आयकर अपील प्राधिकरण के मुंबई पीठ के फैसले से पुराने घरों के पुनर्विकास का काम कर रहे कई संपत्ति मालिकों का कर बोझ घट सकता है। इस पीठ ने पूरी मूल संपत्ति पर अधिग्रहण की पूरी इंडेक्स लागत को स्वीकार कर लिया है और नए ढांचे में पुन: मिलने वाली कई मंजिलों पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54 के तहत पूंजीगत लाभ छूट को बरकरार रखा है।
आईटीएटी के पीठ ने 20 फरवरी के आदेश में अपीलकर्ता सीता नायर पर लगाए गए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) को रद्द कर दिया। दरअसल, निर्धारण अधिकारी ने अपीलकर्ता पर अतिरिक्त एलटीसीजी लगाया था।
सीता नायर और उनके पति नई दिल्ली के महारानीबाग इलाके में 500 वर्ग गज भूखंड पर आवासीय मकान के मालिक थे। उन्होंने 2012 में बिल्डर मैसर्स चेतन्य बिल्डकॉन के साथ पुनर्विकास समझौता किया। इसके तहत बिल्डर ने पुरानी इमारत को ध्वस्त कर अपने खर्च पर भूतल सहित तीन मंजिला इमारत का निर्माण किया। इसके बदले में बिल्डर को पहली मंजिल और जमीन में 22.5 प्रतिशत अविभाजित हिस्सा मिला। हालांकि मालिकों को भूतल (पति), दूसरी और तीसरी मंजिल (सीता नायर), जमीन में 77.5 प्रतिशत अविभाजित हिस्सा और 2.5 करोड़ रुपये नकद मिले।
करदाता ने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की गणना की लेकिन पूरी मूल संपत्ति की अनुक्रमित लागत का दावा किया। इसके तहत करदाता ने प्राप्त दो नए तलों की लागत पर धारा 54 के तहत कटौती के विरुद्ध समायोजित किया।
निर्धारण अधिकारी ने अधिग्रहण की अनुक्रमित लागत को केवल 22.5 प्रतिशत (निर्माता के भूमि हिस्से) तक सीमित कर दिया और धारा 54 के तहत राहत देने से इनकार कर दिया। अधिकारी ने तर्क दिया कि करदाता ने ‘दो तलों में निवेश किया था’ जिसे 2014 के संशोधन के बाद एकल आवासीय मकान नहीं माना जा सकता।
धारा 54 आवासीय मकान की बिक्री या हस्तांतरण पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर से छूट प्रदान करती है, बशर्ते पूंजीगत लाभ को दो वर्षों (खरीद) या तीन वर्षों (निर्माण) के भीतर किसी अन्य आवासीय मकान को खरीदने या निर्माण करने में पुनर्निवेश किया जाए। हालांकि वर्ष 2014 के संशोधन ने छूट को केवल एक आवासीय मकान तक सीमित कर दिया।
प्राधिकरण ने दोनों समायोजनों को उलटते हुए कहा : ‘हस्तांतरित पूंजीगत संपत्ति मौजूदा अचल संपत्ति थी जिसके बदले में करदाता और उसके पति को निर्मित क्षेत्र के साथ-साथ भूमि पर अविभाजित हिस्सा प्राप्त हुआ। इसलिए अधिनियम की धारा 48 के तहत अनुक्रमण लाभ सहित अधिग्रहण लागत पूरी संपत्ति पर लागू होगी और इसे 22.5 प्रतिशत तक सीमित नहीं किया जा सकता है।’