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FPI Outflows: 2025 के बाद भी नहीं थमी बिकवाली, 2026 में विदेशी निवेशक निकाल चुके ₹86,285 करोड़

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पश्चिम एशिया तनाव के बीच FPI का रुख निगेटिव, निफ्टी-सेंसेक्स में गिरावट और सेक्टरों में बदली निवेश रणनीति

Last Updated- March 18, 2026 | 9:02 AM IST
FPI

FPI Outflows: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में मार्च महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI का रुख फिर से निगेटिव हो गया है। ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के मुताबिक, जब तक यह भू-राजनीतिक तनाव बना रहेगा, तब तक विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे, विदेशी निवेश फिर से स्थिर हो सकता है। इसके पीछे भारत के मजबूत आर्थिक हालात, बेहतर ग्रोथ की उम्मीद और विकसित देशों के मुकाबले ठीक-ठाक वैल्यूएशन को वजह बताया जा रहा है।

FPI Outflows: इस साल कितनी हुई बिकवाली

NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 86,285 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। साल 2025 में भी कुल मिलाकर 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली हुई थी। वहीं 2026 में जनवरी महीने में FPIs ने 35,962 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, लेकिन फरवरी में उन्होंने वापसी करते हुए 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो सितंबर 2024 के बाद सबसे ज्यादा था।

बाजार पर पड़ा असर

विदेशी निवेश की बिकवाली का असर बाजार पर भी साफ दिखा है। इस साल अब तक निफ्टी 50 करीब 9.7 प्रतिशत गिर चुका है। वहीं सेंसेक्स में भी करीब 10.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। बाजार की कुल वैल्यू यानी मार्केट कैप में भी लगभग 22 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है।

किन सेक्टरों में निवेश से दूरी

एंटीक की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यूचुअल फंड और विदेशी निवेशक दोनों ही इस समय कैपेक्स से जुड़े सेक्टर जैसे कैपिटल गुड्स, पावर और सीमेंट से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं दूसरी ओर, ऑटो, उपभोक्ता सामान और FMCG जैसे सेक्टरों में इनकी रुचि ज्यादा बनी हुई है। फाइनेंशियल सेक्टर को लेकर भी पहले की तुलना में निगेटिव रुख थोड़ा कम हुआ है।

यह पढ़ें: पश्चिम एशिया तनाव के बीच बाजार में गिरावट, अब कहां करें निवेश? जानें एक्सपर्ट की राय

म्यूचुअल फंड और FPI की अलग रणनीति

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि म्यूचुअल फंड और विदेशी निवेशकों की रणनीति कई सेक्टरों में अलग-अलग है। फरवरी में म्यूचुअल फंड ने आईटी, टेलीकॉम, सीमेंट और कंज्यूमर सर्विसेज में निवेश बढ़ाया, जबकि मेटल, पावर, ऑटो और ऑयल-गैस सेक्टर में हिस्सेदारी घटाई। वहीं विदेशी निवेशक कैपिटल गुड्स, मेटल और पावर सेक्टर में ज्यादा खरीदार रहे, जबकि आईटी सेक्टर में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी कम कर दी।

निफ्टी के टारगेट घटाए गए

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच विदेशी ब्रोकरेज फर्मों ने भी निफ्टी के टारगेट घटा दिए हैं। नोमुरा ने अब निफ्टी का टारगेट 24,900 रखा है, जो पहले 29,300 था। वहीं सिटी रिसर्च ने भी 2026 के लिए अपना टारगेट 5.2 प्रतिशत घटाकर 27,000 कर दिया है।

किन सेक्टरों में दिख सकती है मजबूती

नोमुरा के मुताबिक, इस उतार-चढ़ाव के दौर में कोयला, तेल उत्पादन, हेल्थकेयर, फार्मा, FMCG और टेलीकॉम सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हालांकि, हेल्थकेयर और FMCG सेक्टर में वैल्यूएशन अभी थोड़ा महंगा माना जा रहा है।

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First Published - March 18, 2026 | 9:02 AM IST

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