आमतौर पर स्टार्टअप या बड़ी कंपनियों से जुड़ी कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजनाएं (ईसॉप्स) अब छोटे और मझोले उद्यम (एसएमई) के क्षेत्र में भी तेजी से जगह बनाती जा रही हैं।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग सात छोटे और मझोले उद्यमों ने ऐसी योजनाओं की घोषणा की है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने एनएसई पर इनसे जुड़ी कॉरपोरेट घोषणाओं का विश्लेषण किया है। इससे पता चलता है कि यह लगातार तीसरा साल है जब कम से कम आधा दर्जन कंपनियों ने इस तरह की घोषणाएं की हैं। इससे पहले के वर्षों में ऐसी घोषणाएं शायद ही देखने को मिलती थीं।
इस वर्ष कर्मचारियों को शेयर जारी करने की घोषणा करने वाली कुछ कंपनियों में दूरसंचार उपकरण फर्म फ्रॉग इनोवेशन, साइबर सुरक्षा प्रदाता टीएसी इन्फोसेक और प्रोवेंटस एग्रोकॉम शामिल हैं, जो ग्राहकों को ड्राई फ्रूट्स, नट्स और बीज मुहैया कराती है। प्रोवेंटस के प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक डी पी झवर ने कहा, उनके ईसॉप्स कार्यक्रम ने कर्मियों को जोड़े रखने में मदद की है और उन्हें अमीर बनाया है।
उन्होंने कहा, कंपनी के ईसॉप्स कार्यक्रम से अब तक 15 से अधिक कर्मचारी लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सृजित करने में सक्षम हुए हैं। एक नियोक्ता के रूप में हम महत्त्वपूर्ण पदों पर मजबूत दीर्घकालिक तालमेल, बेहतर प्रदर्शन और खास भूमिकाओं में कर्मचारियों को जोड़े रखने में सफल रहे हैं। टीम के करीब 80 फीसदी सदस्य पांच साल से अधिक समय से हमारे साथ जुड़े हुए हैं। अन्य कंपनियों को इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं आया।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) को स्टॉक एक्सचेंज के एक अलग खंड में सूचीबद्ध होने की अनुमति देता है। इसके लिए स्टॉक एक्सचेंज के मुख्य प्लेटफॉर्म की तुलना में कम शर्तें होती हैं। यह कंपनियों के लिए इक्विटी पूंजी जुटाने का एक रास्ता है। ईसॉप्स कंपनियों द्वारा प्रमुख कर्मचारियों को कंपनी में हिस्सेदारी देकर पुरस्कृत करने का एक तरीका है। यह तरीका स्टार्टअप्स में धन सृजन का एक स्रोत रहा है और बड़ी कंपनियों में मुआवजे का बड़ा हिस्सा हो सकता है।
प्रॉक्सी सलाहकार फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक और प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) के लिए कारोबारी दृष्टिकोण अधिक मजबूत है। प्रॉक्सी सलाहकार फर्म शेयरधारकों को कंपनी की पहलों, जिनमें पारिश्रमिक भी शामिल है, पर मतदान के बारे में मार्गदर्शन देती हैं। बड़ी कंपनियों के ब्रांड नामी होते हैं और रोजगार में भी स्थिरता होती है। अक्सर छोटी और कम मशहूर कंपनियों को बड़ी की तुलना में प्रतिभाओं को आकर्षित करने में कठिनाई होती है।
उन्हें प्रमुख कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए भारी भरकम वेतन देना पड़ता है। सुब्रमण्यन ने बताया कि छोटी कंपनियों में नकद मुआवजा देना मुश्किल हो सकता है, लेकिन प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए ईसॉप्स से फायदा हो सकता है।
दिल्ली की कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स की पार्टनर मोहिनी वार्ष्णेय के अनुसार छोटे और मझोले उद्यम (एसएमई) अपने कर्मचारियों को पुरस्कृत करने और उन्हें कंपनी की वृद्धि में भागीदार बनाने के लिए ईसॉप्स का इस्तेमाल कर रही हैं। यह तरीका कई एसएमई कंपनियों में ज्यादा प्रचलित है, जिनकी आकांक्षा मुख्यधारा के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की होती है। प्रौद्योगिकी जैसे कुछ सेक्टरों की कंपनियों को भर्ती बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए ईसॉप्स की आवश्यकता महसूस होती है। प्रमुख नियुक्तियों को अक्सर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अन्यत्र, जैसे स्टार्टअप में, कंपनी में हिस्सेदारी के माध्यम से महत्त्वपूर्ण संपत्ति अर्जित करने का अवसर दिया जाता है।
वार्ष्णेय के अनुसार वे इसी क्षेत्र में एसएमई उद्यमों में शामिल होने पर इसी तरह के पुरस्कारों की अपेक्षा करते हैं। उनका मानना है कि यह रुझान कम समय वाला नहीं है। उन्होंने कहा, ऐसा और भी देखने को मिलेगा।
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के अनुसार, सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने फरवरी में कहा था कि छोटे और मझोले उद्यमों के लिए नियामकीय और डिस्क्लोजर मानदंडों की जांच की जा रही है ताकि यह देखा जा सके कि निवेशकों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए व्यापार में ज्यादा सुगमता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें शिथिल किया जा सकता है या नहीं।