दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय इंदिरागांधी एयरपोर्ट (आईजीआई) एशिया प्रशांत क्षेत्र के 10 सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में पांचवें नंबर पर आ गया है। कोविड महामारी के बाद इसकी स्थिति में तेजी से बदलाव देखने को मिला है और इसने तेज छलांग लगाई है।
विमानन डेटा प्लेटफॉर्म ओएजी के अनुसार, वर्ष 2025 में दिल्ली आईजीआई एयरपोर्ट 4.61 करोड़ सीटों के साथ 5वें स्थान पर रहा, जबकि 2019 में यह 9वें स्थान पर था। भारत में हवाई यात्रा की बढ़ती घरेलू मांग ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। क्योंकि जैसे-जैसे स्थानीय स्तर पर हवाई जहाजों से लोगों की आवाजाही बढ़ी, देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो के नेतृत्व में बहुत तेजी से क्षमता विस्तार हुआ, जिससे दिल्ली हवाई अड्डे का प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर बेहतर हुआ। और 2019 के बाद से छह वर्षों के दौरान दिल्ली हवाई अड्डे ने एशिया के कई विख्यात हवाई अड्डों को पीछे छोड़ दिया, जिनमें बैंकाक सुवर्णभूमि (2025 में 3.94 करोड़ सीट क्षमता), सिंगापुर चांगी (4.25 करोड़) और दक्षिण कोरिया का सोल इंचियोन (4.34 करोड़) शामिल हैं। वर्ष 2019 में ये सभी हवाई अड्डे दिल्ली स्थित आईजीआई के मुकाबले काफी व्यस्त माने जाते थे।
इतना ही नहीं, दिल्ली हवाई अड्डा पेइचिंग कैपिटल के भी काफी करीब पहुंच गया है, जो 2019 में इस क्षेत्र का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा हुआ करता था। वर्ष 2025 में आईजीआई और पेइचिंग कैपिटल के बीच केवल 31,000 सीटों का ही अंतर रहा। महामारी के दौरान पेइचिंग एयरपोर्ट की स्थिति काफी तेजी से बदली और अब यह 4.62 सीटों के साथ वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर आ गया है।
दिल्ली में एयरपोर्ट की संचालक एजेंसी जीएमआर यहां लगातार क्षमता विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अगले 5 वर्षों में यह इसकी क्षमता में 30 प्रतिशत की वृद्धि करने की योजना बना रही है।