जेनज़ी नहीं, नाराज अभिजात वर्ग बन रहा नए राजनीतिक असंतोष का सबसे बड़ा चेहरा
जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित मीम्स से भरे युवाओं के विरोध प्रदर्शन में एक नारे ने मेरा ध्यान खास तौर से आकर्षित किया-‘हालात इतने खराब हैं कि अब साधन-संपन्न लोग भी यहां आ गए हैं।’ दरअसल यही वह संकेत है जिसे हम बड़े पैमाने पर समझने से चूक गए हैं। राष्ट्रीय […]
तकनीकी सामंतवाद का खतरा: क्या अब देशों की सरकारों से भी ताकतवर हो रही हैं कॉरपोरेट कंपनियां?
जैसे-जैसे दुनिया अलग-अलग देशों के छोटे और संकरे गुटों में बंटती जा रही है, यह खतरा खड़ा हो गया है कि राज्य से परे कॉरपोरेट हित वैश्विक निर्णयों पर हावी होने लगेंगे। कई तरह के व्यवधानों के इस दौर में प्रौद्योगिकी पर संप्रभु नियंत्रण और ऐसी भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण का चलन है, जिन […]
सुधारों में देरी यानी सुधारों से इनकार, अब रोजमर्रा का हिस्सा बनें सुधार
भारत आर्थिक अवसर गंवाने के मामले में विश्व चैंपियन है। स्वतंत्रता के बाद हमने मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल अपनाया, जबकि औपनिवेशिक काल के बाद विकास कर रहे अन्य देश पूंजीवादी व्यवस्था की ओर बढ़ रहे थे। जिस समय जापान और एशियाई दिग्गज विनिर्माण तथा निर्यात में एक दूसरे को टक्कर देने की क्षमता तैयार करने […]
श्रम आय को नहीं, तो पूंजीगत लाभ को भी विशेष कर रियायत क्यों?
गत सप्ताह ईलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सूचीबद्धता के साथ ही दुनिया को पहला ट्रिलिनेयर मिल गया और कंपनी का मूल्यांकन दो लाख करोड़ डॉलर के पार हो गया। ऐसा उस कंपनी के साथ हुआ जिसने 2025 में 19 अरब डॉलर से कम का राजस्व हासिल किया और जिसे 4.9 अरब डॉलर का शुद्ध […]
AI में पीछे होने का भारत को मिल सकता है फायदा, बाजार के जोखिम से बचने की उम्मीद
अक्सर लोग यह सवाल उठाते हैं कि क्या भारत आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की दौड़ में पिछड़ गया है। यह सवाल खासकर वे लोग अधिक उठा रहे हैं जो मोदी सरकार को नापसंद करते हैं। इसका जवाब ‘हां’ और ‘नहीं’ दोनों ही है। ‘हां’ इसलिए कि भारत के कारोबार एवं शेयर बाजार इस ताबड़तोड़ तेजी का […]
मितव्ययिता सही पर उससे ज्यादा असरदार होंगे सुधार, 10 गुना से ज्यादा बचत संभव
ईंधन कीमतों पर बढ़ते दबाव तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लग रहे झटकों के बीच प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों मितव्ययिता का जो आह्वान किया था उसको गलत ठहराना मुश्किल है। अन्य चीजों के अलावा उन्होंने नागरिकों से कहा था कि वे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें। उन्होंने किसानों से […]
भारत में तेजी से बदलते रोजगार परिदृश्य पर नीति निर्माताओं को देना होगा ध्यान
बड़े चुनावों से पहले अक्सर जनता की नब्ज टटोलने के लिए सर्वेक्षण कराए जाते हैं। इन सभी सर्वेक्षणों में मोटे तौर पर यह निकल कर आता है कि बेरोजगारी मतदाताओं के लिए सबसे अहम मुद्दों में एक है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि अधिकांश राजनीतिक दल सत्ता में आने पर बड़े पैमाने पर रोजगार […]
अमेरिका-चीन के वर्चस्व को चुनौती: मध्यम शक्तियों का नया गठबंधन ‘R7’ बदल देगा दुनिया!
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष अब वैश्विक भू-राजनीति में गहरी दरारें पैदा कर रहा है। यूरोपीय संघ (ईयू) और जापान ने पश्चिम एशिया में हो रहे इस संघर्ष में शामिल होने से इनकार कर दिया है, खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री मार्गों की सुरक्षा के मुद्दे पर जहां ईरान ने कुछ […]
ईरान युद्ध ने दिखाया आईना: भारत को ऊर्जा निर्भरता पर फिर से करना होगा गंभीर मंथन
ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध का नतीजा जो भी हो और भले ही यह लड़ाई आने वाले कुछ दिनों या सप्ताहों में खत्म हो जाए, मगर एक बात तो तय है कि भारत को अब अपनी ऊर्जा निर्भरताओं पर नए सिरे से गंभीरता से विचार करना होगा। अन्य क्षेत्रों पर निर्भरता भी जरूरी है मगर ऊर्जा […]
युद्ध के लिए अर्थव्यवस्था तैयार करना: भारत को संघर्ष-प्रधान दुनिया के लिए अनुकूल होना होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सितंबर 2022 में शांघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के समरकंद शिखर सम्मेलन के दौरान दिया गया बयान समय के साथ सही साबित नहीं हुआ है। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था, ‘मुझे पता है कि आज का दौर युद्ध का नहीं है।’ यह बयान यूक्रेन […]









