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लेखक : आर जगन्नाथन

आज का अखबार, लेख

बिगड़ते माहौल में भारत के रक्षा क्षेत्र की दुविधाएं 

कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, भारत को एक कठोर वास्तविकता का सामना करना पड़ रहा है। भले ही हमने वह हासिल कर लिया जो करने का लक्ष्य रखा था, यानी पाकिस्तान आतंकवाद की भारी कीमत चुकाए लेकिन हमारे नीचे की जमीन भी खिसकी है। चीन ने अब […]

आज का अखबार, लेख

जाति जनगणना और जातीय पहचान

विक्टर ह्यूगो का एक मशूहर कथन है- ‘उस विचार को कोई नहीं रोक सकता है जिसका वक्त आ चुका हो।’ इस कथन के साथ दिक्कत यह है कि यह हमें इसके आगे की बात नहीं बताता। कोई विचार अगर एक बार आजमाने के बाद उतना अच्छा नहीं साबित होता तब? यह भी कि किसी बुरे […]

आज का अखबार, लेख

राजनीति और सत्ता का स्थानीयकरण जरूरी

ट्रंप के दौर में मची उथलपुथल ने हर देश को यह देखने का मौका दिया है कि उसकी आर्थिक नीतियां और सुधार अब भी सार्थक हैं या नहीं। कई टीकाकारों ने सरकार से अपनी संरक्षणवादी मानसिकता पर दोबारा विचार करने और कम शुल्क तथा अधिक होड़ के लिए तैयार रहने का आग्रह किया है। इस […]

आज का अखबार, लेख

पश्चिम में जीवन: आधी हकीकत आधा फसाना

अरमान और उनसे जन्मे स्वप्न बहुत विचित्र होते हैं। वे इंसान को मुश्किल और कई बार तो असंभव या अवांछित काम करने के लिए कहते हैं चाहे लक्ष्य हकीकत से कोसों दूर मरीचिका की तरह ही क्यों न हो। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अवैध भारतीय प्रवासियों को हथकड़ी-बेड़ी में जकड़कर सेना के जहाज से […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप के फैसलों से मची उथल-पुथल के फायदे

सफेद आलीशान इमारत में रहने वाला 78 साल का एक व्यक्ति अपने देश और पूरी दुनिया को झटके दे रहा है। यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप है। पद संभालने के बाद पखवाड़े भर बाद ट्रंप अमेरिका में अवैध तरीके से रहने वाले हजारों लोगों को रोजाना उनके देश भेज […]

आज का अखबार, बजट, लेख

आगामी बजट में रक्षा क्षेत्र पर हो विशेष ध्यान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास इस बार पहले जैसा या एक ही लीक पर चलने वाला बजट पेश करने का विकल्प नहीं है। वृद्धि, रोजगार, बुनियादी ढांचे और राजकोषीय संतुलन पर जोर तो हमेशा ही बना रहेगा मगर 2025-26 के बजट में उस पर ध्यान देने की जरूरत है, जिसे […]

आज का अखबार, लेख

प्रजनन दर बढ़ाए बिना कैसे हल हो आबादी का सवाल?

जब से राजनेताओं और बुद्धिजीवियों ने इस सत्य को समझा है कि ‘जनांकिकी ही नियति है’, तब से वे जनसंख्या को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। यूरोप और अमेरिका में उन्होंने अवैध प्रवासियों का आगमन रोककर ऐसा करने का प्रयास किया क्योंकि प्रवासियों के कारण उनकी जनांकिकी बिगड़ रही है। भारत में हम […]

आज का अखबार, लेख

निराश करता अर्थशास्त्र का नोबेल सम्मान

इस वर्ष अर्थशास्त्र का नोबेल पाने वाले तीनों विद्वानों ने शायद ही ऐसा कुछ बताया, जो हम पहले से नहीं जानते थे। मगर जो उन्होंने नहीं बताया वह बहुत ज्यादा है। बता रहे हैं आर जगन्नाथन कई बार प्रतिष्ठित पुरस्कार किसी को न देना ही सही होता है, खास तौर पर तब जब दावेदार तय […]

आज का अखबार, लेख

GST सुधार: बेहतर बनाम आदर्श का द्वंद्व और भारत के लिए सही रास्ता

सुधार का काम कभी पूरा नहीं होता। पिछले महीने अर्थशास्त्री एम गोविंद राव ने इसी समाचार पत्र में प्रकाशित आलेख में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधार की दिशा और समय के बारे में ठोस तर्क दिए थे। उन्होंने कहा था कि अब बड़े सुधारों का वक्त आ चुका है क्योंकि अर्थव्यवस्था वैश्विक प्रतिकूलताओं […]

आज का अखबार, लेख

आव्रजन से जुड़े कठिन विषयों पर चर्चा जरूरी

विश्व में आव्रजन (immigration) की बढ़ती घटनाएं और उनके कारण हो रहे जनांकिकीय बदलाव चिंता का विषय हैं। निष्पक्ष दिखने के फेर में हमें इन पर बातचीत करने से बचना नहीं चाहिए। बता रहे हैं आर जगन्नाथन वास्तव में मुक्त समाज वे होते हैं जो वास्तविक मानवीय चिंताओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर बंदिश लगाकर, कथित […]

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