facebookmetapixel
Advertisement
‘आने वाला है बड़ा झटका, ईंधन की बढ़ती कीमतों से मचेगी खलबली’, बोले उदय कोटक: हमें तैयार रहने की जरूरतआर्थिक अनुमानों में विरोधाभास! क्या वाकई सुरक्षित है भारत का ‘मिडिल क्लास’ और घरेलू बजट?Q4 Results: डॉ. रेड्डीज, टॉरंट पावर से लेकर बर्जर पेंट्स तक, किस कंपनी का Q4 में कैसा रहा हाल?PM Modi Europe Visit: हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर पर रहेगा फोकस, नॉर्डिक समिट पर टिकीं सबकी नजरेंEditorial: राजकोषीय घाटा 5% तक पहुंचने की आशंका, पटरी से उतर सकता है देश का बजटRBI की नीतियों में कहां रह गई कमी? पेमेंट और क्षेत्रीय बैंकों के फेल होने के पीछे ‘डिजाइन’ दोषीरुपये में एतिहासिक गिरावट! पहली बार 95.75 के पार पहुंचा डॉलर, आम आदमी पर बढ़ेगा महंगाई का बोझIT कंपनियों ने निवेशकों पर लुटाया प्यार! AI के खतरों के बीच FY26 में दिया ₹1.3 लाख करोड़ का डिविडेंड और बायबैकन्यायपालिका में होगा बड़ा बदलाव! बुनियादी ढांचे के लिए ₹50,000 करोड़ के आवंटन की तैयारी में CJIPM Modi UAE Visit: होर्मुज संकट के बीच फुजैरा पर भारत की नजर, PM के दौरे में इसपर सबसे ज्यादा फोकस

बैंकर्स का दावा: डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरती कीमत के चलते RBI ले सकता है बड़ा फैसला

Advertisement

बाजार में डॉलर और अन्य फ्लो का प्रभुत्व इतना बढ़ गया है कि रुपया एशियाई करेंसी के रोजाना उतार-चढ़ाव से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहा

Last Updated- December 16, 2025 | 8:32 PM IST
Rupee
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रुपया पिछले एक महीने से करीब 2.5 फीसदी की गिरावट के साथ लगातार नीचे की ओर सरक रहा है। चाहे एशियाई बाजारों में हलचल कैसी भी हो, रुपया बार-बार नए रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंचता रहा। इस वजह से बैंकिंग सर्किल में अब केंद्रीय बैंक, RBI से अधिक कड़ा एक्शन उठाने की उम्मीद बढ़ गई है। रुपए की यह कमजोरी डॉलर के फ्लो में असंतुलन, अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील न होने और निवेशकों की सतर्कता से बढ़ी है। इंपोर्ट करने वाले लोग पहले से ही हेजिंग कर रहे हैं और विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में सतर्क बने हुए हैं, जिससे मुद्रा पर निरंतर दबाव है।

रुपया अब एशियाई करेंसी के रोज़ाना उतार-चढ़ाव से भी कम प्रभावित हो रहा है। फ्लोज का प्रभुत्व इतना बढ़ गया है कि गिरावट की गति बढ़ती जा रही है। इसके चलते आगे और मूल्यह्रास (Depreciation) की संभावना और सट्टेबाजी भी बढ़ रही है। मंगलवार को रुपया पहली बार 91 के पार गिर गया, जो दिन भर में 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ दर्ज किया गया। इस दौरान थाई बात पिछले एक महीने में 3 फीसदी से अधिक मजबूत हुई, जबकि चीनी युआन, मलेशियन रिंगिट और सिंगापुर डॉलर कम से कम 1 फीसदी बढ़े। इससे रुपया अपने एशियाई साथियों की तुलना में कमजोर नजर आया।

Also Read: रुपया पहली बार 91 के पार, महज 5 सेशन में 1% टूटा; डॉलर के मुकाबले लगातार क्यों टूट रही भारतीय करेंसी

RBI पहले भी कर चुकी है कोशिश! 

इस साल रुपए की ऐसी ही कमजोरी के दौर में, जब मुद्रा एशियाई संकेतों से अलग कमजोर हुई और सट्टेबाजों की पोजीशन बनने लगी, RBI ने हस्तक्षेप किया था। उदाहरण के तौर पर, पिछले महीने दो बार स्पॉट और नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड मार्केट में RBI ने जोरदार तरीके से दखल दिया, ताकि गिरावट पर ब्रेक लगाया जा सके। अक्टूबर और फरवरी के शुरुआती दौर में भी ऐसा ही हुआ था।

एक बैंक अधिकारी ने कहा, “ये सामान्य इंटरवेंशन नहीं थे। RBI ने बड़े पैमाने पर आकर गिरावट को तोड़ा और बाजार में दो-तरफा ट्रेडिंग वापस लाया।”

अब फिर वैसी ही स्थिति बन रही है। रुपया लगातार नीचे जा रहा है, इसलिए बैंकिंग सर्किल के लोग मान रहे हैं कि RBI इसी तरह फिर से कदम उठा सकता है। एक सरकारी बैंक के ट्रेडर ने भी कहा कि बाजार में आगे गिरावट की उम्मीद बन रही है, इसलिए RBI के भारी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - December 16, 2025 | 4:36 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement