केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि अगर वे अपने यहां पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) का नेटवर्क बढ़ाएंगे तो उन्हें अलग से 10 फीसदी वाणिज्यिक एलपीजी दी जाएगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने आज इसकी जानकारी दी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया युद्ध के कारण एलपीजी की आपूर्ति में कमी के बीच सरकार उपभोक्ताओं से रसोई गैस के लिए पीएनजी अपनाने का आग्रह कर रही है। भारत एलपीजी की कुल घरेलू खपत का 60 फीसदी आयात करता है जिसमें से लगभग 90 फीसदी की आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है।
सरकार ने 18 मार्च के एक पत्र में कहा है कि नए प्रस्ताव के तहत शहरी गैस वितरण आवेदनों को मंजूरी देने और शिकायतों का समाधान करने के लिए राज्य और जिला स्तरीय समितियों की स्थापना करने वाले राज्यों को 1 फीसदी अतिरिक्त गैस का आवंटन होगा।
शहरी गैस वितरण अनुमतियों को सक्षम करने वाले आदेश जारी करने के लिए 2 फीसदी और आपूर्ति की जाएगी। सरकार ने पहले राज्यों से लंबित आवेदनों के लिए डीम्ड अनुमतियां जारी करने, 24 घंटे के भीतर नई अनुमतियां स्वीकृत करने, सड़क नेटवर्क बिछाने और अनुमति शुल्क माफ करने, काम के घंटे में ढील देने और समन्वय तथा तेज कार्यान्वयन के लिए राज्य नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करके शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार करने का अनुरोध किया था।
सरकार ने कहा, ‘राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इन सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि शहरी गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार में तेजी लाई जा सके और घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए पीएनजी कनेक्शन में तेजी लाई जा सके।’
इस बीच भारत ईरान के साथ संपर्क कर होर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाजों के सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहा है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि एलएनजी के 2 लाख टन वाला एक टैंकर, एलपीजी के 3.2 लाख टन वाले छह टैंकर और कच्चे तेल के 16 लाख टन वाले चार पोत होर्मुज के पश्चिम में फंसे हुए हैं।
पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम 7 टैंकर रूस से कच्चा तेल ला रहे हैं, जो चीन की ओर जाने के बजाय बीच रास्ते में ही भारत की ओर मुड़ गए हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा का हवाला देते हुए इसकी जानकारी दी गई है।
रूसी तेल से लदा एक टैंकर जो चीन की ओर जा रहा था अब दक्षिण चीन सागर में यू-टर्न ले चुका है और भारत की ओर बढ़ रहा है। जहाज-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार एक्वा टाइटन नामक यह जहाज 21 मार्च को न्यू मंगलूर पहुंचेगा। अफ्रामैक्स जहाज ने शुरू में चीन के रिझाओ बंदरगाह को अपनी मंजिल बताया था, लेकिन मार्च के मध्य में दक्षिण-पूर्वी एशियाई जलक्षेत्र में उसने अचानक अपना रास्ता बदल लिया।
भारतीय झंडे वाला एक टैंकर ‘जग लाडकी’ 80,886 टन कच्चे तेल के साथ मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा। यह टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आया है।
(साथ में एजेंसियां)