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पर्सनल लोन से पाना चाहते हैं जल्दी छुटकारा? जोश में न लें फैसला, पहले समझें यह जरूरी गणित

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एक्सपर्ट द्वारा पर्सनल लोन बंद करने के सही तरीके और छिपे हुए खर्चों के गणित को विस्तार से यहां समझाया गया है

Last Updated- February 09, 2026 | 6:24 PM IST
Personal loan
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अक्सर लोग पर्सनल लोन लेते समय तो बहुत उत्साहित होते हैं, लेकिन कुछ EMI भरने के बाद ही उनके मन में एक ही बात चलती है कि कैसे भी करके इस कर्ज के बोझ को जल्द से जल्द खत्म कर दिया जाए। जैसे ही हाथ में थोड़ा अतिरिक्त पैसा आता है, लोग तुरंत बैंक की ओर भागते हैं ताकि लोन क्लोज (Foreclosure) किया जा सके। हालांकि, लोन को समय से पहले बंद करना हमेशा फायदे का सौदा नहीं होता।

FatakPay के को-फाउंडर अभिषेक गांधी का मानना है कि लोन बंद करने का फैसला केवल आपकी इच्छा पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि इससे आपकी जेब पर असल में क्या असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, लोन चुकाने की जल्दबाजी में कई बार लोग अनजाने में आर्थिक नुकसान कर बैठते हैं।

लोन बंद करने का सही समय और नेट सेविंग्स का गणित

लोन को प्री-पे या फोरक्लोज करने से पहले सबसे जरूरी है उसके ‘कॉस्ट इम्पैक्ट’ यानी लागत के प्रभाव को समझना। अभिषेक गांधी बताते हैं कि अक्सर कर्जदार सिर्फ इस बात पर ध्यान देते हैं कि उन्हें कर्ज खत्म करना है, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि लोन के समय के साथ-साथ ब्याज का गणित बदलता रहता है। 

उदाहरण के तौर पर, यदि आपने पांच साल के लिए लोन लिया है और आप तीसरे साल में उसे बंद करना चाहते हैं, तो यह एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है क्योंकि अभी भी काफी ब्याज बचाना मुमकिन है। लेकिन अगर लोन खत्म होने में महज छह महीने या एक साल बचा है, तो उसे बंद करने की भागदौड़ शायद बेकार हो।

इसकी वजह यह है कि शुरुआती सालों में EMI का एक बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में जाता है, जबकि आखिरी महीनों तक आते-आते आप लगभग पूरा ब्याज दे चुके होते हैं। ऐसे में बैंक को फोरक्लोजर फीस देना आपके लिए घाटे का सौदा हो सकता है।

इसके अलावा, प्री-पेमेंट के समय लगने वाले छिपे हुए खर्चों पर ध्यान देना भी अनिवार्य है। कई बार बैंक 3% या 4% फोरक्लोजर चार्ज लेते हैं, लेकिन इसके साथ लगने वाले 18% GST को लोग अक्सर जोड़ना भूल जाते हैं। 

अभिषेक गांधी एक गणित समझाते हैं कि यदि आप दो लाख रुपये का लोन प्री-पे कर रहे हैं और उस पर 3% फीस के हिसाब से 6,000 रुपये चार्ज लग रहा है, तो उस पर 1,080 रुपये का GST भी देना होगा। अगर लोन जल्दी बंद करने से आपकी कुल ब्याज बचत केवल पांच हजार रुपये हो रही है, तो आप वास्तव में अपनी जेब से ज्यादा पैसे दे रहे हैं। इसलिए, हमेशा ‘नेट सेविंग्स’ का हिसाब लगाकर ही कदम आगे बढ़ाना चाहिए।

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पार्शियल प्री-पे: कर्ज कम करें और क्रेडिट बनाए रखें

अक्सर लोग सोचते हैं कि लोन को पूरी तरह बंद कर देना ही सबसे अच्छा है, लेकिन एक्सपर्ट एक अन्य विकल्प की ओर भी इशारा करते हैं जो है पार्शियल प्री-पेमेंट यानी आंशिक भुगतान। 

अभिषेक के मुताबिक, कई मामलों में पूरा लोन एक साथ बंद करने के बजाय थोड़ा-थोड़ा पैसा बीच में जमा करना ज्यादा फायदेमंद होता है। मान लीजिए आपको ऑफिस से बोनस मिला है या कहीं से पैसा आया है, तो उस पूरी राशि को लोन बंद करने में झोंकने के बजाय मूलधन (Principal Amount) को कम करने के लिए इस्तेमाल करें। इससे आपका बकाया कम हो जाता है और भविष्य की किस्तों पर लगने वाला ब्याज भी घट जाता है।

इस रणनीति का एक और बड़ा फायदा आपके क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट प्रोफाइल से जुड़ा है। जब आप लोन को एकदम से बंद कर देते हैं, तो वह ‘क्रेडिट लाइन’ खत्म हो जाती है। इसके विपरीत, यदि आप लोन को एक्टिव रखते हुए उसका बड़ा हिस्सा चुका देते हैं, तो आपकी ‘क्रेडिट एज’ बनी रहती है। क्रेडिट ब्यूरो उन ग्राहकों को ज्यादा पसंद करते हैं जो लंबे समय तक अनुशासन के साथ लोन का पुनर्भुगतान करते हैं। 

अभिषेक साफ शब्दों में कहते हैं कि लोन जल्दी खत्म कर देना क्रेडिट स्कोर के लिए कोई नुकसान की बात नहीं है। असली बात ये है कि आप कितने नियमित और अनुशासन से लोन चुकाते हैं। अगर आप लोन को चालू रखते हुए हर किस्त समय पर भरते हैं, तो आगे चलकर बड़े लोन मिलने की संभावना और मजबूत हो जाती है।

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किश्तें खत्म करना ही काफी नहीं, कागजी कार्यवाही भी जरूरी

लोन चुकाने की प्रक्रिया में जो सबसे बड़ी और आम गलती लोग करते हैं, वह है अधूरी कागजी कार्यवाही। अभिषेक चेतावनी देते हैं कि लोन का बंद होना तब तक अधूरा है जब तक वह आपके और बैंक के रिकॉर्ड्स में पूरी तरह साफ न हो जाए। कई कर्जदार अपनी आखिरी EMI कटने के बाद चैन की सांस लेते हैं और मान लेते हैं कि अब उनका कोई लेना-देना नहीं है। 

लेकिन कई बार कोई छोटा सा पेंडिंग चार्ज, जैसे कि EMI बाउंस की फीस या ‘ब्रॉकन पीरियड इंटरेस्ट’ के 200-500 रुपये बकाया रह जाते हैं। यह छोटी सी रकम आपके लिए भविष्य में बड़ी मुसीबत बन सकती है।

जब तक आप बैंक से ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ (NDC) प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक तकनीकी रूप से वह लोन खाता खुला ही माना जाता है। यदि कोई छोटी राशि भी बकाया रह गई, तो वह आपके सिबिल (CIBIL) रिपोर्ट पर ‘डिफॉल्ट’ या ‘आउटस्टैंडिंग’ के रूप में दिखाई देगी, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह गिर सकता है। 

अभिषेक की सलाह है कि लोन खत्म होने के बाद बैंक से जरूर फिजिकल या डिजिटल NDC लें। साथ ही ये भी चेक करें कि बैंक ने आपका क्रेडिट ब्यूरो रिकॉर्ड अपडेट कर दिया हो। आखिर में सही मायनों में सफल लोन क्लोजर वही होता है, जो आपको चैन की नींद दे और आपका फाइनेंशियल रिकॉर्ड भी पूरी तरह साफ-सुथरा रखे।

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First Published - February 9, 2026 | 6:24 PM IST

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