एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक (एयू-एसएफबी) के शेयर के भाव सोमवार को करीब 7 प्रतिशत गिर गए, लेकिन कुछ नुकसान की भरपाई करते हुए यह पिछले बंद भाव से 5.30 प्रतिशत नीचे 974.45 रुपये पर बंद हुआ।
हरियाणा सरकार ने 18 फरवरी को एक अधिसूचना जारी कर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ एयू एसएफबी को अपने पैनल से बाहर कर दिया, उसके बाद शेयरों के दाम में यह गिरावटआई है। राज्य सरकार ने कहा कि अब से इन बैंकों में कोई भी सरकारी फंड नहीं रखा जाएगा, न इनमें कोई जमा, निवेश या लेन-देन होगा। नए नियमों के तहत प्रशासनिक सचिव राज्य में चल रहे राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही सरकारी योजनाओं के लिए खाते खोलने को मंजूरी दे सकते हैं और निजी बैंक में खाता खोलने के लिए मंजूरी लेनी होगी।
राज्य सरकार ने अधिसूचना में कहा कि वित्त विभाग ने पाया कि विभाग और निगमों द्वारा जमा किए गए धन के मामले में शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने कहा, ‘कई मामलों में यह देखा गया कि ज्यादा ब्याज देने वाले फ्लेक्सिबल सावधि जमा या दूसरी सावधि जमा योजनाओं में धन रखे जाने के साफ निर्देश के बावजूद बैंक इस पैसे को बचत खाते में रख रहे हैं, जिससे सरकार का रिटर्न कम हो रहा है और इससे वित्तीय नुकसान हो रहा है।’
इस मसले पर एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक ने कहा कि वह पैनल से बाहर निकाले जाने के कारणों का पता लगाने के लिए हरियाणा सरकार से बातचीत कर रहा है और जरूरत पड़ने पर वह सरकार या किसी भी प्राधिकारी के साथ सहयोग करेगा।
बैंक ने बताया कि 17 फरवरी, 2026 तक उसके पास हरियाणा सरकार से कुल 735 करोड़ रुपये जमा थे। पैनल से निकाले जाने के बाद 21 फरवरी, 2026 तक जमा घटकर 538 करोड़ रुपये रह गया। यह धन करीब 200 खातों में था और यह 31 दिसंबर, 2026 तक बैंक में जमा कुल धन का 0.4 प्रतिशत था। बैंक ने कहा, ‘एक बैंक के तौर पर हम बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और जनता के धन की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हम पैनल में फिर से शामिल किए जाने के लिए हरियाणा सरकार से बातचीत जारी रखेंगे।’
बैंक ने बताया कि उसने हरियाणा सरकार के एक विभाग के खाते से जुड़ी जानकारी और संदिग्ध अनधिकृत लेनदेन के बारे में एक आंतरिक समीक्षा शुरू की है, लेकिन अभी बैंक पर किसी वित्तीय असर के संकेत नहीं हैं।
शुरुआती समीक्षा के आधार पर बैंक ने कहा कि अभी बैंक में किसी भी धोखाधड़ी वाली गतिविधि या इसके किसी वित्तीय असर के संकेत नहीं मिले हैं। यह मसला बोर्ड के समक्ष रखा गया है और उचित व पारदर्शी समीक्षा के लिए कुछ कर्मचारियों को ड्यूटी से दूर रखा गया है।