भारत की कुछ चुनिंदा सरकारी एजेंसियों को एंथ्रोपिक के क्लॉड मिथोस तक सीमित पहुंच मिलने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि इनमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी), भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सर्ट-इन), नैशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) और दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) शामिल हैं।
सूत्रों ने कहा कि इन सरकारी विभागों को केंद्रीय और राज्य सरकारों के महत्त्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे में कमजोरियों की जांच करने के लिए शुरुआत में परीक्षण के तौर पर और बाद में पूरी तरह तैनाती के लिए सीमित पहुंच दी जा सकती है।
एक सूत्र ने कहा कि इन सरकारी एजेंसियों के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (आईटीएस) की कुछ भारतीय कंपनियों को भी क्लॉड मिथोस तक सीमित पहुंच प्रदान की जा सकती है बशर्ते वे आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर अत्याधुनिक तरीके से काम कर रहे इंजीनियरों और शोधकर्ताओं के साथ छोटी टीम बनाएं। इस संबंध में जानकारी के लिए एंथ्रोपिक को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
गृह मंत्रालय के अंतर्गत आई4सी साइबर अपराध से मुकाबले के लिए सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है। इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली सर्ट-इन भारतीय इंटरनेट की साइबर एवं डिजिटल सुरक्षा के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय के राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन के तहत काम करने वाला एनसीआईआईपीसी मुख्य तौर पर बिजली संयंत्रों, जिनमें परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी शामिल हैं, की डिजिटल एवं साइबर सुरक्षा पर काम करता है। दूरसंचार विभाग के तहत काम करने वाला डीआईपी दूरसंचार से संबंधित धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए एक अंतर एजेंसी समन्वय निकाय के रूप में कार्य करता है। इस सप्ताह की शुरुआत में कंपनी ने घोषणा की थी कि वह 15 देशों में 150 नए संगठनों के लिए अपनी साइबर सुरक्षा योजना प्रोजेक्ट ग्लासविंग का विस्तार कर रही है।
एंथ्रोपिक ने कहा, ‘समूह में कई ऐसे उद्योग शामिल हैं जो हमारे शुरुआती समूह में नहीं थे जैसे बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवा, संचार और हार्डवेयर। साथ ही कई नए वेंडर पार्टनर हैं जो ऐसी कंपनियां या गैर-लाभकारी संस्थाएं हैं जिनके कोडबेस पर दुनिया भर में कई सरकार एवं अन्य संगठन निर्भर हैं।’
क्लॉड मिथोस के विस्तार का यह कदम भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के संगठन नैसकॉम और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एंथ्रोपिक के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों के कुछ सप्ताह बाद उठाया गया है।
क्लॉड मिथोस को रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए तैनात करने संबंधी समाधान तलाशने के लिए एंथ्रोपिक ने इसी साल अप्रैल में एमेजॉन वेब सर्विसेज, ऐपल, ब्रॉडकॉम, सिस्को, क्राउडस्ट्राइक, गूगल, जेपी मॉर्गन चेस, लिनक्स फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और पालो ऑल्टो नेटवर्क्स जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों से हाथ मिलाया था।
प्रोजेक्ट ग्लासविंग की घोषणा सामान्य उद्देश्य वाले नवीनतम एआई मॉडल क्लॉड मिथोस को जारी करने के तुरंत बाद की गई थी। अप्रैल में प्रोजेक्ट ग्लासविंग की घोषणा करते हुए एंथ्रोपिक ने कहा था कि मिथोस प्रीव्यू ने हजारों बेहद गंभीर कमजोरियों का पहले ही पता लगाया है।