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अब पैकेट बंद खाने पर रहेगी चीनी, नमक और वसा के मात्रा की चेतावनी, SC ने FSSAI को लगाई कड़ी फटकार

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अदालत ने कहा कि खाद्य कंपनियों के विरोध से ज्यादा अहम, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने की एफएसएसएआई की जिम्मेदारी से ज्यादा जरूरी नहीं है

Last Updated- February 10, 2026 | 11:03 PM IST
Food Labeling
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को भारतीय खाद्य संस्था और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से कहा है कि वह पैकिंग वाले खाद्य पदार्थों के कवर पर चेतावनी का लेबल लगाने पर गंभीरता से विचार करे क्योंकि उनमें बहुत ज्यादा चीनी, संतृप्त वसा और नमक होता है।

पैक किए हुए खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य चेतावनी लिखे जाने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन के पीठ ने कहा कि पहली नजर में ये मामला सही लग रहा है कि अगर खाने के पैकेट पर आगे की तरफ चेतावनी दी जाए तो लोगों की सेहत को फायदा हो सकता है। इस याचिका में ये मांग की गई है कि खाने के पैकेट पर आगे की तरफ चेतावनी देना जरूरी किया जाए।

अदालत ने कहा कि खाद्य कंपनियों के विरोध से ज्यादा अहम, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने की एफएसएसएआई की जिम्मेदारी से ज्यादा जरूरी नहीं है और अदालत ने चेतावनी दी कि एफएसएसएआई अगर लगातार निष्क्रियता दिखाता रहा तब अदालत न्यायिक हस्तक्षेप कर सकती है। अदालत ने एफएसएसएआई को चार हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है।

याचिका में कहा गया है कि खाने के पैकेट के पीछे दी गई पोषण संबंधी जानकारी, ग्राहकों को सोच-समझकर फैसला लेने के लिए काफी नहीं है, खासकर जब पैकिंग वाले खाने का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। अदालत की ये टिप्पणी खाद्य पदार्थों की लेबलिंग के तरीके की कड़ी निगरानी के बीच आई है। एफएसएसएआई के जवाब दाखिल करने के बाद इस मामले पर फिर से विचार किया जाएगा।

हाल के महीनों में, एफएसएसएआई ने कई पैकिंग किए गए खाद्य पदार्थों में भ्रामक या अपर्याप्त रूप से प्रमाणित स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों को चिह्नित किया है। साथ ही खाद्य तेल, शहद, पेय पदार्थ, न्यूट्रास्यूटिकल्स और रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों जैसे उत्पादों पर सलाह जारी करते हुए जांच तेज कर दी है।

लेबलब्लाइंड सॉल्यूशंस के एक स्वतंत्र अध्ययन में पाया गया कि पैकेट वाले खाद्य उत्पादों में समीक्षा किए गए लगभग एक-तिहाई लेबलिंग दावे का अनुपालन नहीं किया गया था या उनमें पर्याप्त नियामकीय प्रमाणन का अभाव था।

शहद, घी, खाद्य तेल और चाय जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों में गैर-अनुपालन का स्तर अधिक देखा गया जबकि पौधे-आधारित पेय, पैक्ड स्नैक्स और रेडी-टू-ईट भोजन सहित नई श्रेणियों में भी महत्वपूर्ण कमियां दिखाई दीं।

निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीय घरों में आमतौर पर पाए जाने वाले उत्पाद सबसे अधिक प्रभावित हैं। अध्ययन के अनुसार, शहद पर 80 फीसदी, घी पर 65.5 फीसदी, चाय और हर्बल इन्फ्यूजन पर 54.3 फीसदी और खाद्य तेलों पर 52.9 फीसदी स्वास्थ्य दावे अनुपालन जांच में विफल रहे।

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First Published - February 10, 2026 | 11:03 PM IST

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