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ब्रांड की दुनिया में स्मृति मंधाना का जलवा: पुरुषों के दबदबे वाले विज्ञापन बाजार में लिख रहीं नई इबादत

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खेल के मैदान के भीतर और बाहर कामयाबी हासिल कर महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना विज्ञापन जगत में शर्तों की नई इबारत लिख रही हैं

Last Updated- February 10, 2026 | 10:57 PM IST
Smriti Mandhana
फोटो क्रेडिट: Facebook/Smriti Mandhana

भारतीय महिला क्रिकेट कुछ ही महीनों में कई ऐतिहासिक पलों का गवाह बना है। नवंबर 2025 में भारत की लड़कियों ने पहली बार क्रिकेट विश्व कप जीता और इस साल फरवरी में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु (आरसीबी) की टीम ने विमेन प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) का खिताब झटक लिया। इस टीम ने पिछले चार साल में दूसरी बार यह खिताब जीता है। दोनों ही खिताबों में भारतीय क्रिकेट टीम की उपकप्तान और आरसीबी की कप्तान स्मृति मंधाना का बड़ा हाथ रहा।

डब्ल्यूपीएल के फाइनल में 5 नवंबर की रात को दूधिया रोशनी से नहाई पिच पर स्मृति ने केवल 41 गेंद पर 87 रन कूट दिए और अपनी रिकॉर्ड बुक में कुछ नए पन्ने जोड़ दिए। स्मृति डब्ल्यूपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप जीतने वाली पहली भारतीय बनीं और आईपीएल तथा डब्ल्यूपीएल में खिताब जीतने वाली टीम की पहली ऐसी कप्तान भी बन गईं, जिसे ऑरेंज कैप मिली है। डब्ल्यूपीएल के चार फाइनल हो चुके हैं और फाइनल मुकाबले में सबसे ज्यादा रन बनाने के रिकॉर्ड पर भी अब स्मृति का नाम लिख गया है। यह रिकॉर्ड पहले भारतीय टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर के पास था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वह पिछले साल महिला एकदिवसीय अंततराष्ट्रीय मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं। इस दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा रन का 28 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। एक साल में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने का रिकॉर्ड भी स्मृति के ही नाम है।

इन आंकड़ों ने यह तो बता दिया कि क्रिकेट के मैदान पर स्मृति का कितना रुआब है मगर सोशल मीडिया पर भी उनका दबदबा तेजी से बढ़ा है और वह कई ब्रांड्स की लाडली बन गई हैं। मार्केटिंग प्लेटफॉर्म कोरज के मुताबिक इंस्टाग्राम पर स्मृति के फॉलोअर्स की तादाद एक ही साल में दोगुनी होकर 1.5 करोड़ तक पहुंच गई है। भारत में किसी भी महिला एथलीट के इतने फॉलोअर्स नहीं हैं। इनमें करीब 3.58 लाख फॉलोअर्स तो स्मृति के साथ पिछले 30 दिन में ही जुड़े हैं। 29 साल की मंधाना की मार्केटिंग संभालने वाले बेसलाइन वेंचर्स के सह संस्थापक और प्रबंध निदेशक तुहिन मिश्रा कहते हैं, ‘अभी उनके पास सेहत, एथलेश्यर, तेल, परफ्यूम, बीमा, मोबाइल आदि के 12-15 ब्रांड हैं और कुछेक नए ब्रांड भी जुड़ने वाले हैं। वह किसी एक श्रेणी में नहीं बंधी हैं।’

बेसलाइन वेंचर्स के मुताबिक विश्वकप और डब्ल्यूपीएल खिताब जीतने के बाद स्मृति की वैल्यू 15-20 फीसदी बढ़ गई है। अभी उनकी नेटवर्थ 80-90 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।  स्मृति के पास अभी भारतीय स्टेट बैंक, हुंडै मोटर्स, वन प्लस, पीएनबी मेटलाइफ और गल्फ ऑयल जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड हैं। फायर ऐंड वॉटर कंसल्टिंग के संस्थापक और ब्रांड विशेषज्ञ रूपेश कश्यप कहते हैं, ‘उनका जलवा केवल बल्ले, जूते और एनर्जी ड्रिंक्स में नहीं बल्कि प्रीमियम, लाइफस्टाइल और वैल्यू वाले ब्रांड्स में भी दिखता है।’ वह डब्ल्यूपीएल की सबसे महंगी खिलाड़ी भी हैं, जिन्हें 2023 में आरसीबी ने 3.40 करोड़ रुपये में खरीदा था।

बेसलाइन वेंचर्स का कहना है कि स्मृति अभी इस समय एक विज्ञापन करार दो-ढाई करोड़ रुपये में कर रही हैं जो विश्व कप जीतने वाली बाकी खिलाडि़यों से काफी ज्यादा है। मिश्रा कहते हैं कि ज्यादातर ब्रांडों के साथ स्मृति का करार लंबे समय के लिए है क्योंकि उन्होंने खुद को मैदान पर कद्दावर एथलीट और मैदान से बाहर बेहतरीन शख्सियत के तौर पर साबित किया है। उनका कहना है, ‘उनकी दमदार, भरोसेमंद, आत्मविश्वासी, शहरी महिला की छवि है, जिससे ज्यादातर ब्रांड जुड़ना चाहते हैं।’

पुरुषों का दबदबा

स्मृति बेहतरीन ब्रांडों के साथ जमकर करार रही हैं मगर देश में विज्ञापन की दुनिया में पुरुष खिलाड़ियों और उनमें भी क्रिकेटरों की तूती बोलती रही है। क्रॉल की 2024 की सेलेब्रिटी ब्रांड मूल्यांकन रिपोर्ट एक विरोधाभास उजागर करती है: छह पुरुष क्रिकेटर उस साल के शीर्ष 25 सर्वाधिक मूल्यांकन वाले लोगों में नजर आए। बीते दो सालों में उनमें एक भी महिला खिलाड़ी नहीं थी। 2022 में बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू को 24वां स्थान मिला था और वह सूची की इकलौती महिला खिलाड़ी थीं।

ऐसे में कहा जा सकता है कि मंधाना अपने कौशल और व्यक्तित्व से ब्रांड जगत में अलग पहचान बना रही हैं। क्रॉल की 2024 की सेलेब्रिटी ब्रांड वैल्यूशन रिपोर्ट से यह साबित भी होता है, जिसमें साल की 25 सबसे ज्यादा कीमती शख्सियतों में छह पुरुष क्रिकेटर थे और पिछले दो साल से इस फेहरिस्त में एक भी महिला खिलाड़ी नहीं आ रही है। बैडमिंटर स्टार पी वी सिंधु का नाम 2022 में इस सूची पर 24वीं पायदान पर था और वहां पहुंचने वाली वह इकलौती महिला एथलीट हैं।

मगर माना जा रहा है कि स्मृति के भीतर ब्रांड की दुनिया की शर्तें नए सिरे से लिखने की कुव्वत है। अल्केमिस्ट ब्रांड कंसल्टिंग के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर समित सिन्हा कहते हैं, ‘आज वक्त उनका है और ब्रांड का चेहरा बनने की जबरदस्त क्षमता उनमें दिख रही है। भले ही वह गिने-चुने पुरुष क्रिकेटरों की तरह ऊंचाई नहीं छू पाएं मगर ब्रांड की दुनिया में वह भारत की सबसे बेशकीमती महिला खिलाड़ी जरूर बन सकती हैं।’

कश्यप कहते हैं कि सिंधु के ज्यादातर ब्रांड उनके प्रदर्शन की वजह से मिले थे मगर स्मृति के साथ भावनाएं जुड़ जाती हैं। सिन्हा का कहना है, ‘स्मृति का प्रदर्शन लगातार बेहतरीन बना हुआ है। ज्यादातर लोग उन्हें मौजूदा कप्तान हरमनप्रीत की वारिस मान रहे हैं। इस वजह वजह से वह ब्रांड की और भी दुलारी बन जाती हैं।’ सिन्हा के हिसाब से स्मृति के आकर्षण और ग्लैमर की वजह से आम लोग उन्हें ज्यादा पहचानते हैं।

मिश्रा ध्यान दिलाते हैं कि स्मृति पिछले 8-9 साल से लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर सधा हुआ बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं। वह यह भी कहते हैं कि कोई खिलाड़ी रातोरात बड़ा ब्रांड नहीं बन जाता बल्कि उसकी कीमत मैदान के भीतर और बाहर बेहतरीन तरीके से खुद को पेश करने पर समय के साथ बढ़ती है। वह कहते हैं, ‘स्मृति के भीतर यह सब है। उनके पास विराट कोहली, रोहित शर्मा और पीवी सिंधु जैसा बड़ा ब्रांड बनने की खूबी है और उस राह पर वह चल भी पड़ी हैं।’

कश्यप की नजर में स्मृति को केवल स्पोर्ट्स ब्रांड से जोड़ना नाइंसाफी होगी। वह कहते हैं, ‘एमएस धोनी, विराट या रोहित ब्रांड इसलिए बने क्योंकि वे क्रिकेट के अलावा भी कुछ थे। स्मृति वह सफर शुरू कर रही हैं, उसके पीछे भाग नहीं रही हैं।’ विज्ञापन जगत के पंडितों को यह भी लगता है कि स्मृति नई भारतीय नारी की प्रतीक हैं। कश्यप समझाते हैं, ‘महिला एथलीटों को दिग्गज पुरुष खिलाड़ियों की नकल नहीं करनी है। उनका सांस्कृतिक पैमाना अलग है स्मृति उस पर एकदम सटीक बैठती हैं।’ 

चुनौतियां

भारत में महिला क्रिकेट लगातार बढ़ रहा है और स्मृति का प्रदर्शन बेजोड़ रहा है मगर विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रांड की दुनिया में सबसे बड़ा नाम बनने की उनकी राह में कई रोड़े हैं। खेलों की अनिश्चितता का जिक्र करते हुए सिन्हा कहते हैं, ‘आरसीबी के साथ स्मृति का रिश्ता टूटा, प्रदर्शन बिगड़ा या कुछ समय वह मैदान से दूर रहीं तो उन्हें कुछ नुकसान होना तय है।’

ब्रांड विशेषज्ञ संदीप गोयल ने भी पहले कहा था कि विज्ञापन पाने में सफलता लोगों के बीच आपकी पहचान पर निर्भर करती है। इसके लिए खिलाड़ी को कम से कम एक हद तक तो नजर आना ही पड़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जमाना बेशक बदल रहा है मगर पुरुषों के क्रिकेट को अब भी ज्यादा लोग देखते हैं। यही वजह है कि बल्ला टांग चुके खिलाड़ियों जैसे वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, धोनी और सचिन तेंडुलकर आदि की ब्रांड वैल्यू और पहचान अब भी बहुत ज्यादा है।

फिर भी इस समय ‘ब्रांड स्मृति’ सफलता के झूले पर सवार है। लोग मान रहे हैं कि बेशक उनके आंकड़े कुछ पुरुष क्रिकेटरों जितने बेहतरीन नहीं हैं मगर वह एक दम नई किस्म का असर डाल रही है। कश्यप एकदम सही कहते हैं, ‘चतुर ब्रांड यह नहीं पूछेंगे कि वह अगली विराट बनेंगी या नहीं। वे पूछेंगे कि स्मृति किस तरह के भारत की प्रतीक हैं।’

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First Published - February 10, 2026 | 10:32 PM IST

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