जनरल अटलांटिक ने आज ऐलान किया कि उसने बालाजी वेफर्स में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए पक्का समझौता किया है। लेकिन इस सौदे की राशि की जानकारी नहीं दी गई है। मामले के जानकार सूत्र के अनुसार बालाजी वेफर्स ने 2,050 करोड़ रुपये में 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर सहमति जताई है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जनरल अटलांटिक के निवेश से कंपनी बालाजी वेफर्स में प्रमुख कॉर्पोरेट कार्यों को और मजबूत करने तथा नवाचार में तेजी पर ध्यान देगी। इसमें यह भी कहा गया है कि खान-पान और उपभोक्ता क्षेत्र में जनरल अटलांटिक की वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए कंपनी पूरे भारत में विस्तार में तेजी की योजना बना रही है।
बालाजी वेफर्स की स्थापना साल 1981 में विरानी परिवार ने की थी और यह घर से चलने वाले उद्यम से बढ़कर देश के सबसे बड़े पैकेटबंद स्नैक ब्रांडों में से एक बन गया है। गुजरात से अपनी यात्रा शुरू करके उसने अपने परिचालन का विस्तार किया है और वह देश के कई राज्यों में प्रमुख कंपनी बन गई है। वह दुनिया भर में लगभग 25 देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है।
बालाजी वेफर्स के संस्थापक और चेयरमैन चंदूभाई विरानी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘यह साझेदारी हमारी यात्रा में बड़ी उपलब्धि है। उपभोक्ता कारोबारों की जनरल अटलांटिक की गहरी समझ, संस्थापक परिवारों के साथ काम करने के पिछले प्रदर्शन और मूल्य सृजन के प्रति दीर्घकालिक दृष्टिकोण बालाजी वेफर्स के लिए हमारे सपने के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है।’
इंटेंसिव फिस्कल सर्विसेज ने बालाजी वेफर्स के लिए विशेष सलाहकार के रूप में काम किया। यह लेनदेन पारंपरिक नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर होगा और उम्मीद है कि साल 2026 के उतरार्ध में पूरा हो जाएगा।