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प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक उधारी के नए नियम बदलने पर विचार नहीं

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बाजार के प्रभावित प्रतिभागियों ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में अपनी चिंता सामने रखी

Last Updated- February 23, 2026 | 10:17 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने सोमवार को कहा कि बैंकिंग नियामक अपने नए मानदंडों में बदलाव करने पर विचार नहीं कर रहा है, जो प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक उधारी को सख्त बनाते हैं। हालांकि, बाजार के प्रभावित प्रतिभागियों ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में अपनी चिंता सामने रखी और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने संकेत दिया कि इस मुद्दे की जांच की जाएगी।

आरबीआई गवर्नर ने जोर देते हुए कहा कि नियामक किसी भी नियम को अंतिम रूप देने से पहले हमेशा परामर्श करता है। उन्होंने बताया कि 13 फरवरी से लागू हुए नए नियमों के शुरुआती मसौदे में प्रोप्राइटरी ट्रेड के लिए ऐसे विशेष प्रकार के कर्ज पर रोक लगाने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा, उसके बाद प्राप्त टिप्पणियों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए, हमने अब कुछ विवेकपूर्ण मानदंडों के साथ इसकी अनुमति दे दी है। फिलहाल हम इसमें कोई बदलाव करने पर विचार नहीं कर रहे हैं।

आरबीआई ने बैंकों को अपने खाते में ट्रेडिंग के लिए कर्ज देने से प्रतिबंधित करके और सख्त तथा पूर्णतः कोलेटरल वाले कर्ज देने के मानदंडों को अनिवार्य बनाकर प्रॉप डेस्क के लिए सस्ते लिवरेज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, ऐसा उद्योग का तर्क है। परिणामस्वरूप प्रॉप फर्मों को आंतरिक पूंजी पर ज्यादा निर्भर रहना होगा, जिससे फंडिंग की लागत बढ़ेगी और लाभप्रदता कम होगी, विशेष रूप से छोटी कंपनियों के लिए।

इससे पहले सोमवार को सेबी के चेयरमैन ने कहा कि शेयर बाजार नियामक को इस मुद्दे पर उद्योग का पक्ष मिला है। उन्होंने कहा, हम देखेंगे कि हम इस पर क्या कर सकते हैं और हमें क्या करने की आवश्यकता है क्योंकि आरबीआई ने पहले मसौदा दिशानिर्देश जारी किए थे और उनसे राय मांगी थी और उनमें से कई ने ऐसा किया भी होगा। यह विशेष रूप से बैंक गारंटी और प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए कितनी जमानत देनी होगी आदि से संबंधित मुद्दों के बारे में है। इसमें तीन से चार मुद्दे हैं, इसलिए मूल रूप से यह आरबीआई का मामला है। चूंकि उनका पक्ष हमारे पास आया है, इसलिए हम इस पर गौर करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, सोमवार को एसोसिएशन ऑफ एनएसई मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि लगभग 40 मिनट तक चली इस बैठक के दौरान अधिकारियों ने अंतिम मानदंडों में मौजूद कमियों और उनसे संबंधित आंकड़ों की जानकारी मांगी।

सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने एएनएमआई से पिछली प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत करने को कहा है और यह भी बताने को कहा है कि क्या आरबीआई द्वारा जारी मसौदा दिशानिर्देशों में कोई विशिष्ट उपाय शामिल नहीं थे, जिन्हें अंतिम मानदंडों में औपचारिक रूप दिया गया है। आरबीआई के निर्देश से प्रभावित स्टॉक ब्रोकरों और अन्य पूंजी बाजार मध्यस्थों द्वारा मांगी गई राहत का आकलन करने के लिए उनके द्वारा पेश विवरणों की समीक्षा की जाएगी।

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First Published - February 23, 2026 | 9:55 PM IST

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