ईरान युद्ध ने दिखाया आईना: भारत को ऊर्जा निर्भरता पर फिर से करना होगा गंभीर मंथन
ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध का नतीजा जो भी हो और भले ही यह लड़ाई आने वाले कुछ दिनों या सप्ताहों में खत्म हो जाए, मगर एक बात तो तय है कि भारत को अब अपनी ऊर्जा निर्भरताओं पर नए सिरे से गंभीरता से विचार करना होगा। अन्य क्षेत्रों पर निर्भरता भी जरूरी है मगर ऊर्जा […]
युद्ध के लिए अर्थव्यवस्था तैयार करना: भारत को संघर्ष-प्रधान दुनिया के लिए अनुकूल होना होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सितंबर 2022 में शांघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के समरकंद शिखर सम्मेलन के दौरान दिया गया बयान समय के साथ सही साबित नहीं हुआ है। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था, ‘मुझे पता है कि आज का दौर युद्ध का नहीं है।’ यह बयान यूक्रेन […]
भारत की व्यापारिक उपलब्धियों और बजट के बाद अब हो असल मुद्दों पर बात
पिछले कुछ दिनों में जो घटनाक्रम हुए हैं उनसे ऐसा लगता है कि अर्थशास्त्र में एक सप्ताह उतना ही लंबा समय होता है जितना राजनीति में। इसकी शुरुआत भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ‘सभी व्यापार करार की जननी’ की घोषणा के साथ हुई और इसके दो दिन बाद भारत में अब तक की […]
अमेरिका-यूरोप व्यापार समझौतों पर छाए बादल, भारत संभावित चुनौतियों के लिए तैयार
भारतीय अधिकारी समय-समय पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते की संभावना जताते रहते हैं। विदेश मंत्रालय की एक ब्रीफिंग में कुछ महीने पहले कहा गया था कि दोनों समझौतों की दिशा में इस इरादे से आगे बढ़ा जा रहा है कि निष्पक्ष, संतुलित और साझा […]
बड़े बैंक चाहिए या अधिक फुर्तीले बैंक? तकनीकी बदलाव के बीच बदलाव के लिए तैयार सेक्टर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ इस बारे में चर्चा कर रही है कि विलय की पिछली प्रक्रिया में बाकी रह गए छह सरकारी बैंकों का समेकन किया जाए। इन बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया जैसा बड़ा बैंक भी शामिल है और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, […]
आज की दुनिया में ट्रंप का जी2 सपना महज कागजी, वैश्विक प्रभाव से रहित
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपनी हालिया बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दो महाशक्तियों (जी2) के नेतृत्व वाली एक नई विश्व व्यवस्था की संभावना जताई। उनका कहना यह था कि ये दो महाशक्तियां मिलकर दुनिया पर राज कर सकती हैं और यह तय कर सकती हैं कि सभी के लिए क्या […]
विकास के लिए जरूरी: भारत के अरबपतियों का निवेश और लाखपतियों की वापसी
अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने और दो अंतहीन युद्धों (यूक्रेन और गाजा में) के बाद व्यापार, निवेश और सुरक्षा के लिए बाहरी हालात बिगड़ गए हैं। इन परिस्थितियों के बीच भारत को विकास और रोजगार के अवसर तैयार करने होंगे। इसकी तत्काल जरूरत इसलिए भी आन पड़ी है क्योंकि निर्यात जल्द संभलने […]
कॉरपोरेट जगत को नहीं बनाया जाना चाहिए निशाना, भरोसा ही उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेगा
भारतीय कारोबारी जगत ने कई नाकामियों का सामना किया है, इसके बावजूद एक बात जो नहीं होनी चाहिए वह है राजनीतिक दलों या बुद्धिजीवियों द्वारा उन पर कीचड़ उछालना या उन्हें गलत ठहराना। जब बड़े राजनेता उन पर हमला करते हैं (इस समय राहुल गांधी और अतीत में अरविंद केजरीवाल ऐसा कर चुके हैं) तो […]
भारत की कूटनीति को दिखावे से आगे बढ़कर ठोस नीतियों पर ध्यान देना होगा
भारत एक ऐसा देश है जो जल्दी ही जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है और शायद इस दशक के अंत तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। परंतु कूटनीति के मामले में हम अपनी क्षमता से कमतर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी को जहां दुनिया के उभरते नेता के […]
वोडाफोन संकट: ठोस उपायों की दरकार, विचारधारा की नहीं
राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज जब ज्यादा से ज्यादा पेचीदा और विविधता भरे होते जा रहे हैं तब नीति निर्माण के लिए वैचारिक चश्मे के इस्तेमाल का खास फायदा नहीं रह गया है। आज दुनिया के किसी भी देश को पूंजीवादी या साम्यवादी नहीं कहा जा सकता क्योंकि कोई भी देश इनकी मूल परिभाषा पर खरा […]









