डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना हुआ है और आज यह गिरकर 92.64 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर आ गया। डीलरों ने कहा कि गुरुवार को बैंक अवकाश से पहले आयातकों द्वारा डॉलर की मांग और बढ़ते व्यापार घाटे की चिंता से रुपये पर दबाव है। रिजर्व बैंक को रुपये को 92.50 प्रति डॉलर के स्तर पर सहारा देते देखा गया है मगर रुपया आज इस मनोवैज्ञानिक स्तर पर को भी पार कर गया। डॉलर के मुकाबले रुपये में 0.28 फीसदी की गिरावट आई।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक और ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘कारोबार के अंतिम घंटे में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये को 92.50 का स्तर पार करने दिया। पश्चिम एशिया में युद्ध जारी है और तेल में तेजी बनी हुई है। ऐसे में तेल के दाम जब तक 80 डॉलर प्रति बैरल और उससे नीचे नहीं आ जाते भारत का चालू खाते का घाटा बढ़ता रहेगा।’
रुपया मंगलवार को 92.38 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। चालू वित्त वर्ष में यह 7.74 फीसदी कमजोर हुआ है। इस साल अब तक इसमें 2.98 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। मार्च में ही यह 1.79 फीसदी नीचे आ चुका है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘रुपया नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया क्योंकि 92.50 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे टूटने पर तेज बिकवाली हुई और बैंक अवकाश से पहले डॉलर की कम उपलब्धता से गिरावट और बढ़ गई।’
उन्होंने कहा, ‘मजबूत जोखिम भावना और कच्चे तेल में नरमी के बावजूद आयातकों द्वारा डॉलर की मांग से रुपये पर दबाव बढ़ा। भू-राजनीतिक तनावों के कारण व्यापक व्यापार घाटे की आशंका से भी रुपये में नरमी आई है।’
ब्रेंट क्रूड की कीमतें कारोबार के दौरान 101 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गईं थीं। डॉलर इंडेक्स भी लगभग अपरिवर्तित रहा। बाजार के भागीदारों ने कहा कि डीलरों की नजर अब फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत निर्णय पर होगी।
बाजार को उम्मीद है कि फेड ब्याज दर को 3.50-3.75 फीसदी के दायरे में अपरिवर्तित रखेगा। मुद्रा पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद सरकारी बॉन्ड अपेक्षाकृत स्थिर रहे। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड पिछले बंद स्तर 6.72 फीसदी की तुलना में 6.73 फीसदी पर बंद हुई।