देश के दूर-दराज के गांवों में अब बैंक जाना इतना मुश्किल नहीं रहा। महिलाएं घर के पास ही अकाउंट खोल रही हैं, पैसे जमा-निकासी कर रही हैं और सरकारी योजनाओं का फायदा ले रही हैं। ये सब BC सखी कार्यक्रम की वजह से संभव हो पा रहा है। यह सरकार की एक खास योजना है, जिसके तहत गांव की महिलाओं को बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) बनाया जा रहा है, ताकि वे अपने ही गांव में लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा सकें। आइए विस्तार से इस योजना के बारे में समझते हैं।
इस कार्यक्रम को वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने शुरू किया है। इसे जमीन पर लागू करने के लिए राज्य सरकारें, बैंक और निजी कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं।
ज्यादातर बैंक सखियां स्वयं सहायता समूह (SHG) से चुनी जाती हैं। उन्हें सरकारी और बैंक के ट्रेनिंग सेंटरों में खास प्रशिक्षण दिया जाता है। इस ट्रेनिंग में डिजिटल मशीन चलाना, लेन-देन करना, बैंक की योजनाओं की जानकारी और जरूरी नियम-कायदे सिखाए जाते हैं।
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ये सखियां अपने ही गांव या आसपास के इलाकों में काम शुरू कर देती हैं। इससे लोगों को बैंक की शाखा तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
कुछ जिलों में Roinet Solutions जैसी कंपनियां टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग और मैनेजमेंट में मदद कर रही हैं। सखियों को बैंक से सीधे कमीशन मिलता है, जिससे उनकी अपनी कमाई और रोजगार दोनों बनते हैं।
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पहले गांवों में बैंक की पहुंच बहुत कम थी। लोग मजबूरी में महंगे ब्याज पर स्थानीय साहूकारों से कर्ज लेते थे। अब BC सखियां घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं। खाता खोलना, पैसे जमा-निकालना, ट्रांसफर करना या सरकारी योजना में नाम जुड़वाना, सब काम आसानी से हो जाता है।
ये सखियां प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी योजनाओं में भी लोगों की मदद करती हैं। इन योजनाओं से कम पैसे में बीमा कवर मिलता है।
न्यूज वेबसाइट CNBC TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, Roinet Solutions के तीन जिलों में करीब 1,500 BC सखियां काम कर रही हैं। इन्होंने अब तक लगभग 40,000 बैंक खाते खुलवाए हैं और हर महीने इनके जरिए 20 से 25 करोड़ रुपये तक का लेन-देन हो रहा है।
खासकर महिलाएं इन सखियों पर ज्यादा भरोसा करती हैं। दूर की बैंक शाखा जाने में समय और पैसा दोनों बचते हैं। अब कई परिवार औपचारिक बैंकिंग से जुड़ रहे हैं, हालांकि जरूरत पड़ने पर कुछ लोग अभी भी साहूकारों से कर्ज लेते हैं।
BC सखी बनने से सिर्फ गांव वालों को ही नहीं, खुद सखियों को भी बड़ा फायदा हो रहा है। उनकी आमदनी के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। CNBC TV18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक सखी संगीता कहती हैं, “पहले मुझे बचत और पैसों की समझ कम थी। सखी बनने के बाद मैंने खुद पैसे संभालना सीखा और अब दूसरी महिलाओं को भी सलाह देती हूं। आज मैं आर्थिक रूप से मजबूत हूं और अपने फैसले खुद लेती हूं।”
कई सखियों की महीने की कमाई 11–12 हजार रुपये तक पहुंच रही है। जितने ज्यादा ट्रांजैक्शन, उतना ज्यादा कमीशन। LiveMint की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 1.42 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं BC सखी के रूप में काम कर रही हैं।
बता दें कि यह कार्यक्रम 2017 में विश्व बैंक की मदद से शुरू हुआ था। इसका लक्ष्य है कि देश की हर 1.5 लाख ग्राम पंचायतों में कम से कम एक BC सखी तैनात हो।
उत्तर प्रदेश में ‘एक ग्राम पंचायत–एक BC सखी’ योजना 2020 में शुरू हुई। उत्तर प्रदेश में करीब 40,000 BC सखियां तैनात हैं। इनके जरिए अब तक 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंकिंग ट्रांजैक्शन हो चुके हैं। इससे लगभग हर गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच गई हैं। महिलाओं को घर बैठे सुविधाएं मिल रही हैं और उनकी आर्थिक आजादी भी बढ़ रही है।
देशभर में ये सखियां करीब 40 तरह की बैंकिंग सेवाएं दे सकती हैं जिसके चलते अब कैश जमा-निकासी, AEPS से पैसा निकालना, लोन में मदद, पेंशन बांटना, आधार सीडिंग जैसे काम आसानी से हो रहे हैं। इस पहल ने गांवों की महिलाओं को बैंकिंग से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाया है। आंकड़े बताते हैं कि जहां-जहां BC सखियां सक्रिय हैं, वहां बैंकिंग सेवाओं के इस्तेमाल में साफ बढ़ोतरी हुई है।