केंद्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में उड़ानों में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के मामले में उसने इंडिगो पर 22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और एयरलाइन को वरिष्ठ उपाध्यक्ष को परिचालन से हटाने का निर्देश दिया है।
नियामक ने शनिवार को एक बयान में एयरलाइन के मुख्य कार्याधिकारी को फ्लाइट ऑपरेशंस और क्राइसिस मैनेजमेंट की अपर्याप्त निगरानी पर चेतावनी जारी की थी। यह चेतावनी अकाउंटेबल मैनेजर (सीओओ) को विंटर शेड्यूल 2025 और संशोधित एफडीटीएल सीएआर के असर का आकलन करने में नाकाम रहने के लिए जारी की गई, क्योंकि इससे उड़ानों में बड़े पैमाने पर बाधा पहुंची।
सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट (ओसीसी) को व्यवस्थागत नियोजन में नाकाम रहने और संशोधित एफडीटीएल नियमों को लागू करने में देरी पर भी चेतावनी दी, साथ ही उन्हें सभी परिचालन संबंधित जिम्मेदारियों से मुक्त करने और कोई भी जिम्मेदार भूमिका न दिए जाने का भी निर्देश दिया।
परिचालन, निगरानी, मानव श्रम नियोजन और रोस्टर मैनेजमेंट में कमियों के लिए फ्लाइट ऑपरेशंस के डिप्टी हेड, क्रू रिसोर्स प्लानिंग के एवीपी और फ्लाइट ऑपरेशंस के निदेशक को भी चेतावनी जारी की गई। इंडिगो को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी अंदरूनी जांच में पहचाने गए किसी भी दूसरे कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करे और डीजीसीए को इस संबंध में अनुपालना रिपोर्ट पेश करे।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने गुरुवार को कोर्ट को बताया कि सुधार के उपायों का पालन सुनिश्चित करने और लंबे समय तक व्यवस्थागत अनुपालन के लिए एयरलाइन से कहा गया है कि वह एयरलाइन नियामक को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी दे। उन्होंने यह भी बताया कि एयरलाइन के दूसरे अधिकारियों को भी चेतावनियां जारी की गई हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया के खंडपीठ को इस संबंध में जानकारी दी गई थी। इस खंडपीठ में उड़ानों में हुए व्यवधानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है। सरकार ने सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट भी अदालत में पेश की।
संक्षिप्त सुनवाई के बाद अदालत ने दो सप्ताह के अंदर रिकॉर्ड पर हलफनामे के जरिये केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।
अधिवक्ता अखिल राणा और उत्कर्ष शर्मा की यह याचिका इंडिगो द्वारा 3 से 5 दिसंबर के बीच उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द करने और देरी से संबंधित है। इस अवधि के दौरान एयरलाइन ने 2,507 उड़ानों को रद्द कर दिया और अन्य 1,852 में विलंब हुआ, जिससे हवाई अड्डों पर भीड़भाड़ हो गई और बड़ी संख्या में यात्री फंसे रहे।
एयरलाइन पायलटों की कमी और संशोधित उड़ान ड्यूटी टाइम लिमिटेशन मानदंडों को लागू करने में चूक से प्रभावित हुई थी।