रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को फ्रांस से सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के अंतर्गत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लंबे समय से अटके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे पहले करीब 13 साल पहले भी ऐसा ही एक सौदा लगभग तय हो गया था, लेकिन आगे नहीं बढ़ पाया था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में कुल 3.60 लाख करोड़ रुपये के सैन्य साजो-सामान की कैपिटल एक्विजिशन को मंजूरी दी गई। इसका मकसद सशस्त्र बलों की युद्ध क्षमता को मजबूत करना है।
राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी ऐसे समय दी गई है जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों चार दिन बाद भारत दौरे पर आने वाले हैं। हालांकि, अंतिम समझौता (कॉन्ट्रैक्ट) इस साल के अंत से पहले होने की संभावना कम है। अब रक्षा मंत्रालय को डसॉल्ट एविएशन के साथ लागत और हथियार पैकेज की अन्य शर्तों पर बातचीत करनी होगी।
अप्रैल 2019 में भारतीय वायु सेना ने 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने के लिए रिक्वेस्ट ऑफ इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी की थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 18 अरब डॉलर बताई गई थी। इसे हाल के वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े रक्षा खरीद कार्यक्रमों में से एक माना गया था। इस मेगा प्रोजेक्ट में अन्य दावेदारों में लॉकहीड मार्टिन का F-21, बोइंग का F/A-18, और यूरोफाइटर टाइफून भी शामिल थे।
मंत्रालय की ओर से यह कदम ऐसे समय आया है जब भारतीय वायु सेना के फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 31 रह गई है, जबकि आधिकारिक मंजूरी के अनुसार यह संख्या 42 होनी चाहिए।
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करीब 13 साल पहले रक्षा मंत्रालय ने मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) की खरीद की तैयारी पूरी कर ली थी, लेकिन वह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद 2015 में मोदी सरकार ने भारतीय वायु सेना की घटती ताकत को देखते हुए फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार समझौते के तहत 36 राफेल विमानों की खरीद की घोषणा की थी। फिलहाल भारतीय वायु सेना इन 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है।