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क्या लोन रिकवरी एजेंट करता है परेशान? नोट कर लें ये जरूरी नियम और जानें कहां करें शिकायत

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एक्सपर्ट का मानना है कि EMI चूकने पर रिकवरी एजेंट द्वारा परेशान किए जाने पर घबराने की जरूरत नहीं है। नियमों के तहत अपने अधिकारों को जानें, सबूत जुटाएं और सही जगह शिकायत करें

Last Updated- June 01, 2026 | 8:59 PM IST
loan recovery agent
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

लोन की EMI चूक जाना किसी के लिए भी बेहद तनावपूर्ण हो सकता है। नौकरी छूटना, बीमारी, बिजनेस में घाटा या कोई अचानक आया बड़ा खर्च, इनमें से वजह कुछ भी हो सकती है। लेकिन मुसीबत तब और बढ़ जाती है जब बैंक या फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंट लगातार फोन करके, परिवार वालों को परेशान करके या धमकियां देकर मानसिक दबाव बनाने लगते हैं।

बेशक बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपना पैसा वापस लेने का पूरा हक है, लेकिन लोन रिकवरी और ग्राहकों के उत्पीड़न (Harassment) के बीच एक बहुत पतली लकीर होती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साफ नियम बनाए हैं कि बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) और उनके रिकवरी एजेंट ग्राहकों से कैसा बर्ताव करेंगे। इन अधिकारों को जानकर आप बिना डरे ऐसी मुश्किल स्थितियों का सामना कर सकते हैं।

रिकवरी एजेंटों की बदसलूकी से परेशान हैं लोग

आजकल कर्जदारों की तरफ से बदसलूकी और उत्पीड़न की शिकायतें बहुत आम हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट प्रतीक झा बताते हैं कि ज्यादातर शिकायतें डराने-धमकाने वाले फोन कॉल, खराब व्यवहार, अजीब समय पर बार-बार फोन करने और परिवार, सहकर्मियों या पड़ोसियों तक को फोन करके परेशान करने से जुड़ी होती हैं। उनका कहना है कि बैंक को पैसे वसूलने का अधिकार है, लेकिन किसी को डराना, सरेआम जलील करना या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कानूनी रूप से बिल्कुल गलत है।

खैतान एंड कंपनी के पार्टनर प्रतीक कुमार भी इस बात से सहमत हैं। उनके मुताबिक, ग्राहकों को उनके घर या दफ्तर पर जाकर सरेआम बेइज्जत करना, परिवार के लोगों के बीच दखल देना, सोशल मीडिया पर धमकी भरे मैसेज भेजना और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना जबरन गाड़ी या संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश करना, ये सब शिकायतें आम हैं। यह सीधे तौर पर RBI की गाइडलाइंस और अदालती फैसलों का उल्लंघन है, जो एजेंटों की इस हरकत के लिए बैंकों को जिम्मेदार ठहराते हैं।

क्या नहीं कर सकते रिकवरी एजेंट?

RBI की गाइडलाइंस के मुताबिक, रिकवरी एजेंटों को ग्राहकों से बात करते समय कुछ मर्यादाओं का पालन करना ही होगा। वे नीचे दी गई हरकतें बिल्कुल नहीं कर सकते:

  • गलत समय पर आना या कॉल करना: वे आपको बेवक्त (जैसे देर रात या तड़के सुबह) फोन नहीं कर सकते और न ही घर आ सकते हैं।
  • गाली-गलौज या धमकी: बातचीत में अपशब्दों, धमकी या डराने वाली भाषा का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है।
  • दूसरों को परेशान करना: पैसे वसूलने के लिए आपके दोस्तों, पड़ोसियों, दफ्तर के साथियों या रिश्तेदारों को फोन नहीं किया जा सकता।
  • सरेआम बेइज्जती: समाज या आपके काम की जगह पर आपको बदनाम या जलील नहीं किया जा सकता।
  • फर्जी कानूनी धमकी: बिना किसी कानूनी आधार के पुलिस बुलाने या जेल भेजने की धमकी देना अवैध है। क्योंकि लोन डिफॉल्ट आमतौर पर एक सिविल मामला होता है और एजेंटों के पास किसी को गिरफ्तार करने की कोई पावर नहीं होती।
  • जबरन कब्जा: तय कानूनी प्रक्रिया को पूरा किए बिना एजेंट आपकी किसी भी प्रॉपर्टी या गाड़ी को जबरन जब्त नहीं कर सकते।

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सबूत जुटाना क्यों है जरूरी?

अगर कोई एजेंट अपनी हद पार करता है, तो आपके पास मौजूद सबूत ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बनते हैं। एडवोकेट प्रतीक झा का कहना है कि जब भी कोई एजेंट हद पार करे, तो तुरंत कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज और स्क्रीनशॉट सेव कर लें। हर बातचीत की तारीख और समय नोट करना न भूलें।

उन्होंने एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक ग्राहक को एजेंट लगातार धमका रहे थे और उसके परिवार को भी परेशान कर रहे थे। ग्राहक ने समझदारी दिखाई और सभी कॉल व मैसेज का रिकॉर्ड संभाल कर रखा। जब इस सबूत को कानूनी तौर पर सामने रखा गया, तो उत्पीड़न तुरंत रुक गया और बैंक को नियमों के दायरे में काम करने के निर्देश दिए गए।

इसी तरह का एक और मामला साझा करते हुए प्रतीक कुमार ने बताया कि लोन-अगेंस्ट-प्रॉपर्टी के एक ग्राहक की EMI बाउंस होने पर एजेंट उसके घर पहुंच गए, उसे बदनाम किया और रिश्तेदारों को परेशान किया। ग्राहक ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया और बैंक के साथ-साथ आरबीआई से भी इसकी शिकायत की। साथ ही मामले को सार्वजनिक किया। नतीजा यह हुआ कि एजेंटों को पीछे हटना पड़ा और बैंक ने बातचीत करके लोन चुकाने का नया शेड्यूल बना दिया।

उत्पीड़न होने पर क्या कदम उठाएं?

अगर बैंक या एजेंट नियमों को ताक पर रखकर आपको परेशान कर रहे हैं, तो इन तरीकों से कदम उठाएं:

  1. सबूतों को संभालें: सबसे पहले कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज, ईमेल, एजेंटों के नाम और उनके नंबर संभाल कर रखें।
  2. बैंक में शिकायत दर्ज कराएं: सबसे पहले संबंधित बैंक या फाइनेंस कंपनी के ग्रीवेंस रिड्रेसल ऑफिसर (Grievance Redressal Officer) या नोडल ऑफिसर को लिखित में शिकायत भेजें और पूरी घटना बताएं।
  3. आरबीआई (RBI) तक पहुंचें: अगर बैंक 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत का सही समाधान नहीं करता है, तो आप सीधे आरबीआई के कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  4. पुलिस की मदद लें: अगर बात मारपीट, जान से मारने की धमकी या गंभीर आपराधिक हरकत तक पहुंच जाए, तो बिना देर किए नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत या एफआईआर (FIR) दर्ज कराएं।

बैंक से बातचीत का रास्ता कभी बंद न करें

मुश्किल वक्त में अक्सर लोग एक बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं कि वे बैंक या एजेंटों से पूरी तरह संपर्क तोड़ लेते हैं। प्रतीक झा सलाह देते हैं कि डर या तनाव की वजह से फोन उठाना बंद न करें, क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ जाती है। अगर आप सचमुच पैसे की तंगी से जूझ रहे हैं, तो खुद बैंक से संपर्क करें। उन्हें अपनी स्थिति बताएं और लोन रीस्ट्रक्चरिंग (लोन की शर्तें बदलने) या सेटलमेंट के विकल्पों पर बात करें। ध्यान रहे, बैंक से जो भी बात हो, उसे लिखित या ईमेल के जरिए रिकॉर्ड पर जरूर रखें।

प्रतीक कुमार भी यही कहते हैं कि अपना मोबाइल नंबर बदलने या गायब होने के बजाय सीधे बैंक के अधिकारियों से बात करें। अपने लोन एग्रीमेंट के दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें, जरूरत पड़े तो किसी कानूनी विशेषज्ञ की सलाह लें और किसी भी दबाव या जबरदस्ती के आगे झुककर गलत भुगतान न करें।

दोनों एक्सपर्ट का मानना है कि आर्थिक उतार-चढ़ाव किसी के भी जीवन में आ सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई आपकी गरिमा और प्राइवेसी से खिलवाड़ करे। लोन रिकवरी की एक तय कानूनी प्रक्रिया है, और प्रताड़ना उसका हिस्सा कभी नहीं हो सकती।

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First Published - June 1, 2026 | 8:59 PM IST

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