facebookmetapixel
Advertisement
अब पैकेट बंद खाने पर रहेगी चीनी, नमक और वसा के मात्रा की चेतावनी, SC ने FSSAI को लगाई कड़ी फटकारबारामती हादसे के बाद DGCA का बड़ा एक्शन: 14 चार्टर विमान कंपनियों का शुरू हुआ ‘स्पेशल सेफ्टी ऑडिट’लोक सभा में थमा एक हफ्ते का गतिरोध, अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष ने दिया नोटिसमहत्वपूर्ण खनिजों को लेकर नीति आयोग की केंद्र को बड़ी चेतावनी, कहा: पर्यावरण की कीमत पर न हो माइनिंगअमेरिकी बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मचेगी धूम! 46 अरब डॉलर के मार्केट में मिलेगी ‘ड्यूटी-फ्री एंट्री’CBSE का बड़ा फैसला: अब कंप्यूटर पर जांची जाएंगी 12वीं की कॉपियां, OSM सिस्टम होगा लागूसियासी जंग का बमगोला बना तिरुपति का लड्डू, TDP और YSRCP में सियासी जंगब्रांड की दुनिया में स्मृति मंधाना का जलवा: पुरुषों के दबदबे वाले विज्ञापन बाजार में लिख रहीं नई इबादतभारत-अमेरिका ट्रेड डील में डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत का वादा, शुल्क मुक्त ई-ट्रांसमिशन पर होगी बात!IPO, QIP और राइट्स इश्यू से जुटाई रकम पर सेबी की नजर, नियम होंगे सख्त

सियासी जंग का बमगोला बना तिरुपति का लड्डू, TDP और YSRCP में सियासी जंग

Advertisement

तिरुपति के लड्डू में कथित मिलावट पर एसआईटी की रिपोर्ट से टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच जबानी जंग छिड़ी

Last Updated- February 10, 2026 | 11:03 PM IST
Tirupati laddu controversy

कहने को तो तिरुपति में लड्डू का प्रसाद करीब 310 साल पहले मिलना शुरू हुआ मगर इस लड्डू की जड़ें चोल और विजयनगर साम्राज्य तक जाती हैं। चढ़ावे का वह लड्डू आंध्र प्रदेश में एक बार फिर सियासी जंग का सबब बन गया है और इस पर जबानी जंग छिड़ी है सत्तारूढ़ तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) तथा मुख्य विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के बीच।

मामले ने तब जोर पकड़ा, जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने पिछले दिनों लड्डू प्रसादम बनाने में मिलावटी घी के कथित उपयोग पर अपनी रिपोर्ट आंध्र प्रदेश सरकार को सौंपी। रिपोर्ट बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी देखी है। उसे पढ़कर लगता है कि लड्डू में कथित तौर पर वनस्पति तेल, रासायनिक एस्टर और सिंथेटिक पदार्थ मिले हुए थे। इधर रिपोर्ट आने के बाद शुरू हुए सियासी घमासान के बीच एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 11 पन्नों की एसआईटी रिपोर्ट जांचने के लिए एक सदस्य वाला नया आयोग गठित करने का फैसला सुना दिया।

भक्तों के लिए मायने

प्रसाद का यह लड्डू सबसे पहले 2 अगस्त, 1715 को बनाया और चढ़ाया गया था। आम तौर पर इसे 600 कार्यकर्ताओं की एक समर्पित टीम तैयार करती है, जिसमें शामिल विशेष रसोइयों को ‘पाचक’ कहा जाता है। ये पाचक ही मंदिर के भीतर बनी पवित्र रसोई ‘लड्डू पोटू’ के भीतर जाकर लड्डू बनाते हैं। इस लड्डू को 2009 में जीआई टैग भी मिल गया था। तेलुगु लोगों के लिए यह केवल प्रसादम नहीं है बल्कि उनकी संस्कृति, आस्था और विरासत का प्रतीक है।

बताया जाता है कि लड्डू बनाने के लिए रोजाना करीब 10 टन बेसन, 10 टन चीनी, 700 किलोग्राम काजू, 160 किलो इलायची, 300 से 500 लीटर घी, 500 किलो मिश्री और करीब 540 किलो किशमिश इस्तेमाल की जाती है। इस तरह रोजाना करीब 2.80 लाख लड्डू बनाए जाते हैं और खास मौकों पर दिन में 8 लाख लड्डू तक बना दिए जाते हैं। इतनी बड़ी मात्रा और प्रसादम के साथ भावनाएं जुड़ी होने के कारण इसकी गुणवत्ता एवं स्वाद पर उठने वाला कोई भी सवाल आसानी से हंगामा खड़ा कर सकता है।

विवाद की शुरुआत

टीडीपी का कहना है कि कथित मिलावट 2019 और 2024 के बीच हुई थी, जब राज्य में वाईएसआर कांग्रेस की सरकार थी और वाईएस जगन मोहन रेड्डी मुख्यमंत्री थे। मौजूदा मुख्यमंत्री नायडू ने सितंबर 2024 में आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी।

मगर बाद में राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सेंटर फॉर एनालिसिस ऐंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक ऐंड फूड (सीएएलएफ) की प्रयोगशाला से आई एक रिपोर्ट ने कहा कि लड्डू में किसी और तरह की चर्बी थी। इससे चिंता बढ़ गई और दोष डिंडीगुल की कंपनी एआर डेरी फूड से आई घी की खेप पर डाल दिया गया। मगर कंपनी ने आरोपों से इनकार कर दिया।

इन आरोपों के बाद जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। उसकी रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकारियों ने लड्डू के लिए कच्चा माल खरीदने के तमाम चरणों में प्रक्रियाओं को ताक पर रखा है। जांच में यह भी पता चला कि ठीक से अध्ययन किए बगैर 2020 में निविदा की शर्तें काफी बदल दी गईं, जिनके कारण ऐसी कंपनियां भी दोबारा आ गईं, जिन्हें पहले निविदा के लिए अयोग्य करार दिया गया था। बोली लगाने के लिए पहले वही कंपनी पात्र होती थी, जिसका कारोबार कम से कम 250 करोड़ रुपये था मगर बदलावों के बाद इसे घटाकर 150 करोड़ रुपये कर दिया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा कहा गया है कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के तत्कालीन अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी को मिलावट का पता था। फिर भी उन्होंने घटिया माल भेजने वाली डेरियों से ही आगे भी घी खरीदने की इजाजत दे दी। रेड्डी राज्य सभा सदस्य और जगन मोहन रेड्डी के चाचा हैं।

टीडीपी ने एक बयान में कहा, ‘आधिकारिक आरोपपत्र से हुए नए खुलासों ने तिरुपति लड्डू के मसले पर भक्तों में नया आक्रोश और गहरी पीड़ा जगा दी है। इसमें यह खौफनाक सच्चाई भी उजागर हुई है कि पवित्र लड्डू में मिलावट के लिए शौचालय साफ करने वाला रसायन इस्तेमाल हुआ था।’

आरोप पत्र के मुताबिक एक आरोपी मनीष गुप्ता ने मार्च 2022 से मई 2024 के बीच कथित तौर पर कई नामों से बिल बनाए थे। आरोप है कि उसी दौरान एरिस्टो केमिकल्स नाम की कंपनी ने हर्ष फ्रेश डेरी प्रोडक्ट्स तथा भोले बाबा ऑर्गनिक डेरी मिल्क को लगभग 8,900 किलो लैक्टिक एसिड और लबसा या एसिड स्लरी बेची। टीडीपी ने बयान में कहा कि लबसा अखाद्य श्रेणी का हानिकारक औद्योगिक पदार्थ है, जो रासायनिक प्रक्रिया से जला सकता है, शरीर के भीतरी अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है और खाने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये दोनों कंपनियां कहीं से भी दूध नहीं खरीदती थीं मगर दोनों ने दूध खरीदने के फर्जी रिकॉर्ड बनाए।

दूसरी ओर वाईएसआर कांग्रेस खुद को बचाने के लिए दावा कर रही है कि मिलावट उसके सत्ता में आने से पहले हुई थी। भोले बाबा डेरी को 2018 में टीडीपी की पिछली सरकार के दौरान पैनल में लिया गया था।

जगन ने कहा, ‘केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हाल ही में आरोप पत्र दाखिल किया और जांच पूरी की। उन्होंने एनडीडीबी और नैशनल डेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) की रिपोर्ट पेश करते हुए साफ कहा कि लड्डू में जानवरी की चर्बी बिल्कुल नहीं थी, जिसका दावा चंद्रबाबू नायडू ने 18 महीने से कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘सीबीआई ने यह भी कहा कि वाईएसआर कांग्रेस की सरकार में कोई गलत काम नहीं हुआ। इस तरह उसने टीटीडी के पूर्व चेयरमैन को निर्दोष करार दिया है।’

कुछ राजनीतिक विश्लेषक भी यही कह रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राम कृष्ण संगम ने कहा, ‘दोनों पार्टियां इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही हैं। सरकार अपनी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है और वाईएसआर कांग्रेस भीड़ जुटा रही है। टीडीपी ने पहला आरोप यह लगाया था कि लड्डू में जानवर की चर्बी है। मगर प्रयोगशाला से आई हालिया रिपोर्ट में चर्बी मिलने का कोई सबूत नहीं है।’

दोनों खेमे इस विवाद का राजनीतिक फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में लगता है कि प्रसाद का यह पवित्र लड्डू आने वाले दिनों में तूफान ला सकता है।

Advertisement
First Published - February 10, 2026 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement