चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर उम्मीद से अधिक 8.2 फीसदी रहने के बाद तीसरी तिमाही में वृद्धि दर में नरमी दिख सकती है। प्रतिकूल आधार प्रभाव और वृद्धि के प्रमुख संकेतकों में मंदी के कारण दिसंबर में खत्म तीसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि थोड़ी कम रह सकती है मगर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खपत और निवेश में तेजी से वृद्धि दर 7 फीसदी से ऊपर ही रहेगी।
आगामी शुक्रवार को नए आधार वर्ष 2022-23 के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े जारी किए जाएंगे। साथ ही पूरे वित्त वर्ष के लिए जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान भी जारी किए जाएंगे।
बिजली की मांग और स्टील की खपत जैसे नियमित अंतराल पर मिलने वाले संकेतकों में तीसरी तिमाही के दौरान नरमी दिख रही है। बिजली की मांग दूसरी तिमाही की तुलना में 0.2 फीसदी घटी है जबकि स्टील की खपत 4.6 फीसदी बढ़ी है। हालांकि सीमेंट उत्पादन मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 11.1 फीसदी बढ़ा है जो दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी बढ़ा था। भारत के वस्तु निर्यात और विनिर्माण एवं सेवा गतिविधियों, दोनों के मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स में तीसरी तिमाही के दौरान में कमी दर्ज की गई है।
दोपहिया और घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री जैसे संकेतकों ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 20.9 फीसदी की वृद्धि दिखाई है।
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी वृद्धि के बाद अर्थव्यवस्था में वास्तविक वृद्धि 8 फीसदी रही। वित्त वर्ष 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही जो छह तिमाही में सबसे तेज वृद्धि है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026 में 7.4 फीसदी रह सकती है जो वित्त वर्ष 2025 में 6.5 फीसदी थी। नए आधार वर्ष 2022-23 और वित्त वर्ष के बाकी बचे महीनों के आधार पर वृद्धि दर के अनुमान में संशोधन हो सकता है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने दूसरी तिमाही में वृद्धि दर घटकर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘नरमी के कारणों में प्रतिकूल आधार प्रभाव, सरकारी पूंजीगत व्यय में कमी, राज्य सरकारों के राजस्व व्यय में कमी और कमजोर वस्तु निर्यात शामिल हैं। फिर भी माल एवं सेवा कर में कटौती और त्योहारी मौसम में मजबूत मांग ने तीसरी तिमाही में वृद्धि दर 7 फीसदी से ऊपर बनाए रखा है।’
इक्रा ने कहा कि सेवा और कृषि क्षेत्र में कम वृद्धि की भरपाई औद्योगिक क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन से हो सकती है। इस क्षेत्र का उत्पादन तीसरी तिमाही में 8.3 फीसदी बढ़ा है जबकि दूसरी तिमाही में 7.7 फीसदी की वृद्धि देखी गई।
इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, ‘पुराने आधार वर्ष को ध्यान में रखते हुए हम वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में लगभग 7 फीसदी की वृद्धि देख रहे हैं। व्यापार के कारण वृद्धि पर कुछ असर पड़ेगा मगर विकास की गति जारी रहेगी। खपत पिछले साल की तुलना में कम हो सकती है लेकिन तीसरी तिमाही में सकल स्थिर पूंजी निर्माण 7.5 फीसदी बढ़ सकता है।’
तीसरी तिमाही में घरेलू हवाई यातायात में 1.87 फीसदी की तेजी आई है मगर पेट्रोल और डीजल की खपत में बढ़त दूसरी तिमाही के 4.37 फीसदी से घटकर तीसरी तिमाही में 3.97 फीसदी रह गई।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘पिछले दो महीनों में खपत वृद्धि ने अच्छी गति दिखाई है। हमारे अनुमानों के अनुसार तीसरी तिमाही की वृद्धि दर 7 फीसदी से ऊपर रहेगी।’दिसंबर 2025 में पूंजीगत खर्च पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 24.5 फीसदी घट गया। अर्थशात्रियों को वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में पूंजीगत व्यय बढ़कर 10.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।