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India-US Trade Deal: क्या सस्ती होंगी विदेशी दालें? सरकार कुछ दालों पर टैक्स घटाने की तैयारी में

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भारत अपने कुल दलहन आयात का 8 से 12 प्रतिशत अमेरिका से खरीदता है, जो नीतिगत स्थिति पर निर्भर है

Last Updated- February 10, 2026 | 10:14 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेंस विद सॉल्यूबल्स (डीडीजीएस)  और सोयाबीन तेल के बाद दलहन को लेकर भारत में विरोध बढ़ सकता है। सोमवार को देर रात जारी फैक्टशीट में उल्लेख किया गया है कि अन्य वस्तुओं के अलावा ‘कुछ दालों’ पर भारत कर कम कर सकता है।

हालांकि अंतरिम ढांचे में उल्लिखित वस्तुओं में दलहन शामिल नहीं था और फैक्ट शीट में भी यह साफ नहीं किया गया है कि किस दलहन को शामिल किया जाएगा, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अमेरिका मसूर और मटर पर शून्य आयात शुल्क के लिए दबाव बना रहा है।

अमेरिका में ज्यादातर सूखे हरे मसूर का उत्पादन होता है। इनकी कीमत मसूर की अन्य किस्मों की तुलना में अधिक है, जिन्हें भारत हर साल विभिन्न देशों से आयात करता है।

भारत अपने कुल दलहन आयात का 8 से 12 प्रतिशत अमेरिका से खरीदता है, जो नीतिगत स्थिति पर निर्भर है। 2024 में अमेरिका ने भारत को करीब 7.4 से 7.6 करोड़ डॉलर के दलहन की बिक्री की थी और वह मेक्सिको, कनाडा और यूरोपीय संघ के बाद चौथा बड़ा विक्रेता बन गया।

अमेरिका के मोंटाना प्रांत के 2 प्रमुख रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के केविन क्रेमर ने राष्ट्रपति ट्रंप को कुछ सप्ताह पहले लिखे पत्र में भारत से व्यापार समझौते में दलहन के लिए अनुकूल प्रावधान का आग्रह किया था।

उन्होंने खासकर 30 दिसंबर, 2025 को भारत द्वारा 1 नवंबर से प्रभावी पीली मटर पर लगाए गए 30 प्रतिशत आयात शुल्क का मसला उठाया था। सीनेटरों के पत्र से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिकी दाल के निर्यात में भारत प्रमुख आयातक नहीं है।  2015 में भारत ने अमेरिका से लगभग 13.619 करोड़ डॉलर की दालों का आयात किया था और अमेरिकी दालों का शीर्ष खरीदार बन गया। 2016 में भी 14.216 करोड़ डॉलर के आयात के साथ यह स्थिति बरकरार रखी। 

बाद के वर्षों में भारत ने कनाडा, मेक्सिको और यूरोपीय संघ से दलहन खरीद बढ़ा दी, जिसकी वजह कीमतें, अन्य स्रोतों से आसान उपलब्धता और काबुली चना जैसी किस्मों के घरेलू उत्पादन में वृद्धि शामिल है।  यूएसडीए के आंकड़ों से पता चला है कि 2021 से 2023 के बीच अमेरिका से दालें खरीदने वाले देशों की सूची में भारत नौवें स्थान पर खिसक गया। भारत बड़े पैमाने पर कनाडा, रूस, म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और यहां तक कि मोजाम्बिक से दाल मंगा रहा है, जबकि अमेरिका से आयात बढ़ा है, लेकिन अन्य देशों की तुलना में अभी भी कम है।

अमेरिका के कृषि विभाग की राष्ट्रीय कृषि सांख्यिकी सेवा व यूएस ड्राई पी ऐंड लेंटिल काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2024 में दलहन का रकबा और अनुमानित उत्पादन क्रमशः 24 लाख एकड़ और लगभग 16 लाख टन था। अमेरिका में दलहन का उत्पादन बढ़ रहा है और अमेरिका उसके लिए बाजार की तलाश कर रहा है।

विरोध ही एकमात्र उपाय

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि संगठन गांवों में इसके विरोध में प्रदर्शन करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर किसानों के हितों की रक्षा करने के बारे में झूठ बोलने का आरोप भी लगाया। टिकैत ने वर्तमान स्थिति की तुलना 1992 की स्थिति से की, जो भारत द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को खोले जाने के तुरंत बाद का समय था।

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First Published - February 10, 2026 | 10:14 PM IST

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