वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही राजस्व के लिहाज से तो मजबूत रहेगी, लेकिन मुनाफे पर कमजोर तिमाही साबित होगी। ब्रोकरेज कंपनियों ने यह अनुमान जताया है। वाहन क्षेत्र के ओईएम (मूल उपकरण विनिर्माताओं) का राजस्व पिछले साल के मुकाबले लगभग 22 से 29 प्रतिशत और वाहनों पुर्जा कंपनियों का राजस्व 17 से 21 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इस वृद्धि को वाहनों की व्यापक मांग, दाम वृद्धि, प्रीमियम वाहनों की ओर झुकाव, निर्यात तथा रुपये में गिरावट से मदद मिली है।
उद्योग की बिक्री के ब्रोकरेज कंपनियों के अनुमानों और ‘वाहन’ पर खुदरा बिक्री के पंजीकरण से जाहिर होता है कि यात्री वाहनों की बिक्री में 23 से 26 प्रतिशत, दोपहिया की बिक्री में 14 से 19 प्रतिशत और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 14 से 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यात्री वाहनों की बिक्री को एसयूवी, प्रीमियम मॉडल, नए मॉडलों की शुरुआत तथा छोटे कारों की मांग में सुधार से लाभ हुआ।
दूसरी ओर स्कूटरों ने मोटरसाइकलों को पीछे छोड़ दिया। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन अपनाने में तेजी आई। वाणिज्यिक वाहनों को रिप्लेसमेंट मांग (पुराने वाहनों के स्थान पर नए वाहन), बुनियादी ढांचे, खनन और ई-कॉमर्स गतिविधियों से बढ़ावा मिला। लेकिन डीजल की अधिक कीमतों और भू-राजनीतिक रुकावटों से बेड़े के इस्तेमाल पर असर पड़ा। ग्रामीण परिस्थितियों और जलाशय स्तरों के कारण ट्रैक्टरों की मांग बेहतर रही।
स्टील, एल्युमीनियम, तांबा, रबड़, कच्चे तेल से जुड़े इनपुट और ढुलाई की लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। इसलिए एबिटा वृद्धि राजस्व वृद्धि से कम रहने के आसार हैं। नुवामा का पूर्वानुमान है कि राजस्व में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी के मुकाबले कुल एबिटा वृद्धि 10 प्रतिशत रहेगी, जबकि पीएटी (कर के बाद लाभ) वृद्धि असमान तथा आम तौर पर राजस्व से धीमी रहने के आसार हैं। तिमाही के दौरान पश्चिम एशिया तनाव ने कुल निर्यात मांग को एकदम कम करने के बजाय निर्यात की लागत और उसे पूरा करने से जुड़े जोखिमों को बढ़ा दिया।
यात्री वाहन विनिर्माताओं में टाटा मोटर्स का दमदार देसी कारोबार जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) की नरमी का असर खत्म कर सकता है। नुवामा का अनुमान है कि भारत में टाटा के यात्री वाहनों के राजस्व में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, लेकिन जेएलआर के राजस्व में पाउंड के लिहाज से 9 प्रतिशत की गिरावट आएगी। इससे कुल राजस्व वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत तक सीमित रहेगी।
इलारा और एचडीएफसी सिक्योरिटीज का अनुमान है कि वृद्धि 5 प्रतिशत के आसपास रहेगी। आपूर्ति की दिक्कतों, कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी और कम परिचालन लाभ से जेएलआर के मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने 2.3 प्रतिशत एबिटा मार्जिन का पूर्वानुमान जताया है। अलग-अलग अनुमानों के अनुसार कुल पीएटी में 27 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के राजस्व में एसयूवी, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), निर्यात और ट्रैक्टर बिक्री में वृद्धि की बदौलत 21 से 26 प्रतिशत के इजाफे का अनुमान है, लेकिन कमोडिटी के दामों में वृद्धि और ईवी के अधिक हिस्से के कारण मार्जिन 30 से 170 आधार अंक तक घट सकता है। कर बाद लाभ स्थिर से 17 प्रतिशत के बीच रह सकता है।
उम्मीद जताई जा रही है कि मारुति सुजूकी 35 से 38 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि के साथ यात्री वाहन बनाने वाली बड़ी कंपनियों में सबसे आगे रहेगी। उसे घरेलू बिक्री, निर्यात, छोटी कारों और मुद्रा से होने वाले लाभ से मदद मिलेगी। हालांकि नुवामा, पीएल कैपिटल और एचडीएफसी सिक्योरिटीज पीएटी में 8 से 11 प्रतिशत गिरावट का अनुमान लगा रही हैं, जबकि इलारा ने 32 प्रतिशत गिरावट का अनुमान जताया है।