अपेक्षित है।
उन्होंने कहा, ‘ऐसा समय आता है, जब सीडी अनुपात बढ़ता है और एसी अवधि भी आती है, जब इसमें कमी आती है। यह इस पर निर्भर होता है कि हमारा कारोबारी चक्र कहां है। हमारे लिए सीडी अनुपात महत्त्वपूर्ण नहीं है, बल्कि नकदी की स्थिति महत्त्वपूर्ण है। इसके लिए एलसीआर ढांचा है। एक नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो(एनएसएफआर) है, जिससे मध्यम अवधि की नकदी व्यवस्थित होती है। ये दोनों बैंकों के साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए भी बहुत आरामदायक स्तर पर हैं।’