पश्चिम में जीवन: आधी हकीकत आधा फसाना
अरमान और उनसे जन्मे स्वप्न बहुत विचित्र होते हैं। वे इंसान को मुश्किल और कई बार तो असंभव या अवांछित काम करने के लिए कहते हैं चाहे लक्ष्य हकीकत से कोसों दूर मरीचिका की तरह ही क्यों न हो। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अवैध भारतीय प्रवासियों को हथकड़ी-बेड़ी में जकड़कर सेना के जहाज से […]
ट्रंप के फैसलों से मची उथल-पुथल के फायदे
सफेद आलीशान इमारत में रहने वाला 78 साल का एक व्यक्ति अपने देश और पूरी दुनिया को झटके दे रहा है। यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप है। पद संभालने के बाद पखवाड़े भर बाद ट्रंप अमेरिका में अवैध तरीके से रहने वाले हजारों लोगों को रोजाना उनके देश भेज […]
आगामी बजट में रक्षा क्षेत्र पर हो विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास इस बार पहले जैसा या एक ही लीक पर चलने वाला बजट पेश करने का विकल्प नहीं है। वृद्धि, रोजगार, बुनियादी ढांचे और राजकोषीय संतुलन पर जोर तो हमेशा ही बना रहेगा मगर 2025-26 के बजट में उस पर ध्यान देने की जरूरत है, जिसे […]
प्रजनन दर बढ़ाए बिना कैसे हल हो आबादी का सवाल?
जब से राजनेताओं और बुद्धिजीवियों ने इस सत्य को समझा है कि ‘जनांकिकी ही नियति है’, तब से वे जनसंख्या को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। यूरोप और अमेरिका में उन्होंने अवैध प्रवासियों का आगमन रोककर ऐसा करने का प्रयास किया क्योंकि प्रवासियों के कारण उनकी जनांकिकी बिगड़ रही है। भारत में हम […]
निराश करता अर्थशास्त्र का नोबेल सम्मान
इस वर्ष अर्थशास्त्र का नोबेल पाने वाले तीनों विद्वानों ने शायद ही ऐसा कुछ बताया, जो हम पहले से नहीं जानते थे। मगर जो उन्होंने नहीं बताया वह बहुत ज्यादा है। बता रहे हैं आर जगन्नाथन कई बार प्रतिष्ठित पुरस्कार किसी को न देना ही सही होता है, खास तौर पर तब जब दावेदार तय […]
GST सुधार: बेहतर बनाम आदर्श का द्वंद्व और भारत के लिए सही रास्ता
सुधार का काम कभी पूरा नहीं होता। पिछले महीने अर्थशास्त्री एम गोविंद राव ने इसी समाचार पत्र में प्रकाशित आलेख में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधार की दिशा और समय के बारे में ठोस तर्क दिए थे। उन्होंने कहा था कि अब बड़े सुधारों का वक्त आ चुका है क्योंकि अर्थव्यवस्था वैश्विक प्रतिकूलताओं […]
आव्रजन से जुड़े कठिन विषयों पर चर्चा जरूरी
विश्व में आव्रजन (immigration) की बढ़ती घटनाएं और उनके कारण हो रहे जनांकिकीय बदलाव चिंता का विषय हैं। निष्पक्ष दिखने के फेर में हमें इन पर बातचीत करने से बचना नहीं चाहिए। बता रहे हैं आर जगन्नाथन वास्तव में मुक्त समाज वे होते हैं जो वास्तविक मानवीय चिंताओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर बंदिश लगाकर, कथित […]
आरक्षण नहीं, समान अवसर पैदा करने से बनेगी बात; राहुल गांधी का दांव भी कांग्रेस के लिए बन सकता है मुसीबत
भारत एक कुत्सित शिक्षा एवं रोजगार कोटा व्यवस्था अपनाने की दहलीज पर खड़ा है। असंवेदनशील राजनीति एवं न्यायिक हस्तक्षेप सहित कई कारणों से भारत इस गुत्थी में उलझता जा रहा है। क्षेत्रीय राजनीतिज्ञ और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत में जाति आधारित जनगणना कराए जाने पर जोर दे रहे हैं, वहीं उच्चतम न्यायालय ने आरक्षण […]
डॉलर की कमजोरी और भारत की तैयारी
अमेरिका के कमजोर राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व के कारण आगे चलकर डॉलर की कीमत में निश्चित गिरावट आएगी। भारत को इसके असर से बचने के लिए कदम उठाने होंगे। बता रहे हैं आर जगन्नाथन नरेंद्र मोदी सरकार ने अगले दो वर्षों में भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने तथा 2029 के पहले […]
आम चुनाव में जीत की गारंटी कभी थी ही नहीं
वर्ष 2024 के आम चुनाव में मोदी की संभावित जीत को लेकर कई आलेख और यहां तक कि किताबें भी लिखी गईं। यह सब चुनाव होने के पहले हुआ और अब हम कह सकते हैं कि ऐसे दावे करने वाले काफी हद तक गलत थे। देश में जिस हद तक सामाजिक और आर्थिक समस्याएं व्याप्त […]









