IDFC First Bank share price: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरो सोमवार (23 फरवरी) को बाजार में खुलते ही औंधे मुंह लुढ़क गए और बीएसई पर 20 प्रतिशत के निचले सर्किट पर पहुंच गए। बैंक के शेयरों में ये गिरावट चंडीगढ़ की एक ब्रांच में लगभग 590 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी के चलते आई है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर 10 प्रतिशत की गिरावट के साथ खुले। लेकिन बिकवाली का दबाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिखे और गिरावट जारी रही। बैंक ने जांच पूरी होने तक चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
चंडीगढ़ की एक ही ब्रांच में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने के बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरधारकों को बड़ा नुकसान हुआ। सोमवार को एक ही दिन में बैंक का मार्केट कैप करीब 14,438 करोड़ रुपये घट गया। निवेशकों ने तेजी से शेयर बेचना शुरू कर दिया। निवेशकों में चिंता इसलिए और ज्यादा गहरा गई क्योंकि यह रकम बैंक के पूरे तिमाही मुनाफे से भी ज्यादा है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) के शेयर में तेज गिरावट इसलिए आई क्योंकि बैंक ने कुछ संदिग्ध लेन-देन की जानकारी दी है। इससे बैंक के अंदरूनी सिस्टम और कमाई पर असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बैंक ने रेगुलेटरी फाईलिंग में बताया कि मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और पैसा दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की मांग की। इस प्रोसेस के दौरान बैंक ने पाया कि विभाग की ओर से बताए गए पैसे और खाते में मौजूद असली बैलेंस में अंतर है। इसके बाद बैंक ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। 18 फरवरी 2026 के बाद हरियाणा सरकार की अन्य इकाइयों ने भी अपने खातों को लेकर बैंक से संपर्क किया। इनमें भी बैंक के रिकॉर्ड और संबंधित विभागों के बताए बैलेंस में अंतर पाया गया।
बैंक का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला सिर्फ हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खास खातों तक सीमित है, जो चंडीगढ़ ब्रांच से संचालित होते हैं। इसका असर ब्रांच के बाकी ग्राहकों पर नहीं पड़ा है। इन खातों में कुल मिलाकर करीब 590 करोड़ रुपये की रकम का मिलान (रीकंसिलिएशन) किया जा रहा है। यह रकम बैंक को अक्टूबर–दिसंबर 2025-26 तिमाही में हुए 503 करोड़ रुपये के नेट मुनाफे से भी ज्यादा है।
बैंक ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खास खातों में कुछ कर्मचारियों के बिना अनुमति के और धोखाधड़ी वाले लेन-देन किए गए। इसमें कुछ अन्य लोग या संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं।
बैंक के मुताबिक, 590 करोड़ रुपये की यह रकम अभी अनुमानित है और खातों का मिलान (रीकंसिलिएशन) चल रहा है। आगे की जानकारी और संभावित वसूली के बाद यह राशि बदल भी सकती है। 18 फरवरी के बाद हरियाणा सरकार से जुड़े अन्य खातों में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई है।
बैंक ने साफ किया है कि शुरुआती जांच के अनुसार यह मामला सिर्फ चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ सरकारी खातों तक सीमित है और इससे बाकी ग्राहकों पर असर नहीं पड़ा है।
जांच पूरी होने तक चार बैंक अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। बैंक ने कहा है कि जो भी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला 20 फरवरी 2026 को बोर्ड की विशेष समिति के सामने भी रखा गया है, जो फ्रॉड मामलों की निगरानी करती है।
हरियाणा सरकार ने इस खुलासे के बाद रविवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को तत्काल प्रभाव से सरकारी कामकाज संभालने से प्रतिबंधित कर दिया। वित्त विभाग की तरफ से सर्कुलर के अनुसार, अगले आदेश तक इन बैंकों के जरिए किसी भी प्रकार की सरकारी धनराशि को जमा, निवेश या लेनदेन नहीं किया जाएगा।