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DGCA का आदेश: हर उड़ान में 60% सीटें अतिरिक्त शुल्क से मुक्त, एक ही PNR वाले यात्रियों को साथ बैठाने का नियम

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पसंदीदा सीट चुनने पर लिया जाने वाला शुल्क विमानन कंपनियों की अतिरिक्त आय का एक बड़ा हिस्सा होता है

Last Updated- March 18, 2026 | 10:54 PM IST
Air plane seat

नागर विमानन मंत्रालय ने आज विमानन कंपनियों से कहा कि वे हर उड़ान में कम से कम 60 फीसदी सीटों को अतिरिक्त शुल्क से अलग रखे और यह सुनिश्चित करें कि एक ही पीएनआर वाले यात्रियों को आसपास ही बिठाया जाए। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एक अधिकारी ने चिंता जताई थी कि विमानन कंपनियां और ट्रैवल एजेंट अपनी वेबसाइट पर ‘डार्क पैटर्न’ वाली तरकीबें अपना रहे हैं।

वे यात्रियों को टिकट बुक करते समय या वेब चेक-इन के दौरान मनमाफिक सीट चुनने के लिए अतिरिक्त शुल्क देने के लिए उकसाते हैं। मगर वास्तव में अतिरिक्त शुल्क से मुक्त सीटों की संख्या काफी कम होती है। कई मामलों में तो अतिरिक्त शुल्क न देने पर एक ही पीएनआर वाले यात्रियों को अलग-अलग सीटों पर बिठाया जाता है जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है।

अब सरकार ने हर उड़ान में 60 फीसदी सीटों को अतिरिक्त शुल्क के दायरे से अलग रखने का नियम बनाया है। मगर इससे विमानन कंपनियों की अतिरिक्त आय और विशेष रूप से पसंदीदा सीट चुने जाने से होने वाली कमाई पर असर पड़ने की आशंका है। पसंदीदा सीट चुनने पर लिया जाने वाला शुल्क विमानन कंपनियों की अतिरिक्त आय का एक बड़ा हिस्सा होता है।

विमानन कंपनियां मुनाफा बढ़ाने के लिए ऐसी सेवाओं पर अधिक निर्भर होती जा रही हैं। यह रुझान इंडिगो के वित्तीय नतीजों में साफ तौर पर दिखता है। वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में उसकी अन्य स्रोतों से आय एक साल पहले की समान तिमाही के मुकाबले 13.6 फीसदी बढ़कर 2,446.2 करोड़ रुपये हो गई। यह यात्रियों के टिकट से होने वाली कमाई में 6.2 फीसदी की बढ़ोतरी के मुकाबले काफी अधिक थी।

टिकट बिक्री से प्राप्त आय एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त आय में अंतर उद्योग की एक बड़ी रणनीति को दर्शाता है जहां एक ओर प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए मूल किराये में अक्सर छूट दी जाती है जबकि सीट चुनने जैसी सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क लिए जाते हैं। इससे विमानन कंपनी को अपना मार्जिन बचाने में मदद मिलती है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन गया है। देश के हवाई अड्डों पर रोजाना 5,00,000 से अधिक यात्रियों की आवाजाही होती है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि सभी विमानन कंपनियों में यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक और एक जैसे नियम होने चाहिए।

मंत्रालय ने कहा है कि विमानन कंपनियों को सुरक्षा एवं संचालन संबंधी नियमों के दायरे में रहते हुए खेल के सामान, संगीत उपकरण और पालतू जानवरों को ले जाने के लिए पारदर्शी एवं यात्रियों के अनुकूल नीतियां अपनानी चाहिए।

मंत्रालय ने यात्रियों के अधिकारों से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने पर भी जोर दिया है। ऐसा खास तौर पर उड़ानों में देरी, रद्द होने या बोर्डिंग से मना किए जाने के मामलों के संदर्भ में कहा गया है। विमानन कंपनियों से कहा गया है कि वे इन अधिकारों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, बुकिंग प्लेटफॉर्म और हवाई अड्डा काउंटरों पर प्रमुखता से प्रदर्शित करें।

विमानन कंपनियों से यह भी कहा गया है कि वे यात्रियों के अधिकारों और सुविधाओं के बारे में क्षेत्रीय भाषाओं में स्पष्ट रूप से जानकारी दें ताकि लोगों तक पहुंच और जागरूकता बढ़ सके।

मंत्रालय ने कहा कि इन उपायों से यात्रियों को मदद मिलेगी, उनकी शिकायतें कम होंगी और पूरे विमानन क्षेत्र में बेहतर पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। यह सब ऐसे समय में किया जा रहा है जब उड़ान जैसी पहल के जरिये हवाई यात्रा का विस्तार तेजी से हो रहा है।

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First Published - March 18, 2026 | 10:46 PM IST

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