भारत के एयरलाइन मार्केट में बड़ा उलटफेर हुआ है। जुलाई से सितंबर 2025 के तिमाही में इंडिगो ने पहली बार एयर इंडिया ग्रुप को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में पीछे छोड़ दिया। DGCA के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान इंडिगो ने 4.14 मिलियन यानी 41.4 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को ढोया, जबकि एयर इंडिया ग्रुप ने कुल 4.10 मिलियन यात्री ले जाए। फर्क बहुत कम था, लेकिन इंडिगो आगे निकल गया है।
एयर इंडिया ने अकेले 2.38 मिलियन यात्री ढोए, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 1.72 मिलियन यात्रियों को गंतव्य स्थान तक पहुंचाया। मतलब इंडिगो ने टाटा ग्रुप की दोनों एयरलाइंस को अलग-अलग और मिलाकर भी मात दे दी। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पिछले छह साल में ऐसा पहली बार हुआ है।
एयर इंडिया की मुश्किलों का असर साफ दिख रहा है। अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास बोइंग 787 विमान के क्रैश होने से 260 लोगों की जान गई थी। इसके बाद एयरलाइन ने अपनी अंतरराष्ट्रीय वाइडबॉडी उड़ानों को 15 फीसदी तक कम कर दिया। पुराने विमानों को केबिन अपग्रेड के लिए बार-बार सर्विस से बाहर रखा जा रहा है। ऊपर से बोइंग और एयरबस से नए प्लेन की डिलीवरी में सप्लाई चेन की दिक्कतों से देरी हो रही है। इन सबकी वजह से एयर इंडिया पूरी क्षमता से उड़ान नहीं भर पा रही।
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बाकी भारतीय एयरलाइंस काफी पीछे रहीं। स्पाइसजेट ने सिर्फ 0.31 मिलियन यानी 3.1 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री ढोए, जबकि अकासा एयर ने महज 0.21 मिलियन।
ग्लोबल एविएशन एनालिटिक्स कंपनी सिरियम के ताजा डेटा से पता चलता है कि इस विंटर सीजन (अक्टूबर से मार्च) में भी इंडिगो ने एयर इंडिया ग्रुप को पीछे छोड़ दिया है। शेड्यूल्ड उड़ानों और सीटों दोनों में इंडिगो नंबर वन है।
इंडिगो ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 14.5 फीसदी बढ़ाया है। 26 अक्टूबर से 27 मार्च तक 44,035 उड़ानें प्लान की हैं, जबकि पिछले विंटर में 38,481 थीं। दूसरी तरफ एयर इंडिया ग्रुप ने अपनी उड़ानें 9 फीसदी से ज्यादा घटा दीं – पिछले साल 45,958 से इस बार 41,626 रह गईं।
हालांकि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से अप्रूव्ड ये नंबर बदल भी सकते हैं। साथ ही मिनिस्ट्री ने इंडिगो को अपनी उड़ानें 10 फीसदी कम करने का निर्देश दिया है ताकि ऑपरेशन स्थिर रहें।
दिसंबर के पहले दस दिनों में इंडिगो को भारी दिक्कतें आईं। नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों की वजह से पायलट रोस्टर मैनेज करना मुश्किल हो गया। 1 से 9 दिसंबर के बीच 4,200 से ज्यादा उड़ानें कैंसल करनी पड़ीं। इस दौरान कुल 17,404 घरेलू उड़ानों में से 25 फीसदी कैंसल हुईं, लेकिन 2,702 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सिर्फ 2.4 फीसदी ही रद्द हुईं। यानी अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन को इंडिगो ने काफी हद तक बचा कर रखा।