अमेरिका की शीर्ष अदालत के फैसले के बाद ट्रंप शुल्क पर बनी अनिश्चितता के बीच भारत के मुख्य व्यापार वार्ताकार दर्पण जैन की अगुआई वाले दल ने फिलहाल वाशिंगटन की यात्रा स्थगित कर दी है। भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत के कानूनी मसौदे पर चर्चा करने और उसे अंतिम रूप देने के लिए यह दल तीन दिवसीय वार्ता के लिए रविवार को अमेरिका जाने वाला था।
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, ‘दोनों पक्षों का मानना है कि मुख्य वार्ताकार की प्रस्तावित यात्रा को ताजा घटनाक्रम और इसके प्रभावों का मूल्यांकन के बाद निर्धारित किया जाना चाहिए। बैठक को आपसी सुविधाजनक तिथि पर पुनर्निर्धारित किया जाएगा।’
इस बारे में जानकारी के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अमेरिकी दूतावास को ईमेल किया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) का उपयोग कर कुछ देशों पर जवाबी शुल्क लगाने के आदेशों को शुक्रवार को रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 फीसदी का एकसमान अधिभार लगा दिया और व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत इसे 15 फीसदी तक बढ़ाने का संकल्प लिया। ट्रंप ने अन्य कानूनों के तहत नई जांच के आदेश भी दिए जो उन्हें फिर से शुल्क लगाने का मौका दे सकते हैं।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका कानूनी ढांचे को समझने की कोशिश कर रहा है इसलिए बातचीत ‘रुक’ गई है। अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘अब व्यापार समझौते के स्वरूप को फिर से तैयार करने की दरकार है।’
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत ने व्यापार समझौते पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
दोनों देशों ने 7 फरवरी को संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा बताई थी और मार्च अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखा था। भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने पर अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क को हटा दिया था और 25 फीसदी जवाबी शुल्क को घटाकर 18 फीसदी करने पर सहमति जताई थी।
व्यापार अर्थशास्त्री विश्वजित धर ने कहा कि भारत को समझौते पर नए सिरे से बातचीत करनी चाहिए और कृषि, डिजिटल व्यापार जैसे लंबित मुद्दों को स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही अच्छा संतुलन बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है। हमें बराबरी के तौर पर बातचीत करने की जरूरत है। हमें एक कदम पीछे हटने और ट्रंप से निपटने के लिए वैकल्पिक रणनीति भी तैयार करने की आवश्यकता है।’
निर्यातकों के संगठन फियो के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय ने कहा कि भारत के लिए एकसमान अवसर है क्योंकि अब हर देश पर 15 फीसदी शुल्क लगेगा।
सहाय ने कहा, ‘शुल्क लागू करने के उपायों के संबंध में अनिश्चितता है। द्विपक्षीय व्यापार समझौता भारत के लिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें शुल्क से परे क्षेत्र भी शामिल हैं। द्विपक्षीय व्यापार करार से हम बातचीत करने और सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र दर को शून्य तक लाने की स्थिति में होंगे।’
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज में मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि ज्यादातर देशों द्वारा अमेरिका के साथ किए गए व्यापार सौदों का पुनर्मूल्यांकन करने की संभावना है। ताजा घटनाक्रम के तहत भारत पर प्रभावी शुल्क दर 11 से 13 फीसदी होने की संभावना है। यह चीन की तुलना में अनुकूल है, जिसकी प्रभावी दर 15 फीसदी के ऊपर हो सकती है मगर एशिया के अधिकांश देशों के लिए प्रभावी शुल्क भारत के समान होगा। हमें लगता है कि सौदे को अधिक न्यायसंगत बनाने की दृष्टि से फिर से बातचीत की जाएगी, अब भारत पर बड़ी रियायतें देने का दबाव कम है।’